sick man on bed

ताँबे की कमी से होने वाले रोग

मनुष्य के शरीर के निर्माण में कई तरह की धातुओं व तत्वों का योगदान होता है। उन सभी का एक संतुलित मात्रा में होने से ही मानव शरीर निरोगी, स्वस्थ व हृष्ट-पुष्ठ बनता है।  अन्य सभी तत्वों की भाँति ताम्रतत्व भी मनुष्य के लिए महत्वपूर्ण व जीवनदायी तत्व है। इस तत्व के शरीर में कम हो जाने से घातक परिणामों से साक्षात्कार हो सकता है तथा मानव शरीर गंभीर रोगों से ग्रस्त हो जाता है।

एनीमिया रोग एक रक्त विकार है, जिसका एक कारण ताम्रतत्व की कम मात्रा हो सकता है। इस रोग में मनुष्य के शरीर में रक्त की मात्रा कम हो जाती है, जिससे कमजोरी व थकान अत्यंत होने लगती है तथा मनुष्य रोगग्रस्त होने लगता है।

शरीर में ताँबे की कमी से यूरिक एसिड कम हो जाता है, जिस वजह से गठिया रोग और जोड़ों में सूजन या दर्द का रोग होने की आशंका हो सकती है।

ताँबे में पाये वाले तत्वों का अच्छा प्रभाव थायरोक्सिन हॉर्मोन पर पड़ता है। यदि शरीर में ताम्रतत्व कम हो जाए तो इस हार्मोन का संतुलन बिगड़ सकता है, जिस से मनुष्य के शरीर में थायराइड की शिकायत हो सकती है।

चर्म रोग का भी एक कारण ताम्रतत्व की कमी होना होता है। चेहरे पर झुर्रियाँ व कील-मुहाँसेे और त्वचा के निखार में कमी व ढीलापन आदि ताँबे की कमी से हो सकते हैं।

ताम्रतत्व की कमी से मानव प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता है, जिससे घावों का जल्दी ठीक न होना तथा इन्फेक्शन की समस्या भी हो सकती है।

ताँबे की कमी से शरीर में पाए जाने वाले मेलेनिन वर्णक के निर्माण की क्रिया में रुकावट आती है, जिस से नेत्र विकार उत्पन्न हो सकते है।

ताँबे की कमी से शरीर में कोलेस्ट्रोल की मात्रा का संतुलन खराब हो जाता है, जिस से दिल के रोग उत्पन्न हो सकते है और मोटापा बढ़ने का ख़तरा रहता है।

ताम्रतत्व की कमी से मानव शरीर में पाये जाने वाले छोटे-छोटे बैक्टीरिया व विषैले पदार्थों की संख्या बढ़ती रहती है, जिस से पीलिया, उल्टी व दस्त आदि समस्याएं हो जाती हैं।


Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *