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पहाड़ों पर खाना देर से क्यों बनता

पहाड़ सी (समुद्र ) लेवल से काफी ऊँचाई पर स्थित होतें है | और सी (समुद्र )  लेवल पर पानी का क्वथनांक १०० डिग्री सेल्सिअस होता है |

जैसे – जैसे उंचाई बढती है जो वातावरण का अर्थात हवा का दबाव होता है वह कम होता, जाता है | और यह दबाव प्रति अणु पर होता है, अर्थात सी लेवल की ऊँचाई पर प्रति अणु जो दबाव होता है वह ऊँचाई बढ़ने से कम होने लगता है एवं इसी कारण जो पानी का क्वथनांक होता है कम होता जाता है| लगभग सी लेवल से एक किलोमीटर की ऊँचाई पर पानी का क्वथानांक ९२ डिग्री सेल्सियस तक हो जाता है |

इसी कारण से पानी जल्दी उबल जाता है और सब्जी या भोजन जलने का खतरा ज्यादा होता है | इसलिये अगर आप पहाड़ों में खुले बर्तन में भोजन पकाएंगे तो यह काफी थका देने वाला और सरदर्द वाला काम हो सकता है| परन्तु अगर आप बंद बर्तन का इस्तेमाल करेंगे तो यह काफी सहज हो सकता है, परन्तु आप के घर से थोडा ज्यादा समय लगेगा | यही कारण है की पहाड़ों पर खाना देर से पकता है |


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2 responses to “पहाड़ों पर खाना देर से क्यों बनता”

  1. Not clear

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