संतुलित आहार किसे कहते है । What is balanced diet in Hindi

संतुलित आहार

परिभाषा: संतुलित आहार, जैसा की नाम से ही उजागर हो रहा है, उस आहार को कहते है, जिसमे प्रचुर मात्रा में, मानव शरीर के लिए पोषक तत्व विद्यमान हो और जो शरीर और दिमाग के बीच संतुलन बनाये रख सके।

बाल्यावस्था से ही बच्चों को संतुलित आहार देने की सलाह दी जाती है, जिससे की शरीर को आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स मिल सके और शरीर और दिमाग का अच्छे से विकास हो सके।

संतुलित आहार के अंतर्गत हरी सब्जियाँ, विभिन्न प्रकार की दालें, अंडे, दूध, मछली, फल, अनाज आदि को सम्मिलित किया गया है। आईये देखते है, संतुलित आहार के अंतर्गत कौन-कौन से खाद्य पदार्थ आते है, जिस से की आपको संतुलित आहार के बारे में सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त हो सके:-

प्रोटीन युक्त संतुलित आहार:

दूध,बादाम, अंडे, मांस,मछली, सोयाबीन इत्यादि में प्रोटीन प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा आप मटर, चना आदि का सेवन भी कर सकते है। हमारे शरीर के पूर्ण विकास के लिए प्रोटीन एक आवशयक तत्व है। समय के साथ शरीर की प्रोटीन की जरूरत कम हो जाती है, किन्तु युवावस्था में ये एक जरूरी आहार है।

आयरन और कैल्शियम युक्त संतुलित आहार:

संतुलित आहार की श्रेणी में आयरन और कैल्शियम युक्त संतुलित आहार, जैसे की:- हरी सब्जियां, पनीर, मखन, छाछ, आदि और आयरन लिए हरी सब्जियां,फल, अनाज आदि आवश्यक है।

विटामिन्स और कार्बोहाइड्रेट्स युक्त संतुलित आहार:

चावल, गेंहू, मटर, टमाटर, बाजरा आदि में कार्बोहाइड्रेट्स और विटामिन्स प्रचुर मात्र में पाए जाते है। जो हमारे शरीर को आवश्यक कैलोरिस और शक्ति प्रदान करते है।

ब्रायोफाइटा क्या है?

ब्रायोफाईटा एक तरह का पादप है जो विज्ञानं के अंतर्गत एक उभयचर माना जाता है! मुख्य रूप से यह पौधा थल एवं जल दोनों जगहों में मौजूद रहता है! इस पौधे में हरितलवक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है! ब्रायोफाईटा प्रजाति के सदस्य, वर्षा के दिनों में दीवारों, झीलों, नदियों, एवं झरनों के किनारे फ़ैल जाते है!

बहुकोश्कीय अंगो से युक्त इस पादप का आकार थेलसीनुमा होता है! उदहारण के रूप में रिक्सिया, मर्केंशिया, एन्थेसिरस आदि इस प्रजाति के सदस्य माने जाते है! ब्रायोफाईटा नमी वाले स्थानों पर निवास करते है, परन्तु ये शुष्क स्थानों पर भी जीवित रह सकते है! ब्रायोफाईटा को पनपने के लिए अधिक पानी या मिटटी की उर्वरता की आवश्यकता नहीं होती, ये कठोर चट्टानों, एवं ऊंचाई वाले स्थानों पर भी विकसित हो सकते है!

ब्रायोफाईटा का जीवन चक्र:

वैज्ञानिक वर्गीकरण का अंतर्गत ब्रायोफाईटा को तीन भागों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार है:-

  • हिपैटिसी
  • मसाई
  • एन्थोसिरोटी

विज्ञान के अंतर्गत इन सभी भागो के आगे उपभाग है, जो ब्रायोफाईटा वर्ग को एक विशाल पादप समूह के रूप में उजागर करते है! ब्रायोफाईटा की उत्पति के लिए शैवाल को प्रथम जिम्मेदार मन गया है, ब्रायोफाईटा के अंतर्गत करीब २३,००० उच्च प्रजातिया एवं निम्न प्रजातिया सम्मिलित की गई है!

ब्रायोफाईटा प्रजाति के सदस्य लम्बे समय तक अपने अस्तित्व को बनाये रखने में सफल होते है, क्योकि ये मिटटी और सूरज की किरणों से अपने लिए भोजन उत्पन करते है! ब्रायोफाईटा अपने युग्मजो से असंख्य बीजाणु की उत्पति करता है, जिससे नये पौधो का विकास होता है!

जीवाणु क्या है। What is Bacteria in Hindi

बैक्टीरिया

जीवाणु एक एककोशकीय जीव है। जीवाणु एक अकेंद्रिक या प्रोकेरियोट जीव है। ऐसे जीव का केन्द्रक (न्यूक्लियस) नही होता। जीवाणु  (बैक्टीरिया) हर जगह पाए जाते हैं समुद्र में , मिट्टी में, हमारे शरीर में। कई जीवाणु हमारे शरीर के लिए अच्छे भी हैं  तो कई हमे बीमार भी कर देते हैं। जैसे की दही में पाया जाने वाला जीवाणु हमारे शरीर के लिए उपयोगी है वही निमोनिया का जीवाणु हमे बीमार कर देता है।

जीवाणु अलैंगिक प्रजनन करते है। वे द्विखण्डन द्वारा दो भागो में विभाजित हो जाते हैं। जिसमे की जनक कोशिका (Parent cell) डीएनए का कॉपी करके फ़ैल जाता है और बाद में बिच से द्विखण्डन द्वारा दो भागो में विभाजित हो जाता है।

विभाजन के बाद पुत्री कोशिका (Daughter cells) और जनक कोशिका (Parent cell) दोनों का डीएनए समान होता है।

विषाणु (वायरस) किसे कहते है। What is virus in Biology in Hindi

विषाणु

परिभाषा : वायरस प्रोटीन कोट से ढाका हुआ, न्यूक्लिक एसिड का एक अणु  है जो संक्रमण फ़ैलाने में सक्षम है और इसे हम हल्का माइक्रोस्कोप के नीचे नही देख सकते और यह मेजबान (शरीर ) की जीवित कोशिकाओं में गुणा करने में सक्षम होता है।

विषाणु एक पौधे के बीज की तरह अकोशिकीय सूक्ष्म जीव है, जिस तरह एक बीज हज़ारो वर्षो तक सुरक्षित पड़ा रह सकता है अगर उसे पानी, हवा और मिट्टी नही मिले तो, ठीक उसी तरह एक विषाणु को अगर कोई जीवित कोशिका नही मिले तो वह सैकड़ो वर्षो तक सुशुप्तावस्था में पड़ा रह सकता है। जैसे ही विषाणु को एक जीवित कोशिका मिलता है वह जीवित हो उठता है और अपने वंश को बढ़ाने लगता है।

विषाणु जीवित कोशिका में प्रवेश करने के उपरांत, मूल कोशिका की आरएनए एवं डीएनए की जेनेटिक संरचना को अपनी जेनेटिक सूचना से बदल देता है और संक्रमित कोशिका अपने जैसे संक्रमित कोशिकाओं का पुनरुत्पादन शुरू कर देती है।

चुकी एक विषाणु अपने आप प्रजननं नही कर सकता इस लिए विषाणु को जीवित नही माना जाता। विषाणु कोशकीय जीव नही होते। एक कोशिका से भी छोटे होते हैं।  आसान शब्दों में कहा जाये तो विषाणु नुक्लिक एसिड और प्रोटीन का एक छोटा पैकेट होते हैं।

विषाणु

लेकिन एक विषाणु और कोशिका में कुछ हद तक समानता भी है जैसे की उनमे नुक्लिक एसिड का जीनोम होता है जो की एक आम कोशिक में भी पाया जाता है।  वायरस या विषाणु का जेनेटिक वेरिएशन भी होता है और वे एवोल्व भी हो सकते हैं।

वायरस जीवित है या मरे हुए है ये भी एक सोचने वाली बात है, जिसका उत्तर अभी किसी के पास नही।  लेकिन हम ये मान लिए हैं की विषाणु मृत हैं। अगर हम उनका तुलना एक पौधे के बीज से करे तो पाएंगे की उनका जिन्दगी एक बीज से मिलता जुलता है।

विषाणु जीवाणु से भी छोटे होते हैं क्यों की जीवाणु एक कोशकीय जीव हैं लेकिन विषाणु अकोशिकीय जीव हैं।

बैक्टीरिया और वायरस में अंतर

बैक्टीरिया एक कोशकीय जीव होते हैं जो प्रजनन के लिए दुसरे कोशिका पर निर्भर नही होते जबकि वायरस प्रजनन करने या अपनी संख्या बढ़ने के लिए दुसरे कोशकीय जन्तुवो पर निर्भर होता है।

बैक्टीरिया और वायरस से हुई बीमारियाँ इसी लिए अलग अलग तरीको से ठीक किया जाता है , जैसे की बैक्टीरिया से हुई बिमारियों को ठीक करने के लिए एंटीबायोटिक दवाइयों का इस्तेमाल होता है । लेकिन ये दवाइयां वायरस के लिए असरदार नही हैं ।

बैक्टीरिया का अकार वायरस से काफी बड़ा होता है क्यों की वो एक कोश्किये जीव है जब की वायरस एक केमिकल स्ट्रक्चर है जो जीव के अन्दर जा कर जीवित होता है  ।

किस पक्षी की नजर सबसे तेज होती है ?

बाज पक्षी

चीते की चाल और बाज की नजर में संदेह नहीं करते,ये कहावत तो आपने भी सुनी होगी | तो आज मै बात कर रहीं हूँ उसी पक्षी की जिसकी नजर में संदेह नहीं करना चाहिए| और मै करती भी नहीं, क्यूंकी बाज एक ऐसा पक्षी है जिसकी नजर पूरे दुनिया के सभी प्राणियों से सबसे तेज होती है | और यह नजर ही नहीं बल्कि अपनी ऊँची उड़ान के लिए भी जाना जाता है|

तेज नजर वाला पक्षी बाज

ये आकाश में मस्त मगन अत्यंत उचाई पर उड़ता है | दूसरे पक्षियों से कई गुना ज्यादा ऊंचाई पर , इसकी नजर बहुत तेज होती है| ये अपने शिकार को ५ किलोमीटर की दूरी पर भी देख लेता है | यह अपनी नजर से रुकावटों की परवाह न करते हुए एक ही झटके में अपने शिकार को पंजे में ले उड़ता है | ये बहुत ही स्वाभिमानी किस्म का पक्षी है, यह किसी दूसरे जानवर के द्वारा किये शिकार को नहीं खाता , बल्कि यह अपने भोजन के लिए खुद शिकार करता है |

जैसे कुछ जानवर मरे हुए जीवों बचे अवशेषों पर जीते है न की बाज| बाज जब अपनी उड़ान भरतें है तो यह बादलों से भी ऊपर चले जातें है | मादा बाज १ से लेकर तीन अंडे देती है और लगभग ३४-३५ दिनों तक अण्डों पर बैठती है , जिसके बाद अण्डों में से बच्चे बाहर निकल आतें है | बाज लगभग ७० ब्वर्शों तक जीवित रहता है | यह गरुण पक्षी से कुछ छोटा होता है | इसकी कई प्रजातियां पायी जाती हैं | जिन्हे अलग अलग नामों से जाना जाता है | बाज के पंख पतले तथा मुड़े होतें है जो इसे तेज उड़ने तथा दिशा बदलने में मदद करतें है | दुनिया भर में बाज की ४० से अधिक प्रजातियां पायी जातीं है | ये अपने घोंसले ज्यादातर ऊँचे स्थान या पेड़ों पर बनातें है

इनका पसंदीदा भोजन चूहे या मछलियां होतीं है | बाज आसमान में २००-२१० प्रति घंटे की रफ़्तार से उड़ सकता है | यह आकाश में १२००० की ऊँचाई तक उड़न भर सकता है | ज्यादातर आदिवासी लोग छोटे -छोटे पक्षियों के शिकार के लिए बाज का सहारा लेते है, वह बाज के पैर को रस्सी से बांध कर रखतें है | छोटे पक्षी को देखकर ही वह बाज को आसमान में छोड़ देते और और बाज उसे पल भर में नीचे गिरा देतें है | और फिर आदिवासी घायल पक्षी को पकड़ लेते है | इसके लिए बाज को अच्छी -खासी ट्रेंनिंग देनी पड़ती है |

रोबोट क्या है

रोबोट

रोबोट….., नाम लेते ही आपके मन में सबसे पहले क्या आता है? हम में से कई एक मशीनी मानव की तस्वीर सोचतें है जो धातुओं का बना होता है | हालाँकि, कई तर्क-वितर्क हुए की आखिर कौन सी विषेशताएँ एक रोबोट को परिभाषित करती है|

ज्यादातर वैज्ञानिक इस बात पर मत देतें है की रोबोट एक मशीन है जो खुद ब खुद कोई काम करने में सक्षम होती है या फिर एक शृंखलाबद्ध काम जो की इसके प्रोग्रामिंग और परिवेश पर आधारित होतें है |

रोबोट की अवधारणा नई नहीं है, ऐसिअन, ग्रीक, इजिपटीएन और रोमन इंजीनियरों के द्वारा आर्टिफिसियल मानव और जानवर बनाने के प्रयासों के दस्तावेज उपलब्ध हैं| तथापि रोबोट शब्द, एक शब्द से जिसका मतलब जबरन मज़दूरी कराना से निकाला गया| जो की १९२१ से पहले तक इस्तेमाल नहीं हुआ था फिर एक कहानी से सामने आया जो की मानव जैसे रोबोट या एन्ड्रवॉइड पर आधारित थी |

हालांकि, आधुनिक रोबोट में कई तरीके के अनगिनत कार्य करने में दक्षता हासिल होती है, लेकिन कुछ बातें है जो हर या कहें  तो अधिक से अधिक रोबोटों में एक जैसी होती है, जैसे-

समान्यतया एक रोबोट किसी न किसी विद्युत धारा के स्रोत से संचालित होता है | यह इंसानों द्वारा किसी न किसी मुख्य काम को करने के लिए प्रोग्राम किये जातें है |और इनके पास माहौल के हिसाब से प्रतिक्रिया देने की छमता होती है|

ये आखिरी पॉइंट आपको रोबोट और समान्य मशीन में अंतर स्पष्ट करता है – उदाहरण के लिए मोशन डिटेक्टर को को ले लीजिये जो की एक मोशन रोबोट है, जब आप कमरे में अंदर जातें है तो यह आपको सेंस करके स्वयं ही लाइट चालू कर देता है | अर्थात इसे अपना काम करने के लिए किसी भी इंसान की जरूरत नहीं होती जबकि एक सामन्य कम्प्यूटर एक रोबोट नहीं है क्यूंकि इसे काम करने के लिए इंसानो की आवश्यकता होती है ,की इसे क्या करना है |यद्यपि एंड्राइड आज भी कुछ हद तक कल्पित विज्ञान है |

हम हर दिन अलग तरह के रोबोट का इस्तेमाल करतें है, समान्तया ऐसे कामों में मदद के लिए जो मनुष्यों के लिए बहुत ज्यादा खतरानक और दोहराव वाले होतें है | हम रोबोटों को दूर अंतरिक्ष में दूसरे ग्रहों पर जानकारी इकठ्ठा करने के लिए घर के कामों में, हॉस्पिटल्स में डॉक्टरों की मदद के लिए, कार निर्माण में और बड़ी फैक्ट्रियों में, माइंस में यहां तक की बच्चों को पढ़ाने के लिए इस्तेमाल करतें है|

सिर्फ समय ही बताएगा की आखिर रोबोट भविष्य में इंसानों के लिए कितने फायदेमंद होंगे |

डायनासोरस कितने तरह के थे

डायनासोर

जहां आज पूरी धरती पर इंसानों का राज है वहां कभी दुनिया के सबसे बड़े और विचित्र जानवर डायनाशोर का राज होता था | यह १६ करोड़ वर्षों तक धरती के सबसे प्रमुख एवं ताकतवर जानवर थे| तब उनकी २ हजार से ज्यादा प्रजातियां धरती पर अस्तित्व में थी| पृथ्वी आज की तुलना में ज्यादा गर्म थी, जिससे धरती पर ज्यादा घास- फूस नहीं होती थी| ऐसे में शाकाहारी जानवरों को पेट भरने के लिए लकड़ी खाने को मजबूर होना पड़ा| पृथ्वी में जीवन के इतिहास में यह एक महत्वपूर्ण घटना थी |

आईये चलते है आज से २५ करोड़ वर्ष पूर्व जुरासिक काल से लेकर ६ करोड़ वर्ष पूर्व क्रिटिशन काल के डायनसोर के साम्राज्य में – दुनिया के अलग- अलग हिस्सों में से डायनासोर के कई कंकाल मिले है – अंडे, हड्डी पंख इत्यादि | इन अवशेषों पर हुई रिसर्च ने करोडो वर्ष पूर्व के इस रहश्य पर कुछ रौशनी डाली| और डयनसोर की आकृति रचने की कोशिश की | और इन हजारों प्रकार के डायनाशोर में कुछ ख़ास के बारे में हम बात करेंगे –

इनकी कुछ प्रजातियों में से एक ऐसी प्रजाति है जो पक्षियों की तरह उड़ती थी, जिन्हे टेराशोरस कहा जाता था | और उड़ने वाले डायनाशोर की एक नस्ल क्वेजाल कोटलस नॉर्थरोपी, जिसका औसतन वजन १५० केजी और ४० फ़ीट लम्बे पंख थे | ये अब तक के सबसे बड़े उड़ने वाले प्राणी थे |

टरैनाशोरसरैक्स या टीरैक्स, ये शब्द एक ग्रीक शब्द टेरेंट लिज़ार्ट से लिया गया है जबकि रैक्स का लैटिन में राजा होता है तो मिलाकर देखें तो टरैनाशोरसरैक्स का अर्थ होता है छिपकली वंश का राजा | यह आज से ६६ लाख साल पहले क्रिटिशियन काल में हुआ करते थे,ये दो पैरों पर चलते थे | अपने विशाल शिर और लम्बी भारी पूंछ से अपना संतुलन बनाते थें| इनके शिर से पूंछ तक की लम्बाई लगभग ५० फ़ीट की होती है |

डिप्लोडैकस-आप ये जानकार हैरान रह जाएंगे की डायनासोर्स के बारे में सबसे सटीक जानकारी उनके मल के जीवाश्म से जमा की गयी है जिसे क्रोकोलाइट कहतें है| इस प्रजाति के डायनासोर्स अब तक के सबसे बड़े जीव थे| इनकी एक नस्ल जिसे औन्टोसॉरस या ब्रोन्टोसॉरस कहतें है इस धरती के सबसे विशाल जानवर थे|

सैराट्रॉपस ,अकोलोसोरस भी डायनासोर्स की ही प्रजातियां है|

वैसे तो कहतें है ये खत्म हो गयें है, पर इस बात से हम और आप इंकार नहीं कर सकतें है की धरती पर इंसानो के पूर्व एक अनूठे किस्म के जानवर थे जो अपनी मृत्यु के साथ ही अपने राज भी साथ ले गए|