निषेचन किसे कहते हैं

प्रजनन की एक महत्वपूर्ण क्रिया है- निषेचन, जिसके द्वारा नये प्राणियों का जन्म होता है। ईश्वर द्वारा प्रदत्त यह सबसे अनमोल तोहफ़ा है, जिससे नया जीवन संभव हो पाता है व संसार आगे बढ़ रहा है।

सजीवों में नर युग्मक व मादा युग्मक का एकाकार; जिससे एक नव जीव की उत्पत्ति होती है, यही निषेचन कहलाता है अर्थात् शुक्राणु व अण्डाणु के संलयन की क्रिया को निषेचन कहते हैं। युग्मकों के परस्पर मिलन से युग्मनजों का निर्माण होता है व युग्मनज द्विगुणित होते हैं। निषेचन के दौरान ही जीवों में लिंग निर्धारण हो जाता है अथवा नया उत्पन्न होने वाला जीव नर होगा या मादा, इसका निर्धारण निषेचन प्रक्रिया होते ही हो जाता है।

निषेचन के दो प्रकार होते हैं-

आंतरिक निषेचन व बाह्य निषेचन

जब नर व मादा के युग्मकों का संलयन मादा के शरीर के भीतर होता है, तो इसे आंतरिक निषेचन कहा जाता है और यह स्तनधारियों, सरीसृपों व नभचरों में होता है।

जब युग्मकों का संलयन मादा के शरीर के बाहर होता है, तो यह बाह्य संलयन कहलाता है। यह निषेचन क्रिया जल के माध्यम से ही पूर्ण होती है, निश्चिततः जलीय जीवों मछलियों, शैवालों व जलचर आदि में ही बाह्य निषेचन संभव है|

मनुष्यों के सम्बन्ध में कहा जा सकता है कि प्रत्येक आदमी अपनी संतान चाहता है व प्रत्येक नारी माँ बनने का सुख प्राप्त करना चाहती है। नारी के शरीर के भीतर अंडाशय में अंडो के निर्माण की क्रिया चलती रहती है तथा इन अंडों की संख्या नारी के जन्म के साथ ही प्राकृतिक रूप से निर्धारित हो जाती है।

पुरुष व नारी के मध्य संभोग के समय यदि पुरुष के शुक्राणु; नारी की गर्भ नलिकाओं से होते हुए उस के अण्डाणु से  मिल जाते हैं तो अंडाशय में भ्रूण के निर्माण की क्रिया प्रारम्भ होती है तथा समय के साथ धीरे-धीरे यह शिशु के रूप में विकसित होता रहता है।
यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि मासिक चक्र की अवधि सभी महिलाओं में असमान होती है तथा इसमें होने वाले रक्तस्त्राव के दिनों की संख्या भी अलग-अलग होती है। मासिक धर्म के उपरान्त एक निश्चित समय तक महिला के शरीर के भीतर गर्भाशय में अंडो का निर्माण व विसर्जन होता है तथा उस दौरान यदि पुरुष  द्वारा शारीरिक सम्बन्ध बनाये जाये व योनि में ही वीर्य स्राव कर दिया जाये तो शुक्राणु का मेल अण्डाणु से हो जाने पर अंडे निषेचित होते हैं अर्थात् निषेचन हो जाता है। निषेचित अंडा ही युग्मनज कहलाता है। इस प्रकार नारी द्वारा गर्भधारण किया जाता है तथा अपनी सन्तान को जन्म देकर सन्तति सुख को प्राप्त करती है।


Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *