List of animals with names

जंतु जगत (Kingdom Animilia)

पृथ्वी पर रहने वाले सभी जीव-जन्तु पर्यावरण का एक अभिन्न अंग है| जन्तु जगत के अंतर्गत इन्ही जन्तुओ का वर्गीकरण एवं भली भांति अध्ययन किया जाता है एवं उन्हें उनके उचित समूहों में बांटा जाता है| जन्तु जगत जीव विज्ञानं की महत्वपूर्ण शाखा है, जिसमे जन्तुओ के रहन-सहन, बनावट, आकृति आदि के आधार पर उनका वर्गीकरण किया जाता है|

जन्तु या ऐनीमेलिया जो की लेटिन भाषा का शब्द है, या इन्हें मेटाजोआ भी कहा जाता है, ये बहुकोश्कीय होते है एवं इनमे सुकेंद्रक  होता है| ये गमनागमन कर सकते है, एवं अधिकांश जन्तु भोजन के लिए दूसरे जीवों पर आश्रित होते है अर्थात ये परपोषी होते है| पृथ्वी पर उपस्थित सभी जन्तुओ के विभाजन की कोशिश महान दार्शनिक अरस्तु द्वारा की गई थी| उनके अनुसार जन्तुओ को दो समूहों या दो भागों में विभक्त किया जाना चाहिए:-

एनेइमा:

इसके अंदर इस प्रकार के जन्तु आते है जिनमे लाल रक्त कणिकाओ का आभाव पाया जाता है, किन्तु ये जन्तु जगत के हिस्से होते है, जैसे, मोलस्का, स्पंज, आर्थोपोडा आदि|

इनेइमा:

इसमें अकशेरुकी जन्तुओ को शामिल किया गया है, जिनमे लाल रक्त पर्याप्त मात्रा में उपस्थित होता है| इसके दो उपवर्ग होते है, जरायुज व् अंडयुज| जरायुज में स्तनधारी जन्तु आते है जो बच्चे पैदा करने वाले होते है, एवं अंडयुज में अंडे देने वाले जन्तु सम्मिलित किये गये है|

जन्तु जगत का वर्गीकरण

जन्तु जगत को मुख्य रूप से २ उप जगत में वर्गीकृत किया गया है|

#1 एककोश्कीय जन्तु:

एककोशकीय जन्तु प्रोटोजोआ संघ के अंतर्गत रखे गये है|

#2 बहुकोश्कीय जन्तु:

इन्हें मुख्य रूप से 9 संघो में विभक्त किया गया हा, जो इस प्रकार:-

संघ प्रोटोजोआ व् इसके लक्षण

इसमें सम्मिलित जन्तु एककोशकीय होते है, जिनमे जीवद्रव्य १ किन्तु केन्द्रक कई पाए जाते है| ये स्वतंत्र या परजीवी हो सकते है| इनका भोजन ग्रहण, पाचन, उत्सर्जन आदि सभी जैविक क्रियाए एककोशकीय शरीर के भीतर होती है|

संघ पेरिफेरा व् इसके लक्षण

इस संघ में आने वाले सभी प्राणी खारे पानी में निवास करने वाले होते है| अधिकांशत ये बहुकोश्कीय होते है, किन्तु इनमे नियमित रूप से उत्तक नहीं बनते| इनके बाह्य शरीर पर हजारो की संख्या में छिद्र होते है व् एक स्पंज गुहा पाई जाती है| स्पंज, मायोनिया आदि इसके उदाहारण है|

संघ सिलेन्ट्रेटा व् इसके लक्षण

इसमें सम्मिलित जन्तु भी जलीय व् द्विस्तरीय माने जाते है| इनके मुहं के पास धागे के जैसे तन्तु होते है, जिनसे भोजन पकड़ने में सहायता मिलती है| जेलिफ़िश, हायड्रा आदि इसके उदाहारण है|

संघ प्लेटीहेल्मिन्थीज व् इसके लक्षण

इनका शरीर त्रि-स्तरीय होता है, किन्तु गुहा नहीं होती| इनका पाचन तन्त्र पूर्णत: विकसित नहीं होता एवं पीछे से शरीर चपटा होता है| इनमे उत्सर्जन की क्रिया फ्लेम नामक कोशिकाओं द्वारा सम्पन्न होती है| ये उभयलिंगी जन्तु माने जाते है, एंव इनमे कंकाल तन्त्र, परिवहन तन्त्र आदि नहीं होते| लीवर, फिताकृमि आदि इसके उदाहारण है|

संघ ऐस्केलमिथीज व् इसके लक्षण

इनकी आकृति बेलन में समान व् लम्बी होती है| ये कृमि अखंडित होते है एवं इनका शरीर तीन स्तरीय होता है| इनमे भोजन नाल, गुदा एवं मुख तीनो स्पष्ट रूप से पाए जाते है| ये एकलिंगी होते है, इनका तंत्रिका तन्त्र विकसित किन्तु परिवहन व् श्वसन अंग नहीं पाए जाते| थ्रेडवर्म, एस्केरिस आदि इसके उदाहारण है|

संघ ऐनीलिडा व् इसके लक्षण

इनका शरीर पतला, लम्बा व् कई खंडो में विभक्त होता है| इनकी भोजन नली पूर्ण रूप से विकसित होती है| इन जन्तुओ में’ श्वसन की प्रक्रिया त्वचा द्वारा सम्पन्न होती है, किन्तु कुछ जीवों में क्लोम द्वारा श्वसन भी होता है| इनमें तंत्रिका तन्त्र पाया जाता है, एवं वृक्क के द्वारा उत्सर्जन प्रक्रिया होती है| ये एकलिंगी व् उभयलिंगी हो सकते है एवं इनके रक्त का रंग लाल होता है| जोंक, नेरिस व् केंचुआ इसके प्रमुख उदाहारण है|

संघ आर्थोपोडा व् इसके लक्षण

इन जन्तुओ का शरीर सिर, छाती व् पेट अर्थात तीन भागों में विभक्त होता है| इनके शरीर में उपस्थित गुहा को हिमोसोल कहते है| ये अधिकांशत एकलिंगी होते है| तिलचट्टा, केकड़ा, मच्छर आदि इसके उदाहारण है|

संघ मोलस्का व् इसके लक्षण

इन जन्तुओ का रुधिर रंगहीन होता है व् इनकी देह भी तीन भागों में विभक्त होती है| सिप्पी, घोंघा आदि इसके अंतर्गत आते है| इनमे श्वसन की प्रक्रिया गिल्स के द्वारा होती है व् भोजन नली पूर्णत: विकसित होती है|

संघ एकिनोडर्म व् इसके लक्षण

इस समूह के अधिकांश जन्तु जलीय होते है| इनमे नाल पाद द्वारा भोजन की प्रक्रिया सम्पन्न होती है| स्टारफिश, सी अर्चिन आदि इसके अंतर्गत आते है| इनमे अपने अंगो के पुनरूत्पादन की अद्भुभुत क्षमता होती है एवं जल संवहन तन्त्र भी विद्यमान होता है|

संघ कोर्डेटा व् इसके लक्षण

इसके अंतर्गत आने वाले जन्तुओ में क्लोम छिद्र पाए जाते है| इस श्रेणी के जन्तुओ में नोकोकार्ड व् तंत्रिका रज्जू, जो की नालदार होता है, भी पाया जाता है| इस समूह को १३ भागो में विभक्त किया गया है, जिसके अंतर्गत मत्स्य वर्ग, एम्फिबिया वर्ग, पक्षी वर्ग, सरीसृप वर्ग, स्तनी वर्ग आदि सम्मिलित होते है|


Comments

5 responses to “जंतु जगत (Kingdom Animilia)”

  1.  Avatar

    जंतु जगत का सबसे विकसित समूह कौन है

    1. Chimpanzees, Elephants, Dolphins

    2. aage

  2. Afaz akhter Avatar
    Afaz akhter

    Nice

  3. Valuable information

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