चित्तौरगढ़ किला, राजस्थान, भारत
चित्तौरगढ़ किला, राजस्थान, भारत

रानी मद्मिनी मेवाड़ ( अब का राजस्थान ) की रानी थी। उन्हें रानी पद्मावती के नाम से भी जाना जाता है। ये कहानी 14 सेंचुरी की है। कहा जाता है की रानी पद्मिनी अपने खूबसूरती के लिए बहोत  प्रसिद्ध थीं। उस समय दिल्ली का सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी था जो रानी पद्मावती को पाना चाहता था।

अलाउद्दीन ने चित्तोर गढ़ पर जब पहली बार हमला किया तो वह नाकाम रहा लेकिन उसने किले को घेर लिया और अपने सैनिक नहीं हटाया। उसने एक शर्त रखी की अगर रानी को वो आमने सामने देख लेता है तो वो अपनी सेना हटा लेगा। रानी ने खिलजी की बाते मन ली लेकिन खिलजी रानी को आमने सामने नहीं देख पाया उसे रानी को शीशे में देखना पड़ा क्यों की उस समय राजपूत रानी गैर मर्द के सामने नहीं आती थी।

रानी को शीशे में देखकर खिलजी का मन और भी बढ़ गया। वो रानी को पाने के लिए और भी बेचैन हो गया। उसने रानी पद्मिनी के पति को कैद कर लिया ट्रिक खेल कर।

राजपूतो ने भी ट्रिक खेला उन्होंने खिलजी को बोला की हम रानी को सौप रहे हैं आप हमे अपना राजा वापस कर दो, लेकिन उन्होंने रानी को नहीं भेजा बल्कि पालकी में सैनिको को बैठाकर भेज दिया। फिर सैनिको ने खिलजी से अपने राजा छुड़ा कर वापस ले आये।

इसे देखकर खिलजी ने फिर महल की घेरा बंदी कर दी और लोग महल से आ जा नहीं सकते थे। अंतिम में लड़ाई हुआ और राजा मारा गया।

पद्मनी और अन्य स्त्रियों ने हार देख कर जोहर कर लिया। जोहर एक हिन्दू परम्परा थी जिसमे अगर रानी का राजा मारा गया युद्ध में, तो वे खुद को आग में शहीद कर देती थी। महल की राजपूत स्त्रियाँ खुद को दुसमन के हवाले करने से अच्छा मरना पसंद करती थी.

चित्तौरगढ़ किला (15 वीं सताब्दी ) में जीत के विजयी (विजया स्तम्भ) चित्तोंगढ़, भारत
चित्तौरगढ़ किला (15 वीं सताब्दी ) में जीत के विजयी (विजया स्तम्भ) चित्तोंगढ़, भारत

आइये रानी के बारे में थोड़ा और जान ले

रानी पद्मिनी गन्धर्व सेन की बेटी थी। गन्धर्व सेन सिंहला राज्य के राजा थे। सिंहला राज्य अभी श्री लंका है । रानी पद्मिनी के खूबसूरती के बारे में सुनकर चित्तोड़ गढ़ के राजा रतन सिम्हा सिंहला राज्य के स्वयम्बर में पहुच गए. और रानी को जित कर चित्तोर ले आये। कहा जाता है की रानी के बारे में उन्होंने एक तोता हिरामन से सुना था। हिरामन रानी का तोता था। गन्धर्व सेन को हिरामन और रानी की नजदीकियां अच्छी नहीं लगती थी। इसलिए गन्धर्व सेन ने हिरामन को मारने को बोल दिया लिए हिरामन तोता बच के भाग गया। उसको बाद में एक बहेलिये ने पकड़ लिया और बहेलिये ने एक ब्राह्मण को बेच दिया ब्राह्मण उससे चित्तोर लेकर आया जहा रतन सिंह ने उससे खरीद लिया. ये तोता बहोत बोलता था. और हमेशा रानी की खूबसूरती के बारे में बाते करता था.

हलाकि आपको ये बता दे की पद्मावती की बहोत कहानिया है। ये कहानी मालिक मुह्हमद जैसी ने १५ शताब्दी में लिखी थी। और भी लेखक है जो अपना अलग अलग व्यू रखते हैं