Millipede और Centipede के बारे में अपने कभी न कभी सुना या देखा जरूर होगा। ये देखने में एक जैसे होते है और इनका आकर भी लगभग एक जैसा होता है. किन्तु मिलिपीड और सेंटीपीड अलग अलग जीव होते है. दोनों सर्पिलों के माध्यम से सांस लेते हैं. उनके पास कोई प्रत्यक्ष अंग नहीं होता है। इनमे से सेंटीपीड जहरीला होता है किन्तु मिलिपेडे जेह्रीला नहीं होता।छिपकलियों, बिच्छुओं और पक्षियों द्वारा सेंटीपेड पर हमला किया जाता है। सेंटीपीड  लचीला होने के कारण ये अपना आकर आसानी से बदल लेता है जबकि मिलिपेडे में ऐसा नहीं होता। दोनों में एंटीना की एक जोड़ी होती है पैरों के कई जोड़े होते हैं और अपने शरीर के किनारों पर छोटे छेद या सर्किल के माध्यम से सांस लेते हैं। किन्तु इनमे बहुत सी असमानताएं भी है. जो इन दोनों को भिन्न बनती है। तो चलिए जानते है इनमे क्या क्या भिन्न है।

  • सेंटीपीड का सरीर सपाट होता है जबकि मिलिपीड का आकार बेलनाकार रूप का होता है.
  • सेंटीपीड भूरे और पीले रंग के होते है. जबकि मिलिपीड भूरे और काले रंग के होते है.
  • सेंटीपीड तेज तेज चलते है जबकि मिलिपीड बहुत ही धीमे चलते चलते है.
  • सेंटीपीड का शरीर लचीला होता है जबकि मिलिपीड का शरीर सरीर इसके मुकाबले लचीला नहीं होता।
  • सेंटीपीड मादा कुछ महीनों की अवधि के बाद लगभग 50 अंडे देती है मादा मिलिपेडे एक समय में 300 अंडे रख सकती है।
  • सेंटीपीड किसी को भी काट सकते है जबकि मिलिपेडे नहीं काटते।
  • सेंटीपीड हिंशक होते है जबकि मिलिपेडे हिंशक नहीं होते।
  • सेंटीपीड की 8000 प्रजातियां पायी जाती है जबकि मिलिपेडे की लगभग 12000 प्रजातियां पायी जाती है.
  • सेंटीपीड में हमेशा पैरों के जोड़े की एक विषम संख्या में होती है जबकि इसमें मिलिपेडे में ऐसा नहीं होता।
  • सेंटीपेड के लंबे पैर होते हैं जबकि मिलिपेडे के छोटे होते है.