ब्लू व्हेल बड़े, बुद्धिमान, जलीय स्तनपायी हैं वे ब्लो होल्स (blow holes) के द्वारा फेफड़ो में हवा भरतीं हैं जहा की बाकि सारी मछलियाँ अपने गिल के माध्यम से साँस लेती हैं। व्हेल की कई प्रजातियाँ हैं लेकिन उनमे से ब्लू वहले सबसे बड़ी है।

व्हेल चिकने और सुव्यवस्थित जानवर हैं जो पानी में आसानी से तैरते हैं। व्हेल हवा में साँस लेते हैं। जब उन्हें साँस लेना होता है तो वे ऊपर पानी के सतह पर आ जाते हैं। आपको जानकर अस्चार्य होगा की व्हेल, मछली नही बल्कि एक स्तनपायी जानवर है जो पानी में रहती हैं ये मछलियों से बिलकुल अलग हैं ये बस दिखतीं हैं मछलियों के जैसा, लेकिन जहाँ मछलियाँ अंडे देतीं हैं वही व्हेल बच्चे देती है।

सभी स्तनधारियों की तरह

ब्लू व्हेल फेफड़ो से साँस लेती हैं।
ब्लू व्हेल के बाल होते हैं लेकिन बहोत कम, और वयस्कों में लगभग नही के सामान होते हैं।
ब्लू व्हेल का रक्त गरम होता है ताकि शारीर का तापमान ज्यादा रहे।
ब्लू व्हेल के चार कक्षीय हृदय होते हैं।

ब्लू व्हेल का आकर

ब्लू व्हेल का आकर इंसानो की तुलना में

ब्लू व्हेल 29 मीटर तक लम्बी हो सकती है, और 10-12 महीनो तक गर्भवती रहती हैं। नवजात बछड़ा लगभग 7.5 मीटर लम्बा और 5.5 टन से लेकर 7.3 टन वजनी हो सकता है।

बच्चा लगभग 225 लीटर दूध पी जाता है, जो की एक नहाने का बड़ा टब भरने के बराबर है।
दूध में लगभग 40-50% वसा होता है।
बच्चे का वजन हर घंटे 3.7 किलो बढ़ता है और 8 महीनो में वह 15 मीटर लम्बा और 22.5 टन वजनी हो जाता है।

ब्लू व्हेल कहा पाई जाती है ।

ब्लू व्हेल 20 स्वी शताब्दी से पहले तक सारे महासागरो में काफी मात्रा में पायीं जाती थी लेकिन उसके बाद ब्लू व्हेल मारने वालो ने उसको लुप्त होने के कगार पर ला खड़ा कर दिया । व्हेल के blubber (ब्लबर) के लिए उन्हें मार दिया जाता था । blubber का उपयोग उद्योगिक क्षेत्र में होता है । व्हेल मारने वालो को whalers कहा जाता है ।

International community  ने सन 1966 में उन्हें  बचाने का अभियान चलाया ।

ब्लू व्हेल आज लगभग हर महासागर में जैसे अंटार्कटिक महासागर (Antarctic Ocean), अटलांटिक महासागर (Atlantic Ocean), हिन्द महासागर (Indian Ocean) और पसिफ़िक महासागर (Pacific Ocean) पाई जाती हैं लेकिन अब इनकी संख्या काफी कम हो चुकी है और इन्हें endangered species (जो जानवर लुप्त होने के कगार पर पहुच चुके हैं) के केटेगरी में रखा गया है ।

ब्लू व्हेल क्या खातीं हैं ?

क्रिल्ल मछली

ब्लू व्हेल क्रिल्ल (Krill मछली) खाती हैं . क्रिल्ल छोटी मछलियाँ होतीं हैं
खाने के लिए पानी में 10-20 मिनट तक गोता लगतीं हैं, वो ज्यादा से ज्यादा 100 मीटर की गहराई तक गोता लगा लेतीं हैं एक ब्लू व्हेल का पेट 1 टन क्रिल्ल मछली एक बार में रख सकता है और उन्हें रोज लगभग 4 टन क्रिल्ल मछली की आवश्कता पड़ती है

ब्लू व्हेल का व्यवहार

ब्लू व्हेल अक्सर अकेला घूमतीं हैं लेकिन कभी कभी 2-3 के झुण्ड में भी घूमतीं हैं, अभी तक सबसे बड़ा झुण्ड 60 व्हेलो का देखा गया है
ब्लू व्हेल का आवाज जानवरों में सबसे जोरदार है, इनका आवाज low-frequency का होता है जो पानी में कई किलोमीटर की गहराई तक जा सकता है , इसके चलते अगर वे अकेले भी घूम रहीं हो तो अपने साथी को आवाज देकर कई किलोमीटर की दुरी से ही बुला सकतीं हैं

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