दही में लैक्टोबैसिलस (Lactobacillus ) नाम का बैक्टीरिया पाया जाता है। लैक्टोबैसिलस ग्राम पॉजिटिव लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया होते हैं। ये सड़ते हुए पौधों और दूध से बने चीजों में पाए जाते हैं।

 लैक्टोबैसिलस
लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया

दूध को जब हम 30-40 °C पर गरम करके इसमें थोडा सा पुराना दही मिला देते हैं तो उसमे मौजूद लैक्टोबैसिलस नामक बैक्टीरिया बढ़ने लगता है। ये बैक्टीरिया दूध में मौजूद लाक्टोज (lactose) को लैक्टिक एसिड (Lactic Acid ) में   बदल देते हैं। लैक्टिक एसिड के कारण ही दही का स्वाद हल्का कड़वा सा लगता है।

बिना गर्म किये हुए दूध (ताजी दूध ) में पहले से ही लैक्टोबैसिलस मौजूद होते हैं।

ये अच्छे बैक्टीरिया होते हैं जो हमारे पेट, जेनिटल और uninary  में पाए जाते हैं। ये बैक्टीरिया हमे बीमार नहीं करते।

लैक्टोबैसिलस

दही खाने के पेट का पाचन तंत्र ठीक रहता है।  दही अच्छे स्वास्थ के लिए बहोत ही लाभदायक है।

दही दिल की बीमारियों से हमे बचता है। दही हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल कम करता है। दही हमारी प्रतिरोधक शक्ति को बढ़ता है।

दही में फॉस्फोरस और कैल्शियम ज्यादा मात्रा में पाया जाता है जो हमारे दाँतों और हड्डियों के लिए बहोत ही लाभ दायक है।

दही त्वचा की बीमारियों को भी ठीक करने के लिए उपयोग में लाया जाता है।

अगर आपके सर में डैंड्रफ (सर में रुसी ) है तो आप दही लगाकर रुसी से छुटकारा पा सकते हैं।

ये हमारे वजन कम करने में भी लाभदायक हैं।

दही खाने से दिमागी स्ट्रेस और टेंशन दूर होता है।

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