गर्मियों में आप एयर कूलर तो जरूर इस्तेमाल करते होंगे, लेकिन क्या कभी आपने सोचा है की एयर कूलर कैसे काम करता है ?

एयर कूलर को अंग्रेजी में हम स्वाम्प कूलर या एवापोराटिव कूलर भी कहते है, यह कूलर ठीक उसी सिधांत पर काम करता है जिस सिधांत पर पानी से भरा मटकी।

इसे और आसानी से समझने लिए हम एक उधारण लेते हैं, आप जब स्नान करके हवा खाने जाते हैं तो आपको ठण्ड लगती है।

अगर शरीर पूरा भीगा है तो ज्यादा ठण्ड लगती है और कम भीगा है तो कम लगती है लेकिन आखिर ऐसा होता क्यों है।

जब हमारे शरीर पर पानी होता है तो वह पानी जब सूखता है तो हमे ठण्ड लगती है, यहाँ पर पानी द्रव अवस्था से गैसीय अस्वथा में जब बदलता है तो उसे हीट (गर्मी ) की जरूरत पड़ती है, तो जब गरम हवा उस पानी से टकराता है तो वह उस पानी तो भाफ या गैस में बदल देता है इस प्रक्रिया में गरम हवा ठंडा हो जाता है क्यों की उसकी सारी गर्मी पानी द्वारा सोख ली जाती है और इस प्रकार हमे ठण्ड लगने लगता है जब तक की सारा पानी सुख न जाये।

कूलर भी इसी सिधांत पर काम करता है, कूलर में जो हम पानी डालते है वो गरम हवा से गैस में बदल जाता है और गरम हवा कूलर के अन्दर ठंडा हो जाता है जिसे कूलर में लगा फैन बहार की ओर फेक देता है और हमे इस तरह ठंडा हवा मिलता है।

कूलर के 3 साइड में खस लगे होते है जिसपर पानी गिराया जाता है, और जब उन पानी की बूंदों से गरम हवा टकराती है तो वह उन बूंदों को भाफ में बदल देती है और ठंडी हो जाती है।

एयर कूलर, AC से पर्यावरण के लिए अच्छा है क्यों की AC में मौजूद केमिकाल्स हमारे ओजोन परत को ख़राब कर रहे है कूलर का कोई ऐसा साइड इफ़ेक्ट नही है।

कूलर का एक खामी यह है की उसे बहोत ज्यादा पानी चाहिए होता है। ऐसे जगह जहाँ पानी की किल्लत है वह कूलर लगाना महंगा पड़ सकता है।