Last updated on जनवरी 25th, 2018 at 10:11 अपराह्न

JayShankar prasad

ऊषा की सजल गुलाली जो घुलती है नीले अंबर में वह क्या?

जयशंकर प्रसाद ने यह प्रश्न कामायनी में अपनी एक रचना में पूछा था। न सिर्फ जयशंकर प्रसाद बल्कि दुनिया के तमाम लोगों के लिए यह सदियों से सोचने का विषय रहा है कि आसमान नीला क्यों दिखता है?

earth in space

अगर विज्ञान की मानें तो अंतरिक्ष से आसमान नीला नहीं दिखता। अंतरिक्ष में जाने के बाद यह प्रतीत होता है कि आसमान का कोई रंग है ही नहीं। इसलिए वो घुप काला दिखता है, बस पृथ्वी से ही आसमान नीला दिखाई पड़ता है। मगर क्यों?

Gases in atmosphere

इस रहस्य को जानने के लिए सबसे पहले पृथ्वी के वायुमंडल को जानना बेहद आवश्यक है। दरअसल पृथ्वी का वायुमंडल अनेक प्रकार के गैसों के मिश्रण से बनी है।

dust in air

न सिर्फ गैस बल्कि इसके अलावा धूल के कण, पराग के कण जैसे कई महिम पदार्थ भी मौजूद होते हैं। वहीं गैस की प्रकृति के बारे में बात की जाए तो वो भी कई तरह के अणुओं से मिलकर बनती है, यह अणु अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं।

जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर प्रवेश करता है तो वायुमंडल में वो इन कणों से टकराता है।

colour spectrum of visible light

वहीं सूर्य का प्रकाश कई तरंगों से मिलकर बना है। मगर इन तरंगों में से सिर्फ सात रंग ही हमारी आंखें देख पाती हैं। जो इस प्रकार है – बैंगनी, आसमानी, नीला, हरा, पीला, नारंगी और लाल। इन तरंगों का तरंगदैर्ध्य अलग-अलग होता है।

Lord Rayleigh pic

जॉन विलियम स्ट्रट जिन्हे लॉर्ड रेले भी कहा जाता है उन्होंने लाइट स्कैटरिंग के बारे में यह बताया की लाइट स्पेक्ट्रम में जिस लाइट का तरंग दैर्ध्य (wavelength) कम है वो ज्यादा स्कैटर करता है। ये तभी होता है जब हवा में मौजूद कण प्रकाश के wavelenght से छोटे होते हैं।

अगर बात दृश्य प्रकाश की कि जाए तो नीला सबसे ज़्यादा छितराता है वहीं लाल सबसे कम।

ब्लू लाइट का वेवलेंथ 450–495 nm है वही रेड लाइट का वेवलेंथ 620–750 nm है।  इसी कारणवश नीला प्रकाश वायुमंडल में उपस्थित गैस अणुओं, पराग के कणों, धूल आदि से टकराकर कर छितरा जाता है। और इसी के कारण वो हवा में काफी समय तक रहता है। इसी छितराई हुई रोशनी के कारण हमें आसमान नीला दिखाई देता हैं।

why sky is blue or red

अब सवाल यह उठता है कि सूर्य के उदय होते समय और सूर्य के अस्त होते समय आसमान लाल क्यों दिखाई देता है? तो इसका उत्तर यह है कि सूर्योदय और सूर्यास्त होते वक्त प्रकाश हवा में काफी लंबी यात्रा करने के बाद हमारी आंखों तक पहुंचता है। इसी यात्रा की वजह से प्रकाश का नीला रंग अणुओं से टकराकर काफी हद तक छितरा जाता है वहीं लाल रंग धीरे धीरे आगे बढ़ता रहता है । यही कारण है कि इस दौरान आसमान हमें लाल या गुलाबी दिखाई देता है।

आपने अक्सर देखा होगा कि चाहे धुंध हो, बारिश हो या चाहे धूल हो लाल रंग दूर से ही दिख जाता है। इसीलिए खतरे का संकेत देने के लिए लाल रंग का प्रयोग किया जाता है। वही यातायात में भी रुकने के लिए लाल रंग का उपयोग किया जाता है ताकि आप इसे दूर से देख सकें और दुर्घटना से बच सके। दरअसल इसके पीछे भी यही वजह है क्योंकि लाल रंग वायु में कम छितराता है और इसकी रोशनी दुरतलक जाती है।

वहीं अंतरिक्ष में आसमान काला क्यों दिखाई देता है? दरअसल अंतरिक्ष में कोई वायुमंडल नहीं है। और न ही कोई प्रकाश है इसीलिए अंतरिक्ष से देखने पर आसमान काला दिखाई पड़ता है। शायद अब जयशंकर प्रसाद जी को अपने सवालों के जवाब मिल गए होंगे। साथ ही उन लोगों को भी जिनके मन में आसमान को ले कर अलग अलग भ्रांतियां थी।