प्राचीन समय से ही पृथ्वी के आकार को लेकर भिन्न-भिन्न राय प्रस्तुत की जाती रहीं तथा बहुत से मतभेद भी होते रहे थे। कुछ का मानना था कि पृथ्वी गोल है और कुछ कहते थे कि पृथ्वी समतल है। किन्तु बहुत बाद में यह सत्य सामने आया कि पृथ्वी समतल नहीं, बल्कि गोलाकार है|

प्रस्तुत लेख में कुछ तथ्य बताये गए हैं, जिनसे यह सिद्ध होता है कि पृथ्वी समतल नही है। ये तथ्य निम्न प्रकार हैं-

पहला तथ्य:

जब समुद्र में कोई जहाज चलता है तो आगे बढ़ते हुए वह जैसे-जैसे दूर जाता है वैसे-वैसे हम देख सकते हैं कि एक समय पर वह हमारे सामने से गायब हो जाता है व धीरे- धीरे निचला हिस्सा गायब होते होते पूरी तरह से दिखाई देना बन्द हो जाता है। इससे यह समझा जा सकता है कि यदि पृथ्वी समतल होती तो वह दिखाई पड़ना बन्द न होता, केवल दूर जाते हुए आकार में छोटा होता जाता। मगर पृथ्वी के गोल होने के कारण ही जहाज क्षितिज पर डूबता हुआ सा प्रतीत होता है। 

दूसरा तथ्य:

चन्द्रग्रहण के समय जब पृथ्वी; सूर्य व चन्द्रमा के बीच होती है तो सूर्य की रोशनी से पृथ्वी की छाया बनती है तथा वह छाया चन्द्रमा पर पड़ती है। इससे चन्द्रमा की चाँदनी छुप जाती है तथा यह छाया पूर्ण या आंशिक रूप से चन्द्रमा को ढँक देती है। यह क्षणिक प्रकिया है, जो कुछ ही समय में खत्म हो जाती है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि चन्द्रमा पर पड़ने वाली छाया का आकार गोल वक्रनुमा होता है अर्थात् स्पष्ट रूप से ऐसा लगता है जैसे किसी गोल वस्तु की छाया पड़ रही हो। अतः यह सिद्ध होता है कि पृथ्वी का आकार गोल है। इसमें यह तथ्य इस बात की पुष्टि करता है कि पृथ्वी समतल नही है।

तीसरा तथ्य:

‘अपोलो अभियान’ के तहत कुछ लोगों को अन्तरिक्ष यात्रा पर भेजा गया था। उनके द्वारा अन्तरिक्ष यात्रा के दौरान चन्द्रमा से कई तस्वीरें खींची गयी थी। इन तस्वीरों में पृथ्वी की भी कुछ चित्र मौजूद थे। इनसे स्पष्ट रूप से यह साबित हो रहा था कि पृथ्वी गोल है, समतल नही हैं। उस समय में बहुत से लोगों की यह अवधारणा थी कि पृथ्वी समतल है। अतः”फ़्लैट अर्थ सोसायटी” के सचिव को ये तस्वीरें भेजकर पृथ्वी के समतल न होने का सबूत दिया गया था।

चौथा तथ्य:

प्राचीन समय में यूनानी लोगों द्वारा पृथ्वी के गोल होने के सम्बन्ध में कुछ चर्चा की गयी। जिसमे उन्होंने अपने अनुभव के आधार पर यह बताया कि रात के अँधेरे में उत्तर दिशा में चमकने वाले ध्रुव तारे को देखते हुए उसी दिशा में आगे बढ़ने पर तारा ऊपर उठता हुआ प्रतीत होता है और इसके विपरीत भूमध्य सागर की दिशा में आगे बढ़ने पर तारा क्षितिज पर डूबता हुआ प्रतीत होता है। यदि पृथ्वी समतल होती तो ध्रुव तारा उत्तर दिशा में ऊपर की ओर दिखाई न पड़ता। इससे उन्होंने यह स्वीकार किया कि पृथ्वी गोल है, समतल नही है।

पांचवा तथ्य:

सन् 1519 में “विक्टोरिया” नाम के एक जहाज ने पृथ्वी का पूरा चक्कर लगाने के उद्देश्य से यात्रा की थी। यह यात्रा अटलांटिक महासागर से “सेविल” बन्दरगाह से आंरभ हुई थी तथा पृथ्वी का एक पूरा चक्कर लगाते हुए  जहाज वापिस उसी बन्दरगाह पर पहुँच गया था। इससे यह सिद्ध हुआ कि पृथ्वी गोल है, इसीलिए जहाज घूमकर उसी जगह वापिस आ गया। यदि समतल होती तो ऐसा होना सम्भव नही था।

छठा तथ्य:

यह बात तो सर्वविदित है कि पृथ्वी के चारों ओर समान दबाव होता है। इसी समदाब के कारण पृथ्वी का आकार गोल है या इसे यूं भी कह सकते हैं कि केवल गोल वस्तु के चारों ओर समान दबाव होता है। उदाहरण से भी समझा जा सकता है कि जब पानी को ऊपर की ओर उछाला जाता है तो गुरुत्वाकर्षण के कारण वह नीचे आते वक्त उसमें चारों तरफ से समान दबाव पड़ता है, जिससे वह गोल बूंदों का रूप ले लेता है। अतः स्पष्ट होता है कि समान दबाव के कारण ही पानी की बूंदें गोल होती है तथा पृथ्वी भी गोल है।

सांतवा तथ्य:

आर्यभट्ट ने यह खोज की थी कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती रहती है तथा यह गोलाकार है। पृथ्वी के घूर्णन के कारण ही दिन व रात की क्रिया घटित होती है।

आर्यभट्ट के द्वारा कर्क व मकर रेखा का अस्तित्व भी उजागर किया गया। पृथ्वी के आकार के सम्बन्ध में बहुत से तथ्य व अवधारणाएं पेश की गयी, जिनसे यह सिद्ध हुआ कि पृथ्वी समतल नही है।

आठवां तथ्य:

भास्कर आचार्य द्वारा पृथ्वी के समतल न होने के सम्बन्ध में यह तर्क प्रस्तुत किया गया कि”यदि पृथ्वी समतल है तो ताड़ की तरह बड़े व ऊँचे वृक्ष दूर से दिखाई क्यों नहीं देते।” अतः यह स्पष्ट है कि पृथ्वी का आकार गोल है, जिससे ऊँचे पेड़ व इमारतें दूर से दिखाई नही देती।

नौवां तथ्य:

किसी ऊँचे सपाट स्थान जिसके आगे मार्ग में इमारत या पेड़ जैसी कोई बाधा न हो और बहुत दूर तक देखा जाना सम्भव हो, वहाँ पर धरती पर खड़े रहकर क्षितिज को देखते हैं और उसी स्थान पर किसी घर या इमारत की छत या पेड़ या किसी भी स्त्रोत से ऊँचाई पर जाकर क्षितिज को देखने पर वह पहले से अधिक दूर दिखाई पड़ता है। यदि समतल होती तो बढ़ती ऊँचाई के साथ क्षितिज की सीमा नही बढ़ती। अतः इससे सिद्ध होता है कि पृथ्वी समतल नही है।

दसवां तथ्य:

एक ही समय पर जमीन पर रखी एक जैसी ऊँचाई वाली वस्तुओं की छाया एक समान नही होती है। अलग-अलग स्थानों पर समान ऊँचाई वाली वस्तुओं की परछाई एक ही समय में अलग-अलग होती है। इसका कारण यही है कि पृथ्वी गोल है। यदि पृथ्वी समतल होती तो सभी स्थानों पर एक जैसी ऊँचाई वाली वस्तुएं समान छाया बनाती। अतः स्पष्ट है कि पृथ्वी समतल नही है|

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