सामान्य मान्यता के अनुसार हिचकी आने के सम्बन्ध में भिन्न-भिन्न कारण बताये जाते हैं, जैसे- किसी के द्वारा याद करने पर या चोरी करके खाने पर या किसी के द्वारा चर्चा करने पर हिचकी आती है। लेकिन यहाँ हम हिचकी आने के वैज्ञानिक कारणों की बात करने जा रहे हैं। 

विज्ञान की माने तो हमारे शरीर के भीतर फेफड़ों व पेट के मध्य डायफ्राम स्थित होता है। इस डायफ्राम में जब किसी कारणवश सिकुड़न पैदा होती है, तो मांसपेशियों पर दबाव के कारण फेफड़ों में जाने वाली वायु की गति तीव्र हो जाती है, जिससे यह एक आवाज के साथ हमारी श्वास से बाहर निकलती है। इस प्रकार से उत्पन्न हुई आवाज को ही हिचकी कहा जाता है। 

कारण-

भोजन को कम चबाते हुए जल्दबाजी में खाने से व आवश्यकता से अधिक भोजन खाने से कई बार भोजन भीतर अड़चन से जाता है, जिससे अचानक डायफ्राम पर दबाव से हिचकी आती है।

कोई गर्म चीज खाने के साथ तुरन्त ठण्डी चीज खाने से शारीरिक क्रिया में परिवर्तन होने से मांसपेशियों में आकस्मिक संकुचन पैदा होता है, जो हिचकी का कारण बनता है।

कोई भी कार्बोनेटेड द्रव्य के सेवन से तथा अत्यधिक शराब पीने की आदत भी हिचकी की समस्या पैदा करती है, क्योंकि शराब में नशा होने के कारण मांसपेशियों व फेफड़ों पर दबाव पड़ता है। 

कोई भी चूसने वाली चीज़ जो अधिक समय तक मुह में रखी जाती है या च्यूइंग गम आदि खाने कई बार श्वास के साथ बाहरी हवा भी श्वसन तन्त्र तक जाती है। इससे भी हिचकी हो सकती है। 

पाचन सम्बन्धी विकार, एसिडिटी, गैस आदि के कारण भी मांसपेशियों में सिकुड़न पैदा कर हिचकी की समस्या को जन्म देते हैं।

उपर्युक्त वर्णित कारणों के अतिरिक्त मानसिक तनाव, अवसाद, भावनात्मक रूप से हुई उत्तेजना, तापमान में आकस्मिक बदलाव, दवाईयों के दुष्प्रभाव आदि भी हिचकी होने के कारण बन सकते हैं।

कई बार हिचकी आना सामान्य होता है, जो की स्वयं ही कुछ समय पश्चात बन्द हो जाती है या पानी के सेवन से रुक जाती है। इसके विपरीत असामान्य रूप से एक साथ लगातार हिचकी आती रहती है तथा रूकती नही है, तो यह बेहद परेशानी का कारण बनती है। ऐसे में डॉक्टर से सलाह लेना उचित रहता है|