जब हमारे अंदर पानी या नमक की क्मी होती है तब हमे प्यास लगती है। इसके पीछे कई कारण हो सकते है। एक कारण ये भी है कि शरीर के अंदर नमक और पानी का अनुपात घट गया हो या शरीर की जल अवधारण की छमता बढ गयी हो।

कई बार बारम्बार लघुशंका जाना भी शरीर मे पानी की कमी कर सकती है पर अहम कारण शरीर मे पानी का स्त्राव कम होना है। पानी क्युंकि बहुत ही सुपाच्य चीज़ है और शरीर मे इसका गमन और आवागमन बहुत तेज़ प्रक्रिया है तो ज्यादा से ज्यादा पानी पीना प्यास बुझाने का माध्यम है पर मधुमेह रोगी बार बार लघुशंका जाने की वजह से ज्यादा प्यासा मह्सूस करते है।

निर्जलीकरण अर्थात जितना तरल पदार्थ हम पीते है, उससे ज्यादा हमारे शरीर से पानी का निकास होना, इससे भी हमे तेज़ प्यास लगती है। मदिरा आदि का सेवन करने से भी प्यास का एह्सास होता है। कंठनाली के सूख्नने से शरीर मे घटती जा रही तरलता का पता चलता है।

कई बार किड्नी के ठीक से काम ना करने के कारण भी प्यास लगती है। नियमित कुछ दवा के सेवन से भी पुटिकाओं में तरल मात्रा कम हो जाती है।

देखा जाये तो प्यास लगने की काफी वजह है पर शरीर मे पर्याप्त तरलता और पानी को बनाये रखने से ज्यादा प्यास लगने की समस्या से निजात पायाजा सकता है। विभिन्न नमक की एकाग्रता से ओस्मोसिस की प्रक्रिया छीन पर जाती है, जिससे पानी का संचार कम हो जाता है।

इसमे थायरायड की समस्या भी एक जटिल समस्या है। मस्तिष्क हमे लगातार प्यास लगने पर संकेत देता है कि हम शरीर को जल संचारित करे और ऐसा ना होने पर छीनता का बोध करात्ता है। इसीलिये हमे नियमित अपने प्यास के कारणों पर सूछ्म ध्यान देना चाहिये।