सिरदर्द होना आम समस्या है, परन्तु इसके होने की वजह आम हो; यह जरूरी नही है। कई बार सामान्य कारणों से सिरदर्द होने लगता है तथा कई बार सिरदर्द कुछ गंभीर रोगों की ओर इशारा करता है। इसके कारणों को तीन भागों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जिनमें हैं- 

आंतरिक कारण

बाह्य कारण

अन्य कारण

आंतरिक कारण-

इसमें शरीर के भीतर होने वाले कुछ विकारों या रोगों की वजह से सिरदर्द होता है। ऐसा सिरदर्द कई बार घातक समस्या की ओर भी संकेत करता है। आंतरिक कारण निम्नलिखित हैं-

मस्तिष्क सम्बंधी समस्या- मस्तिष्क शोथ या मस्तिष्काघात, अवसाद ग्रस्त होने से मस्तिष्क की नसों में खिंचाव व सूजन की समस्या पैदा होती है, जिससे सिरदर्द होने लगता है। यह चिंताजनक है क्योंकि कई बार गंभीर रोग का रूप भी ले सकता है।

गैस- खाली पेट रहने या तले व गरिष्ठ भोजन के सेवन से कई बार पेट में गैस बन जाती है तथा पाचन तन्त्र भी खराब हो जाता है। यह गैस शरीर में गति करती हुई सिर तक पहुँच जाती है तथा सिरदर्द का रूप ले लेती है।

तनाव- कई बार किसी विषय पर लगातार सोचने से चिंताजनक रूप ले लेता है, जिससे तनाव उत्पन्न होता है। तनाव के कारण हमारी नसों में खिंचाव पैदा हो जाता है। इससे सिरदर्द की समस्या खड़ी हो जाती है।

असन्तुलित रक्तप्रवाह- रक्त प्रवाह का सन्तुलन ऊँचा या नीचा होने से भी रुधिर वाहिकाओं में रक्त संचालन कम या ज्यादा होने से सिर में दर्द का अनुभव हो सकता है।

नींद की कमी- नींद की कमी के कारण दिमाग़ी थकावट हो जाती है तथा मस्तिष्क को आराम न मिलने के कारण नसों में दर्द हो सकता है, जिससे सिरदर्द का कारण पैदा होता है। इसके अतिरिक्त नींद पूरी न होने के कारण आँखों में भी थकान हो जाती है तथा आँखों की रोशनी पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। इसके कारण भी सिरदर्द हो सकता है।

बाह्य कारण-

बाहरी रूप से शरीर के किसी हिस्से में कोई परेशानी होने से भी सिरदर्द हो जाता है। ये कारण निम्नलिखित हैं-

कान के रोग- कान की नसों का सम्बन्ध सिर की नसों से होता है तथा कान के साथ ही सिर मौजूद होता है। कान का कोई रोग या कान दर्द होने के कारण आपसी समीप्य से वह दर्द नसों से होता हुआ सिर तक पहुँच जाता है। अतः कान की समस्या के साथ सिरदर्द की भी समस्या होना सामान्य है।

थकावट- कई बार लगातार काम करते रहने व भागदौड़ से शारीरिक थकान हो जाती है। यह थकान कई बार गति करती हुई हमारे सिर की नसों तक पहुँच कर उनमे दर्द पैदा कर देती है। अतः थकावट आना भी कई बार सिरदर्द का कारण बन सकता है।

फोड़ा या फुँसी- मनुष्य शरीर रोगों से घिरने में समय नही लेता। फोड़ा या फुँसी जैसी समस्या होना आम बात है। जब यह कान या सिर या गर्दन के आसपास हो जाते है तो इनमे मवाद के कारण चारों ओर रह रह कर होने वाले दर्द की समस्या खड़ी करते हैं। अतः सिर के आस पास फोड़ा या फुँसी होने पर सिरदर्द हो सकता है।

अन्य कारण-

इसमें वे कारण शामिल किये जाते हैं जो न तो शरीर के आंतरिक भाग से सम्बंधित है और न ही बाह्य भाग से। ऐसे अन्य कारण निम्नलिखित हैं-

चुस्त कपड़े- कई बार फैशन के चक्कर में फसे हुए तंग कपड़े पहनने से पेट पर दबाव पड़ने से नसों में कसाव महसूस होता है। यह दबाव भी कई बार सिरदर्द का कारण बनता है।

कैफ़ीन- कॉफी या चाय का अनावश्यक मात्रा में सेवन करने से कुछ नशा हो जाता है। जिससे सिर में भारीपन महसूस होता है तथा सिर घूमता रहता है। अतः कैफ़ीन की अधिक मात्रा भी सिरदर्द का कारण बनती है।

अधिक ठण्डा पदार्थ- कई बार अधिक ठण्डा पदार्थ का सेवन करने से अचानक से नसों में सिकुड़न हो जाती है। नसों में होने वाली इस हलचल से सिरदर्द की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

वातावरण का असर- वातावरण का असर तो शरीर पर पड़ता ही है। मौसम में बदलाव के कारण शरीर में कई क्रियाएँ व प्रतिक्रियाएँ होना सामान्य बात है। शुरूआती सर्दी या गर्मी या वर्षाऋतु में कई बार शरीर में बदलाव के कारण सिरदर्द हो सकता है। अतः बदलता वातावरण भी कई बार सिरदर्द की वजह बन सकता है।

खुशबू- परफ्यूम या सेंट या डीयो आदि की महक से कई बार कुछ लोगो को एलर्जी होती है। अत्यधिक तेज सुगंध कई बार सिर तक पहुँच जाती है तथा सिरदर्द पैदा करती है। अत: ऐसे उत्पादों से दूर रहना बेहतर होता है|

फोन का अत्यधिक इस्तेमाल- फोन पर अधिक देर तक बात करने से या नजरें टिकाये रखने से मस्तिष्क की नसों को आराम नही मिल पाता तथा आँखें भी थक जाती है। इससे भी सिरदर्द की शिकायत हो सकती है।

शोर- शांतिप्रिय लोगों को अत्यधिक शोर सुनने की आदत नही होती है। लेकिन कई बार अधिक तेज आवाज़ उनके कानों व मस्तिष्क पर बजने से दबाव पैदा करती है, जिससे सिरदर्द हो सकता है।

लू लगना- गर्मी की अधिकता के कारण कई बार लू के आघात का सीधा असर सिर पर होता है। अतः अधिक गर्मी में भी कई बार सिरदर्द होने लगता है। अत: अत्यधिक गर्मी में घर से बाहर निकलने से परहेज करे|

उपर्युक्त वर्णित के अलावा रजोवृति या रजोधर्म, गर्भनिरोधक दवाइयों का सेवन, खान-पान में लापरवाही, विटामिन्स की अल्पता, शारीरिक तन्त्र में असन्तुलन, ज़ुकाम, गले के रोग, मिर्गी आदि अनेक प्रकार के कारणों से सिरदर्द हो सकता है। कई बार कुछ ठंडा खाने या पीने से भी सिर में दर्द हो जाता है, इसलिए अचानक कुछ ठंडा न खाए|

कई बार सिरदर्द कम होता है और कई बार अत्यधिक तेज़, जिसे केवल एक बार में सामान्य दवाई लेकर ठीक किया जा सकता है। परन्तु यदि सिरदर्द असहनीय हो जाए और दवाई लेने पर भी ठीक न हो तो ऐसी स्थिति में डॉक्टर से अवश्य सलाह लेनी चाहिए और यदि जरूरी हो तो कारण जानने हेतु आवश्यक जाँच भी करवाई जानी चाहिए, ताकि यह संतुष्टि हो जाए कि कहीं यह सामान्य सा लगने वाला सिरदर्द किसी गम्भीर रोग की ओर संकेत न करता हो|