साबुन का इस्तेमाल नहाने से लेकर हाथ धोने एवं कपड़े धोने के लिए किया जाता है| साबुन कई प्रकार के रंगो, खुशबू, महंगे से लेकर सस्ती, एवं अलग-अलग क्वालिटी में उपलब्ध होती है किन्तु क्या आपने कभी ख्याल किया कि साबुन से उत्पन्न होने वाले बुलबुले हमेशा पारदर्शी होते है किन्तु फिर भी रंगीन दिखाई पड़ते है, चलिए हम आपको बताते है ऐसा क्यों है|

शुरू से ही विज्ञानं हमे यह सिखाता आया है की सूर्य की किरणें जिस वस्तु पर पडती है तो परावर्तन की प्रक्रिया द्वारा रंगो को अवशोषण करती है| किसी भी वस्तु का अपना रंग नहीं होता बल्कि प्रकाश की किरणें उसे ऐसा दिखाती है|

इसी प्रकार साबुन के बुलबुले से प्रकाश की किरण जब टकराती है तो वह अलग-अलग दिशाओ में फ़ैल जाती है जिससे साबुन का बुलबुला सतरंगी एवं रंगीन दिखाई देता है|

दूसरी तरफ यदि हम देखे कि यदि प्रकाश की किरणें सभी दिशाओं में न जाकर एक ही जगह टकराए तो कोई रंग उभर कर नहीं आयेंगे एवं पानी का यह बुलबुला सफेद रंग का दिखाई देगा| बहुत सारे छोटे बुलबुलों मे भी रंग इसी कारण दिखाई देता है पर एक बड़े बुलबुले में यह और अच्छे से दिखाई पड़ता है|