सह्भोजिता उस प्रक्रिया को कहा जाता है, जिसमें दो प्राणियों के मध्य आपसी सामंजस्य एवं समझ से एकसाथ रहना और भोजन करना शामिल होता है। इसमें सह्भोजी प्राणी एक दूसरे को हानि नही पहुंचाते, अपितु लाभ पहचानें का प्रयत्न करते है।

सह्भोजिता की प्रक्रिया लम्बे समय तक बनी रहती है, कभी-कभी तो ये उम्र भर तक बनी रहती है। सह्भोजिता के अंतर्गत एक साथ निवास करना, भोजन करना, एक साथ शिकार करना, एवं दूसरे विरोधी जीवों से एक दूसरे की रक्षा करना आदि बाते शामिल है।

सह्भोजिता के उदाहरण:-

  1. रेमोरा नामक एक मछली के सिर पर एक छतरीनुमा आकृति होती है, जिससे वो दूसरी बड़ी मछलियों जैसे शार्क, व्हेल आदि के साथ खुद को जोड़ लेती है, और जब ये बड़ी मछलियाँ कोई शिकार करती है, तो रेमोरा मछली खुद को उनके शरीर से अलग करके उस शिकार का आनंद लेती है। इस प्रक्रिया में हम देख सकते है, कि किसी को नुकसान पह्चाये बिना कैसे सहभोजी प्राणी अपना लाभ देखते है।
  2. गोबी नामक मछली भी अपने बचाव के लिए दूसरे प्राणियों के शरीर पर रहती है, और वातावरण के मुताबिक अपने शरीर का रंग बदल लेती है।
  3. इसी प्रकार अन्य प्राणी जैसे लकडबघा, जैकाल आदि दूसरे ताकतवर जीवो के बचे-खुचे भोजन पर निर्भर रहते है।
  4. सह्भोजिता का उदारहण के रूप में हम जीवो के साथ मनुष्यों का सम्बन्ध भी जोड़ सकते है, जैसे घरेलू कुत्ते, बिल्लियाँ और पक्षी आदि मानवों के साथ अपना भोजन लेते है, या उनके बचे हुए भोजन को करते है, बिना उन्हें हानि पहुचाये।