सन्तुलित आहार स्वस्थ जीवन का आधार है। कोई भी व्यक्ति यदि शारीरिक रूप से असन्तुलित है या जिसका स्वास्थ्य असन्तुलित है तो उसका जीवन भी सन्तुलित नही रहता है। यह तो सर्व मान्य ही है कि पहला सुख नीरोगी काया अर्थात् मनुष्य कितने भी सुखों की प्राप्ति कर ले, परन्तु यदि उसका शरीर रोगों से ग्रस्त रहता है तो बाकी सब सुख फीके लगते हैं। अतः अच्छे स्वास्थ्य को कायम रखने से शुरुआत आहार से ही की जानी चाहिए।

सन्तुलित आहार में अनेक प्रकार के तत्व विद्यमान रहते हैं। आज हम आपको इन तत्वों के बारे में बता रहे हैं, ताकि आप अपने भोजन को पेट भरने के साथ-साथ शरीर को विकारों व रोगों से मुक्त रखने के उद्देश्य से ग्रहण करें।

वसा- सन्तुलित आहार का अन्य मुख्य तत्व है- वसा, जिसे फैट भी कहते हैं। बहुत से लोगों में यह धारणा है कि वसा शरीर के लिए अच्छा तत्व नही है, परन्तु यह केवल अधूरी जानकारी के कारण उत्पन्न हुई गलतफहमी मात्र है। वसा भी शरीर के लिए अन्य तत्वों की भाँति लाभदायी है, बशर्ते यह पर्याप्त आवश्यक मात्रा में हो। ध्यान देने योग्य बात है कि वसा की आवश्यकता से अधिक मात्रा भी नुकसानदेय सिद्ध हो सकती है।

शारीरिक रूप से क्रियाशील बने रहने के लिए आवश्यक है कि हमारे शरीर में पर्याप्त मात्रा में वसा रहनी चाहिए। वसा से हमे ऊर्जा प्राप्त होती है। कोशिकाओं, त्वचा व बालों का उचित स्वास्थ्य व गुणवत्ता बनाये रखने के लिए वसा उपयोगी है। काजू, दूध, पनीर, सोयाबीन का तेल व मूंगफली का तेल आदि वसा के अच्छे स्त्रोत हैं। 

वसा दो प्रकार की होती है-

संतृप्त वसा व असंतृप्त वसा।

प्रोटीन- मनुष्य शरीर के भीतर नव कोशिका निर्माण में सबसे ज्यादा योगदान प्रोटीन का होता है तथा इससे क्रियाशीलता बनी रहती है। इसके अतिरिक्त मनुष्य शरीर का उचित तापमान कायम रखने में भी प्रोटीन सहायक होता है। हमारे आहार में 30-35 प्रतिशत तक प्रोटीन होना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। प्रोटीन शाकाहारी व माँसाहारी दोनों आहारों से प्राप्त होता है, जैसे- चना, मक्का, बाजरा मूँगफली, दाल, मछली, मुर्गा, अंडा आदि प्रोटीन के अच्छे स्त्रोत हैं। 

प्रोटीन की कमी से शारीरिक बल में कमी आती है तथा वजन में भी गिरावट आती है। साथ में रोग प्रतिरोधक क्षमता में क्षीणता आने से शरीर पर कई रोगों का साया बना रहता है।

फाइबर- जो खाद्य पदार्थ रेशेदार होते हैं, उनमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जैसे- संतरा।

ये हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने मे सहयोग करते हैं। प्रतिरक्षा तन्त्र को सुचारू रूप से कार्य करने के लिए फाइबर युक्त यानि कि रेशे वाली चीजों का सेवन करना चाहिए। फाइबर से छोटे-मोटे रोगों को झेलने की व उनसे लड़ने की शक्ति प्राप्त होती है। इसी के साथ पेट के लिए उचित है क्योंकि इससे पाचन ठीक रहता है तथा कब्ज की समस्या भी नही होती और भोजन के साथ पाये जाने वाले दूषित पदार्थों के प्रभाव को कम करने में सहायक होता है।

पपीता, सेब, इसबगोल, अंगूर, खीरा, शकरकन्द, सूजी आदि फाइबर के अच्छे स्त्रोत माने जाते हैं।

कार्बोहाइड्रेट- यह तीन मुख्य तत्वों से मिलकर बना होता है- कार्बन, हाइड्रोजन व ऑक्सीजन। इसे कार्बोज भी कहा जाता है।

Close up of mixed of pasta

मनुष्य के शरीर में अंदरूनी कुछ अंगों व ऊत्तकों में ग्लूकोज़ पाया जाता है, इसे ही कार्बोहाइड्रेट कहते हैं। 

कार्बोहाइड्रेट के मुख्य घटक शर्करा, स्टार्च व फाइबर है।

सब्जियों, फलियों, पेय द्रवों व साबुत अनाज में कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। 

शरीर ने वसा की मात्रा को नियंत्रित करने में कार्बोहाइड्रेट की विशेष भूमिका रहती है। एक मनुष्य द्वारा उम्र के आधार पर जितनी कैलोरी की आवश्यकता होती है, उस कैलोरी का लगभग 50-60 प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रेट की भी जरूरी होता है।

दिल, गुर्दे, मांसपेशियों के उचित व स्वस्थ रूप से कार्य करने के लिए यह आवश्यक होता है।

जल- मनुष्य के लिए जल की आवश्यकता और महत्व के ज्ञान से कोई भी अनभिज्ञ नही होगा। जल भिन्न-भिन्न रूपों में उपयोगी होता है। प्यास बुझाने के साथ ही मूत्र सम्बन्धी समस्याओं से बचाव करता है और पेट की सफाई में सहयोगी है। त्वचा के कसाव व चमक के लिए पर्याप्त मात्रा में जल का सेवन करना चाहिए।

अलग-अलग समय पर जल के सेवन से शरीर को अलग तरह के अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। गर्मी के दिनों में कम से कम 10 गिलास पानी पीना स्वास्थ्य के लिए उचित होता है।

खनिज पदार्थ- सन्तुलित आहार के मुख्य तत्वों में खनिज पदार्थ भी महत्वपूर्ण है। खनिज पदार्थों की विशेषता यह है कि इनकी भिन्नता के कारण ये शरीर के प्रत्येक हिस्से के लिए भिन्न-भिन्न रूप से स्वास्थ्य प्रदायी व लाभदायक है। शरीर में खनिज पदार्थों की पूर्ति होने से कई रोगों से बचाव सम्भव हो जाता है। हड्डियों, दाँतो, त्वचा, मांसपेशियों, पेट, मस्तिष्क, रक्त आदि सभी के लिए खनिज पदार्थ फायदेमंद होते हैं।

ये अनेक प्रकार के होते हैं, जिनके बारे में विस्तार से एक अन्य प्रलेख में बताया हुआ है।

विटामिन- विटामिन छः तरह के होते हैं। विटामिन ए, बी, सी, डी, ई, के। विटामिन का कई प्रकार की बीमारियों से बचने व रोकथाम में सहयोग होता है। शरीर के कुछ हिस्सों में जहाँ अन्य तत्वों की भूमिका नही होती है, वहाँ विटामिन की जरूरत पड़ती है। सौंदर्य विकास में भी विटामिन अत्यन्त महत्वपूर्ण माने जाते हैं। दूध से बने सभी खाद्य पदार्थ, पत्तेदार सब्जियां, दालें, फल, माँसाहार आदि भिन्न-भिन्न विटामिन के स्त्रोत हैं।

इस प्रकार आप जान चुके होंगे कि सन्तुलित आहार में उपर्युक्त वर्णित सभी तत्वों का समावेश रहता है, जो कि हमारे शरीर के लिए अत्यन्त लाभदायी होते हैं। सन्तुलित जीवन की ओर पहला कदम सन्तुलित आहार ही है|