संचार या communication शब्द का साधारण भाषा में अर्थ है, अपने विचारो या भावों का किसी अन्य व्यक्ति से आदान-प्रदान करना अथवा किसी सूचना या मेसेज को एक से दूसरी जगह प्रेषित करना या भेजना संचार कहलाता है|

किसी भी सूचना का तभी उपयोग है जब वह किसी दूसरे तक भेजी जाती है|

जिस प्रकार एक व्यक्ति भोजन करता है, सोता है, उसी प्रकार बोलना एवं अपने विचारों को व्यक्त करना जिन्दगी की आवश्यक प्रक्रिया है|

संचारण की प्रक्रिया के दौरान एक व्यक्ति sender अर्थात सूचना भेजने वाला एवं दूसरा व्यक्ति reciever यानी सूचना ग्रहण करने वाला होता है|

संचार की परिभाषा एवं प्रक्रिया के सम्बन्ध में अलग-अलग विद्वानों के अलग-अलग मत है किन्तु सभी का सार यही है कि इसमें विचारों, सूचनाओं, एवं भावों का आदान-प्रदान किया जाता है|

संचार प्रक्रिया के प्रकार:

संचार प्रक्रिया के मुख्य रूप से चार प्रकार होते है:-

Intrapersonal communication या अंत: वैयक्तिक संचार:

संचार करने की यह एक मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत व्यक्ति स्वयं से संचार करता है| इसमें व्यक्ति खुद से विचार विमर्श करता है एवं विभिन्न प्रकार के निष्कर्ष निकालता है|

Interpersonal communication अंतर वैयक्तिक संचार:

संचार की इस प्रक्रिया के अंतर्गत इसमें दो लोग शामिल होते है जो आपस में विचारों, भावों एवं सूचनाओं का एक्सचेंज करते है| संचार करने का यह अच्छा तरीका है क्योकि इसमें दूसरे की सहमति या राय जानी जा सकती है|

जन संचार Mass communication:

इस प्रक्रिया में संचार को जन तक पहुचाने के लिए TV, रेडियो, मोबाइल, इन्टरनेट, आदि का इस्तेमाल किया जाता है| वर्तमान समय में संचार का यह सबसे प्रसिद्ध तरीका बन गया है| इसके अंतर्गत पूरी दुनिया से जानकारी एवं तत्कालीन होने वाली घटनाओं का पता लगाया जा सकता है|

समूह संचार Group communication:

जैसा कि नाम से पता लग रहा है कि इसमें संचार की प्रक्रिया एक ग्रुप में होती है जिसमे कई लोग शामिल होते है| व्यक्तित्व के विकास के लिए एवं संचार को गहनपूर्ण बनाने के लिए यह प्रक्रिया कारगर साबित होती है|

Communication & Technology:

संचार मानव जीवन का इतना महत्वपूर्ण अंग है कि इसे प्रभावी एवं तीव्र बनाने के लिए हमने कितने उपकरण खोज डाले जिसमे से सेटलाइट, मोबाइल, इन्टरनेट आदि आते है एवं इन्ही प्रयासों ने सूचना क्रांति एवं प्रोद्योगिकी को जन्म दिया| इसी के कारण कम से कम समय में एवं कम खर्च में बिना कही जाए किसी से भी संचार किया जा सकता है|

संचार के कंपोनेंट्स या घटक:

डाटा अथवा उपयोगी सूचना को एक स्थान से दूसरे तक सम्प्रेषित करने के लिए कुछ माध्यम या डिवाइस का प्रयोग किया जाता है जो सही समय पर सही जगह उस सूचना को पहुचाने का कार्य करते है| इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए संचार के घटकों को जानना अनिवार्य है जो इस प्रकार है:-

सन्देश:

इसमें वो सभी डाटा, इनफार्मेशन, एवं सूचना आती है जो आप किसी को भेजना चाहते है| यह डाटा ऑडियो, विडियो, आंकड़े, टेक्स्ट, फाइल आदि किसी भी रूप में हो सकता है|

प्रेषक या Sender:

sender वह व्यक्ति होता है जो सन्देश को आगे भेजता है एवं उसे इस बात का पता होता है कि उसे किसे, कितना, कब, कहाँ, और क्या डाटा भेजना है|

माध्यम:

Medium या माध्यम सन्देश को भेजने में सहायता करता है एवं वह कुछ भी हो सकता है जैसे कि फैक्स, टेक्स्ट मेसेज, विडिओ, प्रिंट, या एक पोस्टमैन भी संचार के माध्यम के अंतर्गत आता है|

प्राप्तकर्ता या Reciever:

सन्देश या डाटा प्राप्त करने वाली डिवाइस या व्यक्ति प्राप्तकर्ता कहलाता है जो भेजे गये डाटा को receive करता है|

प्रोटोकॉल:    

इसका कार्य भेजे गये डाटा को मैनेज करना होता है एवं इससे संचार की प्रकिया को कारगर बनाने में सहायता मिलती है| असल में यह रूल्स का एक समूह होता है जो reciever को आपकी बात समझाने का कार्य करता है|