शरीर में मोच आती है जब हम शरीर के उस हिस्से को उसकी निर्धारित दिशा से विपरीत मोड़ लेते है तब शरीर में एक एंठन सी आ जाती है जिस वजह से शरीर का वह हिस्सा सूज जाता है। इस हांड़ मांस से निर्मित्त शरीर में मांसपेशियाँ और स्नायु बंधन कुछ निर्देशित दिशा में ही खुद को मोड़ सकते है और गति दे सकते है। ऐसे में जब उन्हें असुविधाजनक तरीके से तनाव दिया जाए तो मोच की स्थिति बनती है और वो जगह सूज जाती है।

इससे मांसपेशियों पर बल पड़ता है और यह बल शरीर के उपरी सतह पर  सूजन का  रूप ले लेता है। शरीर के हर हिस्से के चोट पर मस्तिष्क अपनी प्रतिक्रिया देता है जिससे शरीर चोट से जल्दी निजा़त पा सके या शरीर पर एक भरसक चक्रव्यूह सा बना सके। मस्तिष्क को तंत्र प्रणाली चोट के दौरान निरंतर संकेत देती है और वह तुरंत सक्रिय हो जाता है।

मोच लगते ही शरीर के उस हिस्से में तरल पदार्थों और सफेद रक्त कोशिकाओं का संचार बढ़ता है और शरीर का वह हिस्सा फुल जाता है। शरीर के उस हिस्से में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है और रसायनों कि भी संचय होता है। इससे उष्माक्षेपी प्रतिक्रिया होती है जो सूजन के असर को नियंत्रित करती है। मोच से हुए नसों के दबाव और खिंचाव से यह सूजन बढ़ती है।

सूजन का प्रभाव तीव्र या जीर्ण दोनों तरह का होता है। पर सूजन को शरीर की संभावित चोट से उत्पन्न हुई विपरीत क्रिया कह सकते है। यह प्रक्रिया बिल्कुल शरीर पर कटने या छिलने के बाद खून निकलने पर जमने वाले थक्के की तरह है।

इस तरीके से हम कह सकते है कि शरीर पर लगने वाले हर चोट के लिए शरीर ने एक क्षतिपूर्ति प्रणाली बना रखी है।