वायु का महत्व आप इस तथ्य से समझ सकते हैं कि बिना वायु के सामान्य मनुष्य 5-7 मिनट तक ही जीवित रह सकता है और कुछ समय पश्चात् ही वायु के अभाव में दम घुटने से मृत हो जाता है।

वर्तमान समय में बहुत से ऐसे कारण हैं जो वायु की शुद्धता में धीरे-धीरे कमी पैदा कर रहे हैं। कार्बन डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनो ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन व अन्य विषाक्त कणों आदि से वायु दूषित हो जाती है। ऐसी विषैली वायु में श्वास लेने से ये दूषित तत्व श्वास के जरिये हमारे शरीर के भीतर पहुँच कर दुष्प्रभाव पैदा करते हैं।

इस लेख में हम आपको बताना चाहते हैं कि वायु प्रदूषण कैसे मानव जीवन के लिए घातक है और ऐसा खतरा मनुष्य स्वयं ही अपने लिए पैदा कर रहा है। 

यूँ तो वायु प्रदूषण के बहुत से कारण हैं, मगर उन तमाम कारणों की कहीं न कहीं एक मुख्य वजह है, जो वायु प्रदूषण के साथ-साथ अन्य प्रकार के प्रदूषणों को भी बढ़ा रहा है और वह वजह है- जनसंख्या वृद्धि।

जनसंख्या वृद्धि के कारण शहरीकरण बढ़ रहा है। शहरों का क्षेत्र बढ़ाने के लिए पेड़ों की कटाई की जाती है, जिससे वायु में ऑक्सीजन की कमी आती है,कार्बन डाई ऑक्साइड अधिक हो जाती है और वायु में शीतलता का अभाव आता है। 

लोगों की संख्या में बढ़ोतरी से प्रत्येक प्रकार के उत्पादों की माँग भी बढ़ती है। माँग की पूर्ति के लिए उत्पाद निर्माण का कार्य करने वाले मिल व कारखानों की संख्या में वृद्धि भी स्वाभाविक है। फलस्वरूप इनसे निकलने वाला धुंआ अत्यधिक विषाक्त तत्वों से युक्त होता है, जो वायु को भी विषाक्त कर देता है। ऐसी वायु में सांस लेना मानव के लिए अत्यन्त हानिप्रद सिद्ध होता है और कई बीमारियों के कारण पैदा होते हैं। 

आज के समय में लगभग प्रत्येक घर में एक या अधिक दुपहिया वाहन हैं और बहुत से लोगों के पास चार पहिया वाहन भी हैं। जितनी अधिक आबादी होगी, उतनी ही अधिक संख्या मे वाहनों के प्रयोग में बढ़ोतरी होती जायेगी। वाहनों से निकलने वाले दूषित धुंए से वातावरण में साँस लेना मुश्किल हो जाता है और कई बड़े शहरों में तो यह प्रदूषण इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि सब धुंधला दिखाई पड़ने लगता है और चारों ओर दूषित वायु दिखाई पड़ती है, जो कि आँखों में भी जलन पैदा कर देती है।

कृषि कार्य में जब फसल पैदा हो जाती है तो पैदावार के बाद बचे अवशेष या फसल के नष्ट होने पर उसको विनष्ट करने के लिए आग लगा दी जाती है, जिससे बहुत बड़े क्षेत्र में धुंआ फैलता है और सारा वातावरण प्रदूषण से भर जाता है। यह कई रोगों को न्यौता देता है।

इन सबके अलावा और भी बहुत से कारणों से वायु दूषित हो रही है। इन्सान अपनी अनदेखी की वजह से भी वायु प्रदूषण में सहयोगी है।

आप जान ही गए होंगे कि वायु प्रदूषण से मानव दिन-ब-दिन रोगों का शिकार हो रहा है। वायु प्रदूषण की समस्या किसी एक शहर, राज्य या देश की नही है, अपितु पूरे विश्व की है। यह वैश्विक स्तर पर फैल चुका है। अंतर बस यही है कि कहीं पर इसका प्रभाव ज्यादा है और कहीं पर कम। भारत में तो वायु प्रदूषण उच्च स्तर पर ही है।

श्वसन रोग, आँखों के रोग, कैंसर व अन्य स्वास्थ्य को हानि देने वाले रोगों का एक कारण वायु प्रदूषण भी है। मनुष्य अपनी ही लापरवाही से अपने लिए खतरे पैदा कर रहा है। वर्तमान व भावी नुकसान से अवगत होने और ज्ञानवान होने के बावजूद भी मनुष्य इस खतरे की गहराई में जाता जा रहा है। यह तो अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा है।

वैश्विक स्तर पर चल रही इस समस्या में कमी करने के लिए वैश्विक स्तर पर ही प्रयास किये जाने चाहिए, अन्यथा यह बढ़ती ही जायेगी और कभी कम नही हो पायेगी|