यौन क्रिया से संचारित होने वाले रोग अर्थात दो व्यक्तियों के मध्य लैंगिक सम्बन्ध बनने से यदि कोई रोग एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच जाता है, तो ऐसे रोग को यौन संचारित रोग कहा जाता है।

कुछ ऐसे रोग है जो जीवाणुओं के रूप में एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में पहुँच जाते हैं, कुछ ऐसे रोग हैं जो विषाणुओं के द्वारा फैलते हैं तथा कुछ अन्य कारणों या जीवों के माध्यम से भी संक्रमित कर देते हैं।

विषाणु जनित रोग-

जेनाइटल वार्ट- यह “ह्यूमन पैपिलोमा वायरस” HPV के कारण होता है। इसमें जननांगों व गुदा मार्ग में मस्से बन जाते हैं। ये मस्से पहले छोटे होते है तथा धीरे-धीरे बड़े होते जाते है। ये दर्दनाक मस्से होते हैं।

जेनाइटल हर्पीज़- इसे जननांग दाद भी कहते हैं। यह “हर्पीज़ सिंप्लेक्स वायरस” के कारण होता है। इसमें जननांगों में दर्द व खाज के साथ छोटे छाले हो जाते है।

एड्स- HIV “ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस” के कारण एड्स होता है। इस रोग में मनुष्य की रोग प्रतिरोधक क्षमता का ह्रास होता है। प्रतिरक्षा तंत्र कमजोर होता जाता है, जिस वजह से मनुष्य को बहुत से छोटे बड़े रोग घेर लेते है तथा स्वास्थ्य में गिरावट अति जाती है। एड्स में इलाज करवाकर केवल कुछ सहायता हो सकती है, परन्तु यह रोग लाइलाज है।

हैपेटाइटिस बी- “द्विरज्जुकी डी.एन.ए. वायरस” के कारण होता है। रक्त या यौन सम्बन्धों के दौरान यदि यह वायरस शरीर में चला जाता है तो लगभग 25-35 दिन के भीतर यह रोग पैदा हो जाता है।

जीवाणु जनित-

क्लेमाइडियोसिस- “क्लेमाइडिया ट्रैकोमेसिस” नामक बैक्टीरिया से एक सप्ताह में यह रोग उत्पन्न होता है। इसमें पस्स (मवाद) जैसा तरल पदार्थ निकलता है तथा मूत्र मार्ग में पीड़ा उत्पन्न करता है।

गोनोरिया-  सुजाक रोग “नाइसेरिया गोनोरिया” नामक बैक्टीरिया से होता है। एक रोग प्रभावित व्यक्ति से यौन सम्बन्ध बनाने से यह बैक्टीरिया  दूसरे में पहुँच जाता है। इसमें जननांग पर अत्यधिक खाज व सूजन आ जाती है तथा मूत्र त्याग पीड़ादायक हो जाता है व बाधित होता है।

सिफलिस- सिफलिस अर्थात् उपदंश; यह “ट्रेपेनेमा पेलेडम” नामक बैक्टीरिया से फैलता है। इस बैक्टीरिया की आकृति सर्प के समान होती है। इस रोग में शिश्न के शीर्ष भाग पर अल्सर जैसे लाल या भूरे रंग के घाव हो जाते है और कई बार पुरे शरीर पर भी दाने उभर आते हैं। इस रोग से लकवा, गठिया, दिल का दौरा जैसी गम्भीर समस्याएं पैदा होने का भी ख़तरा रहता है।

अन्य कारणों से उत्पन्न होने वाले रोग-

योनि यीस्ट इन्फेक्शन- यह एक संक्रामक रोग है। “कैन्डिडा एल्बीकेन्स” नामक यीस्ट से यह संक्रमण होता है। इसमें जननांगों से यीस्ट जैसा मोटा व कठोर पदार्थ निकलता है।

वेजाइनीटिस- इसे ट्राइकोसोम्यासिस भी कहा जाता है। “ट्राइकोमोनेस वेजिनेलिस” के कारण होता है। इस रोग से जननांगों के भीतर व् आसपास जलन महसूस होती है तथा खुजली भी होती है। मूत्र मार्ग से झागदार तरल पदार्थ निकलता है।

प्यूबिक लाइस- इसमें जननांगों के बालों में जूँ पड़ जाती हैं। जूँ छोटे-छोटे परजीवी होते हैं। ये बालों के पोषण को खत्म कर देती हैं। इनसे प्रभावित हिस्से में अत्यधिक खुजली होती है।

स्कैबीज़-  इसका अर्थ है- खाज या खुजली। यह रोग एक जीव (कीड़े) के कारण होता है। यह शरीर के किसी भी भाग पर हो सकता है, परन्तु यदि स्कैबीज़ रोगग्रस्त व्यक्ति से साथ शारीरिक सम्बन्ध बनाये जाएं तो यह यौन अंगो में भी फैल जाता है। इसीलिए इसे यौन संचारित रोग कहते हैं।

शेनक्रोयड- यह भी यौन संक्रमित रोग है, जो सहवास के माध्यम से अंतरित होता है। इसमें जननांगों में दर्दयुक्त गिल्टी पड़ जाती है।

मोल्लस्कम कॉन्टागिओसम- त्वचा की बाहरी सतह पर इस रोग का वायरस होता है, जिससे यह रोग होता है। इसमें त्वचा पर गुलाबी रंग के दाने या चकते उभर आते है। रोगी व्यक्ति के साथ यौन सम्बन्ध बनाने से इस रोग की चपेट में आते हैं।