मृतजीवी ऐसे जीव या पौधे होते है जो क्षयमान एवं मृत जैविक पदार्थो एवं वनस्पतियो से अपना भरण-पोषण करते है। मृतजीवी को पूर्तिजिवी भी कहा जाता है। इस श्रेणी के अंतर्गत मशरूम को शामिल किया गया है, क्योकि मशरूम, कवक पर निर्भर रहता है, और वही से पोषण प्राप्त करता है।

मृदा विज्ञानं के अंतर्गत मृतजीवी जीवो का अध्ययन एक महत्वपूर्ण श्रंखला है। कवक और बैक्टीरिया भी मृतजीवी के प्रधान उदाहरण है, क्योकि दोनों ही अपशिष्ट एवं मृत पौधो से अपनी संख्या बढ़ाते है। मृतजीवी जीवो को पादप जगत में शामिल किया गया है, और इन्हें पर्यावरण के लिए लाभकारी माना गया है।

मृतजीवी पौधों की उत्पति एवं कार्य करने की प्रक्रिया:

मृतजीवी पौधे जैसे कवक और बैक्टीरिया आदि, नमी वाले एवं गर्म स्थानों पर ज्यादा उगते है। इन्हें विकसित होने के लिए पर्याप्त साधनों या वातावरण की आवश्यकता नहीं होती। कुछ प्रकार के मृतजीवी जीव, जानवरों की मृत्यु के बाद उनके शरीर के विघटन में भी महत्वपूर्ण योगदान देते है, इसलिए मृतजीवी को विघटनकारी भी कहा गया है।

मृतजीवी पौधों एवं जीवो को यदि अनुकूलित वातावरण मिल जाये तो इन्हें उत्पन्न होने एवं अपनी संख्या बढ़ाने में अधिक समय नहीं लगता, कई बार तो मृतजीवी २४ घन्टे के भीतर भी पैदा हो सकते है। मृतजीवी जीव एवं पौधे, जैविक पदार्थो को छोटे टुकडो में तोड़ कर, उनमे से प्रोटीन एवं दूसरे जरूरी तत्वों का इस्तेमाल करते है, जिससे धीरे-धीरे जैविक पदार्थ सड़ने लगता है और नष्ट हो जाता है। प्रकृति की ये सफाई की व्यवस्ता अत्यंत अद्भुत एवं कारगर है।