समुद्र आश्चर्यों का खज़ाना होते हैं। इसमें अनगिनत रहस्य छुपे होते हैं। पौधों, जीवों व प्राणियों की विविधता से युक्त समुद्र के ओर भी कई तरह के अद्भुत विषय सामने आये हैं, जिनमे से एक है- मारियाना ट्रेंच, जिसके बारे में इस लेख में चर्चा कर रहे हैं। 

मारियाना ट्रेंच पश्चिमी प्रशान्त महासागर में पाया जाने वाले विशाल ट्रेंच (गर्त) है। यह दुनिया की सबसे गहरी खाई (ट्रेंच) है। यह मारियाना द्वीपसमूह से 200 किलोमीटर की दूरी पर पूर्वी दिशा में है। अर्द्ध-चन्द्राकार इस ट्रेंच की लम्बाई 2550 किलोमीटर, चौड़ाई 69 किलोमीटर व गहराई 10994 मीटर बताई गयी है। हालांकि ट्रेंच की गहराई मापने का कार्य कभी दुबारा नही किया गया।

मारियाना ट्रेंच के गहराई के सम्बन्ध में यह भी कहा जाता है कि अगर माउण्ट एवरेस्ट को इस ट्रेंच में लाया जाए तब भी समुद्र का तल एवरेस्ट की चोटी से 1.6 किलोमीटर ऊपर  होगा।

इस ट्रेंच के भीतर का दबाव वायुमण्डल के दबाव से 1000 गुना ज्यादा है।

इसमें से कई प्रकार की गैसें भी निकलती रहती है। वैज्ञानिकों द्वारा की गयी जाँचों से यह भी सामने आया कि इसमें लगभग 200 प्रकार की प्रजातियों वाले समुद्री जीवों का वास रहता है, जिसमें एक कोशिकीय जीव भी हैं। ये सभी जीव अँधेरे की दुनिया में वास करते हैं, क्योंकि ट्रेंच की अथाह गहराई में प्रकाश का कोई स्त्रोत नही है और न प्राकृतिक प्रकाश की पहुँच है। 

वर्तमान समय में ऐसी पनडुब्बियों को बनाने के प्रयास किये जा रहे हैं जो इस ट्रेंच की भीतर पूरी गहराई तक जाने में सफल हो सके। हालाँकि पहले भी कुछ पनडुब्बियों को इसमें भेजा गया था। आजतक केवल 3 लोगों द्वारा ही मारियाना ट्रेंच की गहराई में प्रवेश किया गया है। सन् 1960 में यू.एस. के लेफ्टिनेंट डॉन वॉल्श व उनके साथी जेक्स पेकोर्ड द्वारा मारियाना ट्रेंच के 10790 मीटर की गहराई तक गमन किया गया। इसके बाद 2012 में कनाडा के फ़िल्म डायरेक्टर जेम्स कैमरन 10898 मीटर गहराई तक पहुँचे थे।

मारियाना ट्रेंच की अथाह गहराई के कारण इसमें सूर्य की रोशनी भी नही पहुँच पाती तो ऐसे में हैरान कर देने वाली बात है कि धरती पर फैला कचरा उसमे जाकर इसे प्रदूषित कर रहा है। मनुष्य द्वारा फैलाया गया प्रदूषण अब केवल धरती तक सीमित न रह कर समुद्र के अत्यन्त गहराई तक पहुँचता जा रहा है जो कि बहुत चिंताजनक विषय है। वैज्ञानिकों द्वारा ट्रेंच में पाये गए कचरे की तस्वीरें भी एकत्रित की गयी तथा इसमें विषैली गैसों की मौजूदगी के तथ्य भी दिए गए|