माचिस एक आम घरेलू चीज है जिसका उपयोग अग्नि को प्रज्ज्वलित करने के लिए किया जाता है।आमतौर पर, वर्तमान दिनों मे ‘माचिस’ छोटे लकड़ी की छड़ें या फर्म पेपर से बनी होती हैं। इसका एक छोर एक ऐसी सामग्री से ढका हुआ है जिसकी तिल्ली को रगड़ कर उत्पादित घर्षण से अग्नि को प्रज्वलितकिया जाता है। माचिस छड़ी कैसे अस्तित्व में आयी? यह सब फॉस्फोरस से शुरू हुआ। १६६९ में, फॉस्फोरस का शोध लगाया गया था और अब इसे माचिस हेड के हिस्से के रूप में उपयोग किया जाता है।

माचिस की तिल्ली बनाने का पहला प्रयास १६८० में हुआ था जब रॉबर्ट नाम के एक आयरिश भौतिक विज्ञानी ने फ़ास्फ़रोस और सल्फर से आग पैदा किया ।  दुर्भाग्यवश, उनके प्रयासों के परिणामस्वरूप कोई उपयोग करने योग्य कार्य नहीं हुआ, क्योंकि सामग्री अत्यधिक ज्वालाग्राही थी।

उसके बाद एक शताब्दी बीत गई लेकिन शोधकर्ता उस वक़्त भी एक स्व-प्रकाश लौ बनाने के तरीके के बारे में सबसे अच्छी संरक्षित विधि को तैयार नहीं कर सके थे, जिसका उपयोग सामान्य जनता द्वारा किया जा सके। संरक्षित माचिस (safety-match) बनाने का हल्कासा प्रेरणास्त्रोत १७ वीं शताब्दी के मध्य में केमिस्ट ‘हेनिग ब्रांट’ के विविध संशोधनोंसे प्राप्त हुआ, जिसकी पूरी जिंदगी विभिन्न धातुओं से सोने बनाने के संशोधन में बित गयी थी। अपने शोध के दौरान, उन्होंने यह पता लगाया कि शुद्ध फास्फोरस कैसे निकालें और अपनी दिलचस्प दहनशील संपत्तियों का परीक्षण कैसे करें। इस तथ्य के बावजूद कि उन्होंने अपनी उत्प्रेरक जांच में फॉस्फर को अलग करने की विधि का संशोधन किया, उनके लिखे गए नोट्स नए शोध प्रवर्तकोंके लिए उनके भविष्य की संभावनाओंके लिए मिल का पत्थर साबित हुए।

जो आज हम उपयोग करते है उस छोटी सुरक्षित माचिस का विचार सबसे पहले संभवतः १८२७ में अंग्रेजी वैज्ञानिक और फार्मासिस्ट ‘जॉन वॉकर’ को आया, जिन्हे लगा की अगर हम माचिस के तिल्ली के सिर (Head) को अगर विशिष्ट रसायनों के साथ ढक लिया, और उन्हें सूखने दिया जाये तो बादमे उस सुखी हुई तिल्लीको कही भी स्ट्राइक करके आग लग सकती है। ये मुख्य घर्षण बिंदू थे, जिन्हें रगड़ने की आवश्यकता थी। मुख्य रासायनिक मिश्रण के रूप में एंटीमोनी सल्फाइड, पोटेशियम क्लोराइट और स्टार्च का इस्तेमाल किया गया था। उन्होंने सबसे पहले माचिस का प्रस्ताव ७ अप्रैल, १८२७ को शहर के एक विशेषज्ञ श्री हिक्सन को दिया था।वॉकर ने अपने शोध-विकास से थोड़ा लाभ कमाया। इसके बाद तो उन्होंने अधिक संशोधन करके दुनिया को छोटी सी माचिस से अचंभित कर दिया और अपने व्यवसाय को अधिक ऊंचाई पर लेकर खड़ा किया ।

जिस मैच-स्टिक को हम आज जानते हैं उसे “सुरक्षा माचिस” भी कहा जाता है, क्योंकि यह आग लगने पर ही रोशनी करता है। यह जानना कितना आश्चर्यजनक है कि कैसे एक छोटी सी मैच छड़ी अद्भुत काम कर सकती है! वास्तव में हमने आग को आज मुट्ठी में बंद कर दिया है जोकि कुछ समय पहले लगभग असंभव सी चीज थी।