माइक्रोफोन एक ऐसा उपकरण है जो ध्वनि तरंगो को, इलेक्ट्रिकल सिग्नल या एनालॉग सिग्नल में बदल देता है, माइक्रोफोन को हम हिंदी में माइक भी कहते हैं जिसका इस्तेमाल शादी, पर्व या भासन देने होता है।

दो तरह के माइक्रोफोन बाज़ार में उपलब्ध है।

  • कंडेंसर माइक्रोफोन
  • डायनामिक माइक्रोफोन

डायनामिक माइक्रोफोन

डायनामिक माइक्रोफोन में एक चुम्बक के ऊपर तार ( metal coil ) को लपेटा जाता है, फिर चुम्बक के ऊपर एक पतली झिल्ली जिसे diaphragm कहते है, को लगाया जाता है।

यह डायाफ्राम ( diaphragm), ध्वनि तरंगो ( sound waves ) के vibrations को तार ( metal coil ) तक पहुचाता है।

जब ध्वनि तरंगे (sound waves) डायाफ्राम से टकराती है तो जो vibrations होता है उससे इलेक्ट्रिकल एनर्जी पैदा होता है यानि की बिजली पैदा होता है, ये वैसे ही काम करता है जैसे की एक मोटर में गोल चुम्बक के अंदर coil को घुमाने से बिजली बनता है।

बिजली कितना बनेगा यह इस बात पर निर्भर करता है की डायाफ्राम ( diaphragm) कितना vibrate कर रहा है।

फिर यह बिजली या इलेक्ट्रिकल सिग्नल तार के द्वारा कंप्यूटर या ऑडियो डिवाइस में जाता है।

कंडेंसर (Condenser) माइक्रोफोन

कंडेंसर माइक्रोफोन में आगे एक डायाफ्राम ( diaphragm) लगा होता है और उसके पीछे Backplate लगा होता है।

दोनों प्लेट एक दुसरे के सामानांतर होतीं हैं, जब ध्वनि डायाफ्राम ( diaphragm) से टकराती है तो यह vibrate करने लगता है इसके कारण डायाफ्राम और Backplate की बीच की दुरी बदलती रहती है।

इस बदलाव को इलेक्ट्रिकल सिग्नल के रूप में ट्रान्सफर किया जाता है, जहाँ डायनामिक माइक्रोफोन बिना इलेक्ट्रिसिटी की चलती है वही कंडेंसर माइक्रोफोन को इलेक्ट्रिक उर्जा की आवश्यकता होती है।

कंडेंसर माइक्रोफोन से निकल इलेक्ट्रिकल सिग्नल इतना छोटा छोटा है की उसे एम्पलीफायर की आवश्यकता पड़ती है।

एम्पलीफायर उस सिग्नल को बढ़ा देता है।