हम सभी फेफड़े के द्वारा हवा में साँस लेते है, फेफड़ा ऑक्सीजन को खून में मिला देता है और खून फिर पुरे शरीर में ह्रदय के द्वारा पंहुचा दिया जाता है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है की मछलियाँ ये सब पानी के अन्दर रहकर कैसे करती है ?

जिस तरह हमारे पास फेफड़ा होता है उसी तरह मछली के पास गिल होता है जिससे वह पानी में से घुला हुआ ऑक्सीजन निकालती है

गिल पानी से निकला ऑक्सीजन खून में मिला देता है और फिर यह पुरे शरीर को पहुचाया जाता है

हम मछली का गिल उसके सिर के पीछे देख सकते है , यह दिखने में झिल्लीदार स्पंज जैसा होता है

जैसा की हम जानते है की पानी ऑक्सीजन और हाइड्रोजन से बना है लेकिन मछली पानी को तोड़कर ऑक्सीजन नही ले सकती क्यों की ऐसा करने के लिए बहुत एनर्जी की आवस्यकता पड़ेगी, इसके बजाये मछली पानी में घुला हुआ ऑक्सीजन लेती है

क्या सभी मछलियों के पास गिल होता है ?

हाँ और नही, क्यों की हम मानते है की ब्लू व्हेल मछली है, डॉलफिन मछली है लेकिन ये दोनों मछली नही बल्कि मैमल्स में आते हैं और दोनों ही बच्चे को जन्म देते है न की अंडे

व्हेल और डॉलफिन के पास गिल नही होता उन्हें साँस लेने के लिए पानी के ऊपर आना पड़ता है

हालाँकि सभी मछलियों में गिल पाया जाता है, (व्हेल और डॉलफिन को छोड़कर क्यूँ की ये मछली नही हैं ) लेकिन सभी मछलियाँ अपने गिल का उपयोग नही करती जैसा की Lungfish  (लंग फिश ) जो मीठे पानी में रहती है उसके पास लंग्स भी होता है, ये मछली लंग्स से साँस लेती है

अक्सर रुका हुआ पानी में घुले हुए ऑक्सीजन की मात्रा इतनी कम हो जाती है की एक मछली उसमे गिल से साँस नही ले सकती इसलिए वह अपने लंग्स का इस्तेमाल करती है और पानी के ऊपर आकर साँस लेती है

सभी मछलियों में गिल्स होता है लेकिन सभी मछलियों में लंग्स नही होता