परिवर्तन हमारे जीवन का हिस्सा है। प्रत्येक क्षण किसी न किसी रूप में कहीं न कहीं कोई परिवर्तन होता ही रहता है।
हमारे आसपास पाये जाने वाले द्रव्यों में भी यह परिवर्तन होते हैं। द्रव्य में विभिन्न प्रकार के तत्वों, अवयवों, कणों, अणुओं, परमाणुओं का समावेश होता है। इन सबके मध्य क्रियाएँ होने से पदार्थ के रूप या गुण या आकार या सान्द्रता आदि में कई प्रकार के परिवर्तन आते हैं और कई बार ऐसे परिवर्तन से नया द्रव्य (पदार्थ)भी प्राप्त होता है। इनके अलावा द्रव्य की अवस्थाओं में भी परिवर्तन होते हैं, जैसे ठोस से द्रव बनना या गैस बनना आदि।
द्रव्यों में आने वाले इन परिवर्तनों को दो भागों में विभाजित किया गया है-
भौतिक परिवर्तन
रासायनिक परिवर्तन

भौतिक परिवर्तन

किसी द्रव्य की भौतिक स्थिति व गुणों में बदलाव आने को भौतिक परिवर्तन कहते हैं। किसी द्रव्य में पाये जाने वाले अणुओं के मध्य होने वाली अभिक्रिया से किसी द्रव्य में केवल रंग, आकार व मात्रा में ही परिवर्तन आता है, परन्तु रासायनिक आधारीय गुणों में कोई परिवर्तन नही आता है। जैसे- स्प्रिंग को दबाना या खींचना, कागज़ के टुकड़े करना।

भौतिक परिवर्तन अस्थाई प्रवृत्ति के होते हैं। कुछ परिस्थितियों में कोई नया द्रव्य प्राप्त होता है, परन्तु यह शाश्वत नही होता और नए प्राप्त द्रव्य पर विपरीत अभिक्रिया दोहराई जाये तो पुनः उसके मूल द्रव्य व मूल अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है।

जैसे- पानी का बर्फ बनना। यदि पानी को ठण्डा किया जाये तो बर्फ बनती है और बर्फ को ताप दिया जाए तो वह पानी बन जाता है।
इसमें पानी मूल द्रव्य है, जमना प्राथमिक अभिक्रिया है, तथा बर्फ नया प्राप्त द्रव्य है व ताप देना विपरित अभिक्रिया है।

रासायनिक परिवर्तन

जब किसी द्रव्य के अणुओं के मध्य ऐसी अभिक्रियाएँ होती हैं जिससे उसके भौतिक गुणों के साथ-साथ रासायनिक गुणों में परिवर्तन आता है तथा मूल गुणों से विहीन व नए गुणों से परिपूर्ण एक नया द्रव्य प्राप्त होता है तो यह रासायनिक परिवर्तन कहलाता है। जैसे- आटे की रोटियाँ सेकना, कागज़ जलाना, सब्जी पकाना आदि।

कई बार एक से अधिक द्रव्य आपस में क्रिया करके भी एक नए द्रव्य का निर्माण करते हैं। जैसे- दूध से दही बनना। जब कुछ दूध में थोडा सा दही डाला जाता है तो दही व दूध आपस में रासायनिक क्रिया कर के संपूर्ण दूध को दही के रूप में परिवर्तित कर देते हैं।

ऐसे परिवर्तनों में स्थायित्व होता है। इसमें नए प्राप्त द्रव्य की मूल अवस्था को पुनः प्राप्त नही किया जा सकता। इसमें होने वाली रासायनिक अभिक्रियाएँ द्रव्य को संरचनात्मक रूप से बदल देती हैं।

उपर्युक्त वर्णित उदाहरणों के अनुसार आटे के सिकने के बाद पकी हुई रोटी प्राप्त होती है व रोटी सिक जाने के बाद उसे आटे के रूप में लाना असम्भव है।
कागज़ जल कर राख होने के बाद हमे राख प्राप्त होती है व राख पुनः कागज़ का रूप नही ले सकती।
कच्ची सब्जी पकने के बाद पकी हुई सब्जी प्राप्त होती है और पकने के बाद उसे कच्ची अवस्था में नही लाया जा सकता।

भौतिक व रासायनिक परिवर्तन की सह स्थिति-
एक उदाहरण ऐसा भी है जो भौतिक व रासायनिक दोनों परिवर्तनों की सभी नियमों व शर्तों को पूरा करता है, वह है- मोमबत्ती का जलना।
जब मोमबत्ती को जलाया जाता है तो कुछ मोम आग से क्रिया करके धुंए व आग के रूप में जल कर खत्म हो जाता है। उसे पुनः मोम के रूप में प्राप्त नही किया जा सकता है। इसमें स्थायित्व प्रकट होता है। इसे रासायनिक परिवर्तन कहा जा सकता है।
इसके अतिरिक्त जलने के साथ ही कुछ मोम पिघलते हुए नीचे की ओर जमा होने लगता है, जिससे मोमबत्ती के आकार में परिवर्तन आता है। उस मोम को एकत्र कर पुनः मोमबत्ती के रूप में बनाकर उपयोग में लिया जा सकता है। इसमें अस्थायित्व की स्थिति रहती है। इस प्रकार यह भौतिक परिवर्तन कहलाता है ।