भूस्खलन हमेशा हमारे ग्रह पर मौजूद है। आम तौर पर जमीन की ढलान के नीचे चट्टान, मलबे और मिट्टी के बड़े पैमाने पर जब संचलन होता है तो वह भूस्खलन कहलाता है । जबकि भूस्खलन प्राकृतिक रूप से होने वाले पर्यावरणीय खतरे हैं, लेकिन हाल ही में मानव गतिविधि के कारण कुछ क्षेत्रों में आवृत्ति में वृद्धि हुई है।

भूस्खलन के कारण-

भूकंप: भूकंपीय गतिविधियां हमेशा दुनिया भर में भूस्खलन का मुख्य कारण रही हैं। । जब खड़ी ढलान वाले इलाकों में भूकंप होते हैं, तो मिट्टी फिसल जाती है। इसके अलावा, भूकंप के कारण बड़े पेड़ों के मलबे भी मिट्टी की बड़ी मात्रा में स्खलन का कारण होता है ।

भारी बारिश: भारी बारिश के कारण भी भूस्खलन का एक प्राकृतिक और बड़ा कारण होता है | जब एक जगह बहुत ज्यादा पानी एकत्रित हो जाता है तो मिटटी काफी गीली हो जाती है और इसका काई रूपों में स्खलन हो जाता है|

इसके अलावा भूस्खलन के कुछ और कारण है जो मनुष्यों द्वारा किये गए प्रकृति के अधाधुंध दोहन के कारण भी होतें है | जैसे – बड़ी मात्रा में पेड़ों का कटना तथा खनन में इस्तेमाल होने वाली ब्लास्टिंग के तरीके से भी भूस्खलन होता है |