ब्रायोफाईटा एक तरह का पादप है जो विज्ञानं के अंतर्गत एक उभयचर माना जाता है! मुख्य रूप से यह पौधा थल एवं जल दोनों जगहों में मौजूद रहता है! इस पौधे में हरितलवक प्रचुर मात्रा में पाया जाता है! ब्रायोफाईटा प्रजाति के सदस्य, वर्षा के दिनों में दीवारों, झीलों, नदियों, एवं झरनों के किनारे फ़ैल जाते है!

बहुकोश्कीय अंगो से युक्त इस पादप का आकार थेलसीनुमा होता है! उदहारण के रूप में रिक्सिया, मर्केंशिया, एन्थेसिरस आदि इस प्रजाति के सदस्य माने जाते है! ब्रायोफाईटा नमी वाले स्थानों पर निवास करते है, परन्तु ये शुष्क स्थानों पर भी जीवित रह सकते है! ब्रायोफाईटा को पनपने के लिए अधिक पानी या मिटटी की उर्वरता की आवश्यकता नहीं होती, ये कठोर चट्टानों, एवं ऊंचाई वाले स्थानों पर भी विकसित हो सकते है!

ब्रायोफाईटा का जीवन चक्र:

वैज्ञानिक वर्गीकरण का अंतर्गत ब्रायोफाईटा को तीन भागों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार है:-

  • हिपैटिसी
  • मसाई
  • एन्थोसिरोटी

विज्ञान के अंतर्गत इन सभी भागो के आगे उपभाग है, जो ब्रायोफाईटा वर्ग को एक विशाल पादप समूह के रूप में उजागर करते है! ब्रायोफाईटा की उत्पति के लिए शैवाल को प्रथम जिम्मेदार मन गया है, ब्रायोफाईटा के अंतर्गत करीब २३,००० उच्च प्रजातिया एवं निम्न प्रजातिया सम्मिलित की गई है!

ब्रायोफाईटा प्रजाति के सदस्य लम्बे समय तक अपने अस्तित्व को बनाये रखने में सफल होते है, क्योकि ये मिटटी और सूरज की किरणों से अपने लिए भोजन उत्पन करते है! ब्रायोफाईटा अपने युग्मजो से असंख्य बीजाणु की उत्पति करता है, जिससे नये पौधो का विकास होता है!