बिजली का उत्पादन विशाल बिजलीघरों में किया जाता है एवं बिजली के बिना रोजमर्रा के कार्य करना आज के समय में काफी मुश्किल लगता है| बिजली को हमारे घरों तक पहचानें के लिए तीन महत्वपूर्ण चरणों से होकर गुजरना पड़ता है जो इस प्रकार है:-

बिजली उत्पादन:

भारत में बिजली बनाने के लिए बड़े-बड़े तापीय प्लांट, नाभिकीय प्लांट आदि में बिजली का निर्माण किया जाता है| कई जगहों पर आजकल सौर ऊर्जा या हाईड्रा ऊर्जा के द्वारा बिजली उत्पादन किया जाता है|

बिजली को बनाने के लिए ज्यादा वोल्टेज की आवश्यकता नहीं पडती किन्तु उसे एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजने के लिए अधिक वोल्टेज की जरूरत पडती है जिसके लिए स्टेप अप ट्रांसफर्मर का इस्तेमाल किया जाता है|

बिजली पारेषण:

high voltage steel transmission tower during sunset.

इसके अंतर्गत बिजली को हाई टेंशन तारों से गुजार कर घरों तक पहुचाने का कार्य किया जाता है| इसमें वोल्टेज को बढ़ाकर उसे पॉवर प्लांट्स के द्वारा बिजली के टावर्स से गुजारकर बिजली का वितरण किया जाता है|

देश में कई संख्या में पॉवर प्लांट्स मौजूद है जो आपस में जुड़े हुए है| ये सभी पॉवर ग्रिड एक दूसरे से जुड़े हुए है एवं जरूरत के समय कोई भी ग्रिड दूसरे ग्रिड को पॉवर सप्लाई कर सकता है|

पारेषण प्रक्रिया के द्वारा राजकीय बोर्ड की कम्पनीज को बिजली वितरण किया जाता है जो आगे बिजली उपभोक्ता को कीमत लेकर बिजली का भुगतान करती है|

बिजली वितरण:

यह बिजली प्रक्रिया का अंतिम चरण है जिससे हमारे घरों तक बिजली पहुचती है एवं हम बिजली के बिल भरते है| वितरण की प्रक्रिया के अनुसार बिजली के पॉवर को 11Kv तक कम किया जाता है| इसमें बिजली को अलग-अलग जगहों पर लगे ट्रांसफार्मर तक वोल्टेज को कम करके भेजा जाता है| आपने प्रत्येक गली या मोहल्ले में ऐसे ट्रांसफार्मर लगे हुए देखे होगे इनको वितरण ट्रांसफार्मर कहा जाता है|

साधारण रूप से हमारे घरो में 230 वोल्टेज की पॉवर सप्लाई की जाती है| वितरण ट्रांसफार्मर में यह पॉवर 440 वाल्ट तक रहती है परन्तु घरों में इसकी सप्लाई को कम करके भेजा जाता है| बिजली के उपकरणों का रखरखाव काफी जोखिम भरा काम है किन्तु कुछ लोग बिजली चोरी करते समय यह नहीं सोचते की इसके लिए कितना संघर्ष किया जाता है|

अब आप समझ गये होंगे कि बिजली कैसे बनती है एवं बनने के बाद कैसे हमारे घरों तक आती है, इस बारे में अपनी राय हमारे साथ जरुर शेयर करे|