फ्लोराइड असल में एक प्राक्रतिक तत्व है जो मिटटी पानी में मौजूद रहता है एवं यह फ़्लोरिन के यौगिक समूह से मिलकर बनता है|

वैज्ञानिको ने बहुत पहले ही इस बात का पता लगा लिया था कि पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा सेहत के लिए हानिकारक हो सकती है|

फ्लोराइड की अधिक मात्रा से सबसे ज्यादा हानि दांतों एवं हड्डियों को होती है| वैसे तो फ्लोराइड प्राक्रतिक रूप से हमारे दांतों की सुरक्षा करता है एवं कैविटी से बचाव करता है किन्तु इसका ज्यादा प्रभाव नुकसानदायक भी साबित हुआ है|

कैसे आता है पीने के पानी में फ्लोराइड?

जैसा कि हमने कहा कि फ्लोराइड मिटटी पानी आदि में पहले से ही मौजूद रहता है किन्तु कारखानों आदि के अपशिष्ट नदियों, झीलों आदि में जाने से फ्लोराइड की मात्रा बहुत बढ़ जाती है|

फ्लोराइड के सहतत्व जैसे सोडियम फ्लोराइड एवं फ्लोरोसिलीकैट आदि इसके साथ ही विद्यमान रहते है| कुछ जागरूक देश जो पानी को दूषित नहीं होते देते वे अपने पीने के पानी में फ्लोराइड मिलाते है जिससे दांतों को स्वस्थ रखा जा सके|

फ्लोराइड के अच्छे प्रभाव:

हमारे दांतों पर नेचुरल एनामल की परत होती है जो बैक्टीरिया से दांतों की सुरक्षा करती है परन्तु ज्यादा मीठा खाने या गर्म चाय कॉफ़ी पीने से यह परत कमजोर पड़ जाती है एवं दांत खराब होने लगते है|

फ्लोराइड एनामल की इस परत की रक्षा करता है एवं बैक्टीरिया को मारने में मदद करता है| यह दांतों में हानिकारक अम्ल का निर्माण नहीं होने देता जिससे दांत मजबूत बने रहते है एवं खराब नहीं होते|

आप अपने पीने के पानी में फ्लोराइड की मात्रा का आसानी से पता लगवा सकते है एवं यदि वह निश्चित स्तर से ज्यादा है तो उसे कम करवाया जा सकता है| अपने पानी के बारे में आज ही अपने सप्प्लायेर से बात करे|