आमतौर में हम अपने दैनिक जीवन में प्लास्टिक से बने विभिन्न प्रकार के सामानों का इस्तेमाल करते हैं, जिसका अनुमान इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि विश्व भर में पाये जाने वाले कुल तेल का लगभग 8 प्रतिशत प्लास्टिक को उत्पादित करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होता है। 

प्लास्टिक का निर्माण सर्वप्रथम अमेरिकी वैज्ञानिक “जॉन वेस्ले हयात” द्वारा किया गया था। प्लास्टिक से तो बहुत सी चीजों का निर्माण किया जाता है, परन्तु आज के इस लेख में हम आपको यह बताना चाहते हैं कि प्लास्टिक का निर्माण कैसे होता है? 

प्लास्टिक कई तत्वों को मिलाकर निर्मित किया जाता है। इन तत्वों में कार्बन, सल्फर, क्लोरीन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन व नाइट्रोजन को सम्मिलित किया जाता है। चूँकि इसमें अनेक तत्वों का समावेश होता है तो सम्भवतः इसमें अणु व परमाणु भी पाये जाते हैं, जो परस्पर बन्धन में होते हैं। प्लास्टिक निर्माण की विधि में बहुलीकरण व संघनन की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इन दोनों प्रक्रियाओं में अणुओं से बहुलक निर्माण की क्रिया में भिन्नता पाई जाती है।

प्लास्टिक कई प्रकार के होते हैं, इसीलिए इन्हें निर्मित करने की विधियाँ भी अलग-अलग होती हैं। उच्च संवेदनशीलता पॉलीथीन, पॉली कार्बोनेट, कम घनत्व पॉलीथीन, पोलिबूटिलीन टेरेफेथलेट, पॉलीथीन टेरेफेथलेट, पोलिवेनाइल क्लोराइड, पोलियुरेथेन, पॉली प्रोपाइलेन, नायलॉन, एक्रिलोनिट्रीयल, पॉलिफ्ल्फोन, पॉलिस्टीरिन, पोलिक्सिमेथेलिन, पॉलीमैथिल मैथक्राइलेट, पॉलिटेट्राफ्लोराइथेलेन, पोलिफेनेलिन सल्फाइड आदि प्लास्टिक के प्रकार हैं। 

इन भिन्न-भिन्न प्रकार के प्लास्टिक से ही भिन्न-भिन्न प्रकार की वस्तुओं का निर्माण किया जाता है। कुछ प्लास्टिक में अधिक घनत्वता पाई जाती है और कुछ कम घनत्व वाले होते हैं। 

प्लास्टिक के सम्बन्ध में कुछ नकारात्मक तथ्य ये हैं कि प्लास्टिक का विघटन आसानी से नही होता है। यदि प्लास्टिक या प्लास्टिक से बनी कोई वस्तु जमीन के भीतर रह जाए तो यह हजारों सालों तक नष्ट नही होती तथा मृदा की उपजाऊ क्षमता पर विपरीत प्रभाव डालती है। प्लास्टिक को जलाने पर इसमें से जहरीली गैसें निकलती है, जो पर्यावरण प्रदूषण का कारण बनती है। प्लास्टिक हवा और पानी को अवरुद्ध करता है|