प्रोटिस्टा जगत में मुख्य रूप से एक कोशिकीय जीव एवं यूकेरियोटिक जीव शामिल किये गये है| इस श्रेणी के जीव अनेको प्रकार के जीवन की अलग छवि को प्रदर्शित करते हुए नजर आते है| जन्तु एवं पौधे के मध्य आने वाला युग्लिना भी इसी जगत का महत्वपूर्ण अंग माना जाता है| इस जगत के अंतर्गत प्रोटोजोआ भी आते है, जिसके अंतर्गत २ प्रकार की जीवन प्रणाली के बारे में जानकारी मिलती है, एक तो उन जीवों की जो प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भरण पोषण करते है एवं दूसरे वे जो प्रकाश के बिना इतरपोषक बन जाते है|

इस जगत में विभिन्न प्रकार के शैवाल, मोल्स, स्लाइम एवं प्रोटोजोआ आदि आते है| इन जीवों की सरंचना विशेष प्रकार की होती है, जिनसे इनकी पहचान एवं इनका अध्ययन करना आसान हो जाता है, प्रोटिस्टा जगत के जीवो की सरंचना इस प्रकार है:-

सरंचना

प्रोटिस्टा जगत के अंतर्गत आने वाले जीव जैसे की शैवाल, डायटम आदि प्राय: एककोशिकीय होते है| इनमे श्वसन अंग के रूप में माइटोकांड्रिया कार्यरत रहता हैं एवं इनमे केन्द्रक झिल्ली, गाल्जिकाय, कोशिका झिल्ली के भीतर गुणसूत्र, अन्त: प्रद्व्य जालिका आदि सभी अंग पाए जाते है|

प्रोटिस्टा जगत के प्राणी मृतोपजीवी या परजीवी अथवा प्रकाश संश्लेषण क्रिया के द्वारा अपना भरण पोषण करते है| प्रोटिस्टा जीव गमन करने के लिए कशाभिका (flagellum) , पादाभ एवं रोमाभ का प्रयोग करते है| कुछ प्रोटिस्ट जीव मानव के लिए हानिकारक हो सकते है जबकि कई लाभकारी भी होते है|

प्रोटिस्टा में जनन दो प्रकार की क्रियाओ द्वारा होता है जिसे लैंगिक जनन एवं अलेंगिक जनन कहा जाता है| लेंगिक प्रजनन के अंतर्गत नर एवं मादा जाइगोट का निर्माण करते है, जो युग्मक संयोजन द्वारा किया जाता है, जिससे अर्धसूत्री विभाजन फलित होता है एवं जीव का विकास सम्भव हो पाता है, जबकि अलेंगिक जनन प्रक्रिया द्विविभाजन प्रणाली द्वारा पूरी होती है, जिसमे पुटी निर्मित करके जीव का जन्म होता है|

प्रोटिस्टा का वर्गीकरण

प्रोटिस्टा जगत के अंतर्गत आने वाले जीवो का वर्गीकरण विभिन्न भागों में किया जाता है जो इस प्रकार है:-

फाइलम:

इसके अंतर्गत राइजोपोडा, फ्लेजलेटा, अपोरोजोया आदि आते हैं जिसके मुख्य उदाहरण अमीबा, युग्लिना आदि जीव होते है|

फाइलम के साथ-साथ फाइलम बैसीलेरियो फाईटा(Phylum Bacillariophyta), फाइलम फियोफाईटा, फाइलम क्लोरोफाईटा एवं फाइलम रोड़ाफाईटा आदि प्रोटिस्टा के वर्गीकरण के अंदर सम्मिलित है|

उदहारण के द्वारा प्रोटिस्टा जगत को समझना और भी आसान हो सकता है, जो इस प्रकार है:-

अमीबा

अमीबा प्रोटिस्टा जगत का महत्वपूर्ण प्राणी माना जाता है, जो ताल्राबो, झीलों आदि में पाया जाता है| अमीबा के भीतर संचरण के लिए पादाभ उपस्थित रहते है, जिससे ये अपना भोजन प्राप्त करता है| अमीबा के पादाभ इसे भोजन ग्रहण करने में सहायक होते है|

अमीबा के अंदर परासरण के लिए एक धानी विद्यमान होती है, जो साधारणतया संकुचनशील होती है| अमीबा में जनन के लिए द्विविभाजन प्रणाली का उपयोग किया जाता है, अत: इसमें लेंगिक जनन का गुण नहीं पाया जाता|

एंटअमीबा

अमीबा की यह प्रजाति मनुष्य के लिए हानिकारण साबित हो सकती है, जिससे मानवो में कई बार अमीबिय पेचिश रोग पैदा हो जाता है| इसकी एक साधरण प्रजाति को हिस्टोलिका कहा जाता है| इसका आकार व् बनावट अमीबा के समान ही होता है, अधिकांशत: ये प्रदूषित जल में पाए जाते है, यदि मनुष्य इस जल का सेवन करता है तो वह संक्रमित हो सकता है|

नर एंटअमीबा का आक्रमण सिस्ट के द्वारा फलित होता है, और यदि यह गाँठ मनुष्य के शरीर में पैदा होकर फट जाए एवं पेट एवं आंतड़ियो में फ़ैल जाए तो यह गम्भीर रोग उत्पन्न कर सकते है, इसलिए समय पर चिकित्सक परामर्श शनिवारी हो जाता है| इस रोग के प्रमुख लक्ष्ण है, पेट में दर्द एवं एंठन, उलटी आना, जी मिचलाना, शौच के साथ रक्त आना आदि|

प्लाजमोडियम

प्रोटिस्टा जगत के इस परजीवी को मलेरिया परजीवी भी कहा जाता है| इसका जीवन चक्र २ मुख्य प्रवस्थाओ में सम्पन्न होता है, जिसमे से लेंगिक जनन प्रावस्था मादा एनाफिलिज मच्छर द्वारा की जाती है, जो मलेरिया वाहक कहलाती है, एवं अलेंगिक जनन प्रावस्था मानव के रक्त द्वारा सम्पन्न की जाती है|

युग्लिना

यह जीव गंदे स्थानों, जैसे नाले, गड्ढे, गंदे पानी के जलाशयों आदि में उपस्थित रहता है| इस जीव का बाहरी आवरण बेहद लचीला होता है, जिसे पेलिकल कहा जाता है और यह प्रोटीन से निर्मित होता है| परासरण नियमन के लिए इसमें धानी मौजूद रहती है, जो प्राय: संकुचनशील होती है|

जनन के लिए द्विविभाजन प्रणाली का प्रयोग किया जाता है, एवं जल में संचरण कशाभ द्वारा किया जाता है|

डायटम

यह जीव नाम मिटटी, जल एवं गीली जगहों पर पाया जाता है| इसकी हजारो की संख्या में प्रजातिया जल में स्थित रहती हैं जो जलीय प्राणियों का भोजन करती है| डायटम तन्तु के रूप में विद्यामान हो सकते है, ये एक कोशिकीय भी हो सकते है तथा आकृतियों में भेद हो सकता है|

डायटम कोशिका भित्ति निर्मित करते हैं जिसके अंदर सिलिका उपस्थित रहती है| इनमे केन्द्रक पाया जाता है, एवं ये कई प्रकार के मिनरल्स का अच्छा स्त्रोत है|