प्रजनन एक क्रिया है और इस क्रिया का परिणाम है हम अर्थात् मनुष्य का जन्म। साधारण रूप में यौन सम्बन्ध बनाना व सन्तान को जन्म देना ही प्रजनन है।
यौन क्रिया के दौरान आवश्यक साधनों का प्रयोग करना; जो गर्भ निरोधक व यौन संचारित रोगों से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक हो आदि प्रजनन स्वास्थ्य के पहलू हैं।

जननांगों का स्वस्थ व स्वच्छ होना, यौन क्रियाएँ बेहतर होना, पूर्ण यौन-सुख की प्राप्ति करना, गर्भ धारण करने में समस्याएँ न होना, स्वस्थ व नीरोगी शिशु को पैदा करना आदि बातें प्रजनन स्वास्थ्य में सम्मिलित हैं।

लोगो द्वारा यौन सम्बन्ध बनाते समय पर्याप्त सावधानियां बरतना, स्वच्छता रखना, खुले विचारों के साथ यौन सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करना व दूसरों को भी इस जानकारी से अवगत करवाना तथा अपने यौन जीवन की स्वतंत्रता कायम रखना आदि प्रजनन स्वास्थ्य के अन्तर्गत आते हैं।

आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं (खासकर ग्रामीण इलाकों में) जो प्रजनन स्वास्थ्य के प्रति अचेत हैं व यौन शिक्षा से वंचित है जिससे प्रतिदिन लाखों की संख्या में लोग यौन संचारित रोगोँ से ग्रस्त हो रहे हैं। वे इस तथ्य से अनजान है कि इस एक क्रिया से वे स्वयं या साथी या शिशु गंभीर समस्या में पड़ सकते हैं तथा कुछ ऐसे भी रोग हैं जो लाइलाज है। परिणामस्वरूप रोगग्रस्त लोग मृत्यु के मुख में जा रहे हैं। मुख्य पहलू ये है कि तुलनात्मक रूप में पुरुषों से अधिक महिलाओं पर अधिक दुष्प्रभाव पड़ता है।

जनता को अपने प्रजनन अधिकारों का ज्ञान होना चाहिए। इसी के साथ इन अधिकारों का उचित प्रयोग करने व सुरक्षा का भी दायित्व भी है। प्रजनन सम्बन्धी अधिकार ये हैं-
1- प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी सुविधायें प्राप्त करे, व
2- स्वयं द्वारा निर्धारित प्रजनन।

फ़िनलैंड के पूर्व राष्ट्रपति हैलोनेन ने भी प्रजनन स्वास्थ्य के सम्बन्ध में ये वाक्य कहे थे कि, “हमारी पहली व दूरगामी सिफारिश ये होनी चाहिए कि प्रत्येक व्यक्ति के प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी अधिकारों का सम्मान होने के साथ-साथ उन्हें प्रोत्साहित भी किया जाना चाहिए और जब हम सब लोगों के स्वास्थ्य व अधिकार जैसे शब्दों का प्रयोग करते हैं तब इन शब्दों का अर्थ बिल्कुल इसी सही रूप में समझा जाये।”

प्रजनन स्वास्थ्य को कायम रखने के लिए आवश्यक है कि किशोरावस्था के दौरान लड़के-लड़कियों को यौन शिक्षा दी जानी चाहिए तथा प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी आवश्यक जानकारी से अवगत करवाया जाना चाहिए ताकि किशोरावस्था में होने वाली भूलों से बचाव हो सके तथा स्वास्थ्य सम्बन्धी अच्छी आदतें अपनायी जाये।

यदि लोग प्रजनन स्वास्थ्य को लेकर विचारशील और सचेत रहे तो इससे वे-
# यौन जीवन सुचारू रूप से कायम रख सकते हैं,
# महिलायें सफल तरीके से गर्भ धारण कर सकती हैं,
# यौन समस्याओं व यौन संचारित जानलेवा रोगों से बचा जा सकता है तथा इनके अनुपात में कमी लायी जा सकती है, 4- स्वस्थ सम्बन्ध बनाकर स्वस्थ सन्तान पैदा की जा सकती है,
# प्रजनन स्वास्थ्य की अनदेखी से प्रसव के दौरान होने वाली समस्याओं से माँ व बच्चे को अछूता रखा जा सकता है,
# रोगमुक्त व अवसादरहित दाम्पत्य जीवन यापन किया जा सकता है,
# देश की जनसंख्या वृद्धि की समस्या को कम किया जा सकता है,
# बाल-मृत्यु दर को घटाया जा सकता है।

उपरोक्त वर्णित के अलावा भी अनेक बहुत सी परेशानियों व समस्याओं को दूर किया जा सकता है।

लोगों को यौन सम्बन्धी समस्याओं से बचाव के लिए व प्रजनन स्वास्थ्य सम्बन्धी ज्ञान को आमजन तक पहुंचाने के लिए सरकार द्वारा प्रतिवर्ष 12 फरवरी को “यौन व प्रजनन स्वास्थ्य  जागरूकता दिवस” मनाया जाता है।
परिवार नियोजन व अन्य कई कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं, जिनमें लोगों से व्यक्तिगत रूप से बात की जाती है व सुनी जाती है तथा प्रजनन स्वास्थ्य के सभी आवश्यक तथ्य व सूचनाएँ प्रदान की जाती हैं।