प्रजनन तन्त्र के अन्तर्गत शरीर के वे अँग आते हैं, जिनसे नया जीवन अस्तित्व में आता है। शुक्राशय, शिश्न, मूत्राशय, मूत्रनलिका, प्रोस्टेट ग्रन्थि आदि पुरुष प्रजनन तन्त्र में होते हैं तथा अण्डाशय, योनिमार्ग, गर्भाशय, डिम्बग्रन्थि आदि स्त्रिओं के प्रजनन तन्त्र के अंग हैं। संतानोत्पत्ति ही प्रजनन तन्त्र का मुख्य कार्य है।
प्रजनन तन्त्र के किसी भी हिस्से में यदि कोई विकार या रोग या समस्या पैदा हो जाए तो इसके नकारात्मक परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं।
प्रजनन तन्त्र को प्रभावित करने वाले रोग ही प्रजनन तन्त्र के रोग कहलाते हैं। कुछ रोग इस प्रकार हैं-

योनि स्त्राव- योनि से हल्का स्त्राव होना व गीलापन रहना कोई समस्या नही है, यह आम बात है। परन्तु जब यह स्त्राव असामान्य रूप में हो तो यह समस्या हो सकती है। जब गाढा दुर्गंधयुक्त तरल पदार्थ योनि से निकलता है और कई बार यह दर्दनाक व जलन पैदा करने वाला भी हो सकता है तो यह प्रजनन तन्त्र में संक्रमण का संकेत हो सकता है।

पेल्विक संक्रमण- जननांगों में होने वाले संक्रमण को पेल्विक संक्रमण या पेल्विक इंफ्लेमेंट्री डिसीज़ (P.I.D.) कहा जाता है। इससे दर्द, खुजली, बुखार, सिरदर्द जैसी समस्याएँ भी पैदा हो सकती है। यह संक्रमण फैलते हुए मूत्र मार्ग से गर्भाशय व अंडाशय तक पहुँच जाता है, जो प्रजनन तंत्र में समस्या पैदा करता है।

जननांगों के जख़्म- प्रजनन तंत्र में विकार पैदा होने पर योनि या गुदा मार्ग में घाव हो जाते हैं जिससे मूत्र व मल त्याग में तकलीफ पैदा होती है। ये अंग अत्यंत नाजुक होते हैं, जिससे अत्यधिक दर्द का अनुभव होता है। इससे प्रजनन तंत्र कमजोर होता है।

निःसन्तानता- आम भाषा में इसे बांझपन कहा जाता है। कई बार प्राकृतिक रूप से कुछ स्त्रियों के शरीर में गर्भ ग्रहण करने की क्षमता नही पाई जाती है और कई बार प्रजनन तंत्र के किसी भी हिस्से में रोग पैदा होने पर यदि समय रहते उसका इलाज न करवाया जाए तो यह निःसन्तानता का कारण बन सकता है।

गर्भाशय कैंसर- प्रजनन तन्त्र का एक भाग है गर्भाशय, जिसमें भ्रूण विकसित होता है तथा प्रसव पूर्व शिशु के रूप में इसी में रहता है। इसे बच्चेदानी भी कहते हैं।
गर्भाशय के कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा वृद्धि हो जाने पर कैंसर का कारण बनता है।
असामान्य रूप से रक्तस्त्राव होना गर्भाशय कैंसर का संकेत हो सकता है।

अनियमित माहवारी- महिलाओं के प्रजनन तन्त्र में गर्भाशय व अंडाशय पाये जाते है। मासिक धर्म के दौरान बहुत अधिक रक्त स्त्राव या बहुत कम रक्तस्त्राव से समस्या पैदा हो सकती है। निश्चित काल में मासिक धर्म ना आने या मासिक चक्र से पहले ही रक्तस्त्राव शुरू हो जाना आदि प्रजनन तंत्र पर बुरा प्रभाव डालती हैं। पेट व निचले हिस्से में दर्द, रक्त संचालन में रुकावट व कमजोरी आदि महसूस होती है।

स्तम्भन विकार- शिश्न की नसों में क्रियाशीलता न होने के कारण यौन क्रिया के दौरान उत्तेजना नही बन पाती है, इसे ही स्तम्भन दोष या विकार कहते हैं। इससे यौन जीवन बिगड़ जाता है तथा प्रजनन क्षमता में कमी आती है।

प्रोस्टेट कैंसर- कर्क रोग(कैंसर) एक गंभीर रोग है। यह शरीर के बाह्य या आंतरिक किसी भी हिस्से में हो सकता है।
मूत्र नली के ऊपर के हिस्से में चारों ओर जो ग्रन्थि पाई जाती है, उसे प्रोस्टेट ग्रन्थि कहते हैं। मूत्र त्याग में कठिनाई, बार-बार मूत्र त्याग की इच्छा होना, मूत्र या वीर्य में रक्त आना, दर्द होना आदि कई प्रोस्टेट कैंसर के लक्षण होते हैं।

जननांग में सूजन या गाँठ- कई बार लिंग में गाँठ बन जाती है या सूजन भी आ जाती है।  यह प्रजनन अंगो में कमजोरी पैदा कर के इस पर विपरीत प्रभाव डालता है। इससे यौन जीवन प्रभावित होता है। यौन क्षमता को क्षीण करती