प्रकाश वर्ष की परिभाषा
प्रकाश वर्ष खगोलीय दूरी का वह इकाई है, जो की 1 साल में प्रकाश द्वारा तय किया गया दुरी के बराबर है।

प्रकाश वर्ष खगोलीय दुरी का मात्रक है। चुकी ब्रह्माण्ड इतना बड़ा और विशाल है की हम इसकी दुरी किलोमीटर में नही नाप सकते इस लिए ग्रहों और तारो की दुरी नापने के लिए हमें एक अलग मात्रक की जरूरत पड़ती है जिसे हम प्रकाश वर्ष कहते हैं।

अगर हम खगोलीय दुरी को प्रकाश वर्ष में नही नापे तो हमारी पृथ्वी से नजदीकी तारे की दुरी 38,000,000,000,000 किलोमीटर होगी। ये तो सूरज को छोड़कर पृथ्वी से सबसे नजदीकी तारे की दुरी है, अब सोच लीजिये की सबसे दूर तारे की दुरी किलोमीटर में क्या होगी। शायद हम गणना भी ना कर पाए। इसलिए इस परेशानी को दूर करने लिए हम प्रकाश का इस्तेमाल करते है।

जैसा की आप जानते हैं की प्रकाश 300,000 किलोमीटर पर सेकंड की रफ़्तार से दुरी तय करता है तो चलिए आइये हम यह पता लगते हैं की

1 प्रकाश वर्ष में कितना किलोमीटर होगा

300,000 * 60 सेकंड * 60 मिनट * 24 घंटा * 365 दिन  = 9,460,800,000,000 किलोमीटर की दुरी

मतलब की 1 प्रकाश वर्ष 9,460,800,000,000 किलोमीटर की दुरी के बराबर होता है

चुकी ब्रह्माण्ड की तुलना में हमारा पृथ्वी बहोत छोटा है तो यहाँ हम किलोमीटर से काम चला लेते हैं लेकिन ब्रह्माण्ड में काम चलाना मुस्किल हो जाता है। अब आप समझ गये होंगे की 1 प्रकाश वर्ष में कितना किलोमीटर होता है।

प्रकाश वर्ष से ब्रह्माण्ड की दुरी नापने के अन्य फायदे

क्या आपको पता है की हम प्रकाश वर्ष से किसी तारे की उम्र का भी पता लगा सकते हैं ? जी हाँ , आप जितने भी तारे आसमान में देखते है वो अभी वैसे नही हैं जैसा हमने देखा। बल्कि आप वर्त्तमान ना देख कर भूतकाल में हैं।  क्यों की कुछ तारे पृथ्वी से इतने दूर हैं की उनका प्रकाश पृथ्वी पर हजारो, लाखो प्रकाश वर्ष के बाद पहुचता है।

तो अगर आपने किसी तारा को देखा जो की 1 प्रकाश वर्ष की दुरी पर है तो यह मान लीजिये की आप उस तारे को 1 साल पहले जैसा था वैसा देख रहे हैं और अभी जैसा है वैसा नहीं।

अगर वह तारा 1000 प्रकाश वर्ष की दुरी पर है तो आप उस तारे को 1000 साल पहले जैसा था वैसा देख रहे हैं। क्यों की उस 1 हज़ार प्रकाश वर्ष दूर तारे के प्रकाश को पृथ्वी पर पहुचते पहुचते 1000 साल लग गये।

सोचिये, ब्रह्माण्ड इतना बड़ा है की यहाँ प्रकाश वर्ष भी फीका पड़ जाता है लेकिन चुकी 1 प्रकाश वर्ष की दुरी तय कर किसी नजदीकी ग्रह पर जाना ही हमारे लिए मुस्किल काम है इसलिए हम फ़िलहाल प्रकाश वर्ष से की खुश हैं।

फोटो सोर्स

जब प्रकाश ब्रह्माण्ड में दुरी तय करता है तो वह फैलता है और उसका wavelength ( वेव लेंग्थ ) भी बढ़ जाता है, इसका मतलब यह हुआ की जो तारा हमें लाल दिखाई देता है वह पृथ्वी से करोडो प्रकाश वर्ष की दुरी पर है, और जो पिला दिखाई देता है वह पृथ्वी से हजारो या सैकड़ो प्रकाश वर्षा की दुरी पर है यानि की लाल वाले से नजदीक है ,और असमान में जहा काला दिखाई देता है वहा के तारे अरबो प्रकाश वर्ष की दुरी पर है क्यों की उनका प्रकाश का wavelengh इतना फ़ैल गया है की वह प्रकाश visible स्पेक्ट्रम से invisible स्पेक्ट्रम में चला गया है तो इसका मतलब यह हुआ है की प्रकाश तो आ रहा है लेकिन हम उसे आँखों से देख नही पा रहे हैं।