किसी भी चीज़ से लगाव और उसके प्रति विनम्रता का भाव, उसके लिए कुछ अच्छा करने की इच्छा प्यार कहलाता है।

जब हम प्यार की बात करते हैं तो लोग लड़के लडकियों के प्यार के बारे में सोचने लगते है लेकिन ऐसा नही है।

प्यार बहुत तरह का होता है जैसे की अपने काम से प्यार, अपने देश से प्यार, अपने भाई बहन, माँ बाप से प्यार और अपने पत्नी या गर्लफ्रेंड से प्यार।

प्यार एक भाव है , एक इमोशन है जो उत्त्पन्न होता है जब आपका लगाव किसी से बहुत ज्यादा हो जाता है।

प्यार मूल्यतः 3 चीजों से मिलकर बना होता है।

  • मोह – एक दुसरे से लगाव, जुड़ाव या मोह की भाव
  • विस्वास – एक दुसरे पर भरोसा
  • सम्बन्ध – एक दुसरे के बीच आपसी सम्बन्ध

प्यार को अगर नेचर के दृष्टी कोण से देखा जाय तो यह एक स्पीशीज को बचाने और आगे बढ़ने की व्यवस्था है।

क्यों की अगर स्पीशीज में प्यार नही होगा तो वो आपसी सम्बन्ध नही बनायेंगे और इससे उनका जनसँख्या नही बढेगा और वह स्पीशीज लुप्त हो जाएगी।

जब हम प्यार में होते हैं तो हमारी बॉडी एक केमिकल बनती है जिसे हम Serotonin सेरोटोनिन कहते हैं।

यह केमिकल हमे ख़ुशी और सेहतमंद होने का अहसास कराती है, यह केमिकल एक नेचुरल पेनकिलर का काम करता है।

इसलिए जब हम प्यार में होते हैं तो हम खुश होते हैं।

हम जब अपोजिट सेक्स से attracted होते हैं और हम उनको seduce करना चाहते हैं या फिर उनसे seduce होना चाहते हैं और यह सब पुरुषो में testosterone हॉर्मोन तथा महिलाओ में एस्ट्रोजन हॉर्मोन की वजह से संभव हो पता है

ये दोनों ही सेक्स हॉर्मोन है, पुरुषो में testosterone की मात्रा बढ़ने पर उनकी कामुकता भी बढ़ जाती है लेकिन इसका मतलब ये नही की वे हर किसी से प्यार करने लगेंगे, यह बस लस्ट होता है जो क्षणिक होता है

इनसब के बाद ३ और हॉर्मोन की भूमिका सामने आती है क्यों की जब हम प्यार में होते है तो अपने पार्टनर से मिलना चाहते है और रोमाटिक राते गुजरना चाहते है, उनके साथ क्या करना है ये सोच कर हम exited हो जाते है, यह सब ये ३ हॉर्मोन संभव करा पाते है

Norepinephrine (नोरेपिनेफ्रिन) – यह हर्मोने हमारी दिल की धड़कन और उत्तेजना, उत्साह को बढ़ता है।

Dopamine (डोपामाइन)- इसे “pleasure chemical” भी कहते है यह हमे परमानंद के सुख का अनुभव करता है।

Serotonin (सेरोटोनिन ) – यह केमिकल हमे यह महसूस करता है की हमारे साथ कोई है और हम अकेले नही हैं।