शरीर में सात प्रकार के पोषक तत्वों का समावेश होता है- कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज लवण, न्यूक्लिक अम्ल, जल ।

कार्बोहाइड्रेट– शरीर को ऊर्जा प्रदान करना व निरंतर नई ऊर्जा का उत्पादन कर व्यक्ति को ऊर्जावान बनाए रखना इस तत्व का प्रमुख कार्य है। गेंहू, चावल, बाजरा, शकरकंद, शलगम, आलू आदि कार्बोहाइड्रेट का स्त्रोत है।

प्रोटीन– यह तत्व शारीरिक वृद्धि व कोशिकाओं व तन्त्रिकाओं के विकास के लिए आवश्यक होता है। चना, दाल, बादाम, काजू, मांस, मछली, अंडे, दूध, फल, सोयाबीन व मूंगफली से भरपूर मात्रा में प्रोटीन प्राप्त किया जा सकता है।

वसा– यह तत्व भी शरीर को ऊर्जावान बनाता है तथा तापमान का संतुलन बनाये रखने में सहयोगी होता है और त्वचा के लिए भी लाभकारी है। जैतून व मछली के तेल, सरसों का तेल, घी तथा नट्स में पर्याप्त वसा पाई जाती है।

विटामिन– हड्डियों व बालों की मजबूती, त्वचा की चमक, हॉर्मोन के संतुलन, प्रजनन क्षमता के विकास आदि के लिए यह तत्व अत्यंत आवश्यक है। दूध, अंडे, फिश लिवर ऑयल, हरी सब्जियां, सूखे मेवे, ज्यूस, अंकुरित अनाज, फल आदि बहुत से उत्पाद विटामिन के अच्छे स्त्रोत हैं।

खनिज लवण– पाचन सम्बन्धी क्रियाओं के उचित संचालन के लिए, नसों व मांसपेशियों की मजबूती के लिए, रक्त कणिकाओं की आवश्यक मात्रा बनाए रखने के लिए, तांत्रिक तन्त्र के विकास के लिए व नई कोशिकाओं के निर्माण में खनिज तत्व आवश्यक होते हैं।

न्यूक्लिक अम्ल– मनुष्य में आँखों का रंग, बालों का रंग, त्वचा का रंग आदि जैसे आनुवांशिक गुणों का एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के सदस्यों तक संवहन करने का कार्य न्यूक्लिक अम्ल ही करता है।

जल- शरीर का सही तापमान, त्वचा का निखार व नमी बनाये रखने के लिए जल एक आवश्यक तत्व है। शरीर के भीतर मानव भार का 65-70% स्तर तक जल होता है। इस स्तर में 1% कमी आने पर प्यास उत्पन्न होती है तथा यदि यह कमी 10% तक हो जाये तो जल के अभाव से मृत्यु हो जाती है।