पृथ्वी पर इतना पानी कहा से आया ये अभी तक साफ नहीं हो पाया है। लेकिन इसके बावजूद कुछ हाइपोथिसिस (Hypothesis ) हैं जो ये दर्शाते हैं की पृथ्वी पर पानी कैसे आया होगा।

हमारे सोलर सिस्टम ( सौर मंडल ) में अन्य किसी ग्रह पर इतना पानी नहीं है जितना की पृथ्वी पर है। पृथ्वी का 70 % छेत्रफल पानी से ढका हुआ है इतना पानी किसी एक सोर्स से तो नहीं आ सकता, इसके बहोत सारे सोर्स भी हो सकते है।  चलिए हम इन्ही के बारे में हाइपोथिसिस के द्वारा चर्चा करेंगे ।

पृथ्वी पर पानी आने के 2 हाइपोथिसिस हैं

1 . पृथ्वी पर पानी पृथ्वी के निर्माण के समय से ही मौजूद है।

2. पृथ्वी पर पानी क्षुद्र ग्रह  (Asteroids ) और उल्का पिंडो (Meteorite ) द्वारा लाया गया है।

जब हमारा सौर मंडल का निर्माण हुआ और पृथ्वी आया उसी समय हुआ यह की पृथ्वी के सतह पर मौजूद पानी अंतरिक्ष में विलुप्त हो गया। अभी तक हमें यह ज्ञात था की पृथ्वी पर पानी क्षुद्र ग्रहो और उल्का पिंडो द्वारा लाया गया है लेकिन एक रिसर्च से पता चला है की पृथ्वी के निर्माण के समय ही पानी के कण पृथ्वी के मेंटल में मौजूद थे।

पानी के हाइड्रॉक्सिल समूह (एक हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन परमाणु ) पृथ्वी के मेंटल (आवरण ) में संग्रहित होता है। जब मेटल चट्टियां पिघलती हैं, तो पानी मेग्मा में घुल जाता है। फिर मैग्मा सतह की और बढ़कर ठंडा हो जाता है और ज्वालामुखी के माध्यम से वाष्प के रूप में उत्सर्जित होता है।

हज़ारो साल पहले ऐसा हुआ जिसके कारन आज हमारे समुद्र में इतना पानी है।

बिग बैंग के बाद सब कुछ गैस फॉर्म में था। उसी समय परमाणु के पार्टिकल्स एक दूसरे से जुड़ते टकराते गए और फिर हमारे सौर मंडल का निर्माण हुआ। जब ऑक्सीजन के परमाणु हाइड्रोजन के परमाणुओं से टकराये तो पानी बना लेकिन चुकी उस समय सूर्य का तापमान काफी ज्यादा था और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्सन बल काफी कमजोर था पृथ्वी उन पानी के कणो को खींच नहीं पाया और वो भाफ बनकर अंतरिक्ष में विलुपुत हो गए। लेकिन उसी समय जो उल्का पिंड और क्षुद्र ग्रह सूर्य से दूर थे, और वह तापमान काम होने के कारन उनमे पानी बचा रहा फिर जब ये उल्का पिंड पृथ्वी से टकराये तो उल्कापिंडो का पानी पृथ्वी पर आ गया।

इस तरह इन दो तरीको से पृथ्वी पर पानी आया।