पाषाण संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है पत्थर, यह उस समय का इतिहास है जब मानव पत्थरों पर अधिक आश्रित था एवं उसे चीजों के इस्तेमाल का ज्ञान न के बराबर ज्ञान था|

पाषाण काल को प्रागीतिहासिक या Pre-Historic काल भी कहा जाता है| पाषाण काल का समय 6 लाख ई.पूर्व के आसपास माना जाता है एवं उत्खननों द्वारा मिली जानकारी के आधार पर इसे तीन भागों में विभक्त किया गया है:-

पुरापाषाण काल Paleolithic Age

मध्य पाषाण काल Mesolithic Age

नव पाषाण काल Neolithic Age

पुरापाषाण काल का इतिहास:

पुरापाषाण काल के समय को लेकर अलग-अलग विद्वानों के अलग मत है| इसका समय 25 लाख साल से 12,000 पूर्व के बीच माना जाता है| इस समय में मानव आदिमानव के जैसे संघर्षपूर्ण हालातों में रहा करते थे, जैसे गुफाओं में रहना, पत्थर के औजार बनाना, आदि|

भारत में पुरापाषाण युग की खोज 1868 ई. में की गई थी जब चेन्नई के पास खोज व् खुदाई के दौरान पुरापाषाण काल के सबूत मिले| इसके बाद पूरे भारत में अलग-अलग स्थानों पर खुदाई की गई जिससे इस युग के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त हुई|

कैसा था पुरापाषाण काल में मानव जीवन:

खोजों के दौरान पत्थरों से बनी गुफाओं में मानव जीवन के संकेत मिले है जिसमे शिलाओं पर चित्र एवं चिन्ह उत्कीर्ण किये गये है| साथ ही पत्थर से बने औजार मिले है जिससे पता लगता है अभी मानव को लोहे या अन्य धातु का ज्ञान नहीं था, इससे सम्बन्धित कुछ बिंदु इस प्रकार है:-

रहन-सहन:

इस युग में मानव का जीवन खतरों से भरा हुआ था एवं खुद को बचाने के लिए उसने गुफाओं का सहारा लिया क्योकि बाहर उसे जंगली जानवरों से डर था एवं मौसम की मार भी उसे डराती थी| आदिमानव अपनी जगह बदलता रहता था एवं जहाँ उसे सुरक्षित महसूस होता उसी को अपना निवास बनाता|

औजार निर्माण:

खुदाई से मिले औजारों से यह साफ़ है कि उस समय मानव को हथियारों या औजारों की जानकारी नहीं थी क्योकि प्राप्त औजारों की बनावट अजीब एवं भद्दी है| प्रारंभ में शिकार को मारने के लिए पत्थर का इस्तेमाल किया जाता था धीरे-धीरे मानव ने पत्थर को शेप देना एवं नुकीला बनाना सीखा एवं हथौड़ा, कुल्हाड़ी, चाकू आदि बनाये|

आहार:

इस युग में मानव को खेती करना नहीं आता था एवं प्रारंभ में उसने कंदमूल खाकर गुजारा किया किन्तु जल्द ही उसने दूसरे जानवरों का मांस खाना शुरू किया चूँकि मानव को आग का ज्ञान नहीं था इसलिए वह कच्चा मांस ही खाता था|

पहनावा:

पहले तो मानव पत्ते, पेड़ की छाल पहनता था किन्तु इससे ठण्ड से बचाव नहीं हो पाता था इसलिए वह जानवरों की खाल पहनने लगा|

आग की खोज:

अब इस युग में आग की खोज की गई हालंकि यह साफ़ नहीं कि मानव ने इसे कैसे खोजा होगा| आग की खोज ने मनुष्य के जीवन को सुगम बनाया क्योकि जंगली जानवर आग से डरते थे एवं मांस पकाने के लिए यह अच्छा स्त्रोत था|

मृतक संस्कार:

खुदाई में मिले कंकालों से पता लगता है कि पुरापाषाण काल में मानव अपने मृतकों को दफनाते थे एवं उसके साथ खाद्य सामान रखते थे शायद वे पूर्वजन्म में विश्वास करते थे|

कला का ज्ञान:

इस समय में मानव को चित्र बनाना, एवं शिलाओं पर चित्र उकेरना अच्छे से आने लगा था जिसका सबूत गुफाओं में मिले चित्रों से एवं शिलाओं पर बने जानवरों के चित्रों से प्राप्त होता है|

मध्य पाषाण काल का इतिहास:

इस युग में मानव ने शिकार करना अच्छे से सीख लिया था एवं जानवरों को भी पालतू बनाने लगा था| खनन के दौरान कई तरह के पत्थर से बने औजार हाथ लगे है जो पहले के युग की तुलना कही अधिक परिष्कृत थे|

ये हथियार पत्थर से बने है एवं कई में लकड़ी का बना हैंडल भी लगा हुआ है|

इस काल में मानव मछली पकड़ना एवं मांस को अच्छे से पकाकर खाने लगा था| रहने के लिए वह अभी भी गुफाओं पर आश्रित था एवं धनुष बाण एवं मछली पकड़ने के कांटो का इस्तेमाल करना भी सीख लिया था|

मध्य पाषाण काल में मानव ने कुत्ते को पालतू के रूप में रखना शुरू किया एवं शिकार में उससे सहायता लेने लगा|

नव पाषाण काल का इतिहास:

नव पाषाण काल मानव की उन्नति एवं सूझ-बुझ का युग था जिसके अवशेष पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों से मिले है| इसमें बंगाल, उत्तर प्रदेश, बिहार, कश्मीर, असम, मध्य प्रदेश, चेन्नई, गुजरात आदि सभी जगहों से नव पाषाण काल के अवशेष प्राप्त हुए है|

औजार एवं कृषि:

इस युग में हथियारों के निर्माण में काफी उन्नति हुई अब बेडोल औजारों की जगह चमकदार, मजबूत, एवं नुकीले औजार बनाये जाने लगे

ये औजार न केवल शिकार को मारने का काम करते थे बल्कि रोजमर्रा के कामों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे|

पशुपालन एवं कृषि:

अब मानव ने कुत्ते के साथ-साथ गाय, बकरी, भेड़, ऊंट आदि को पालना शुरू कर दिया| इसी युग में कृषि करने के लिए हल खोजा गया| इस युग को सबसे क्रांतिकारी माना गया है क्योकि अब मानव सिर्फ शिकार पर आश्रित न होकर कृषि करने लगा था जिसमे चावल, गेहूं, बाजरा, कपास, मक्का आदि की फसलें उगाना उसे आने लगा था|    

आहार:

इस युग में मानव ने अपने आहार में काफी परिवर्तन किये एवं पशुओं से दूध निकालना एव उससे विभिन्न चीजे बनाना सीख लिया था| अनाज पीसने के लिए पत्थर के उपकरण बनाये गये| गेहूं, बाजरा, मक्का, जौ आदि खाद्य सामग्री के मुख्य अंग थे|

वस्त्र एवं बर्तन निर्माण:

जहा पुरापाषाण युग में मानव पत्ते पहनता था वहीं नव पाषाण काल में उसने रेशों से कपड़ा बनाना सीखा| खुदाई में मिले करघे एवं कपड़े बुनने के समान से ज्ञात होता है कि अब वह अच्छे कपड़े पहनने लगा था एवं कपास की खेती भी इसलिए की जाती थी|

मिटटी के कई प्रकार के बर्तन उत्खनन के दौरान प्राप्त हुए है जिससे उनके बर्तन बनाने की उच्च कला के बारे में पता लगता है|

बड़े चाक या पहिये का अविष्कार भी इसी युग में किया गया जिससे बड़े-बड़े बर्तन बनाये गये ताकि अनाज संग्रहित करके रखा जा सके| इस युग के लोग धार्मिक थे एवं प्रक्रति की पूजा करते थे एवं मातृदेवी की उपासना के प्रमाण भी मिले है|