पारिस्थितिकी पिरामिड के अंतर्गत वैज्ञानिक शोध हेतु पर्यावरण में रहने वाले जीवो का पौष्टिकता एवं उनके आपसी संबंधो का अध्ययन करने की प्रक्रिया को पारिस्थितिकी पिरामिड या पारिस्थितिकी शंकु अध्ययन कहा जाता है| इसमें जीवो की पारिस्थितिकी को बायोमॉस पिरामिड, सख्या पिरामिड एवं ऊर्जा पिरामिड के रूप में व्यक्त किया जाता है|

पारिस्थितिकी पिरामिड के माध्यम से पौष्टिकता के बराबर स्तर एवं खाद्य श्रंखला के अंतर्गत ऊर्जा की मात्र एव्म् खपत इसके साथ ही जनसंख्या में कितनी बढ़त एवं घटोतरी हुई आदि सभी घटकों एवं सूचनाओं के आंकड़ो का आंकलन किया जाता है, जिसे वैज्ञानिको ने पारिस्थितिकी पिरामिड का नाम दिया है|

पारिस्थितिकी पिरामिड के मुख्य प्रकार:

पारिस्थितिकी पिरामिड को मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है, जो इस प्रकार है:-

  • जीव संख्या पिरामिड या शंकु

इस भाग के अंतर्गत जीवो के रहने वाले स्थानों पर उनके पोषण के स्तर को प्रदर्शित करने के लिए पिरामिड निर्माण किया जाता है, जिसे जीव संख्या पिरामिड कहा जाता है| इसमें उपभोगताओ की संख्या कम एवं उत्पादको की संख्या ज्यादा मानी गई है| इस श्रेणी के अंदर घास के मैदान, तालाब आदि के क्षेत्र सम्मिलित है|

  • पारिस्थितिकी बायोमॉस या जैव भार पिरामिड:

इसके अंतर्गत खाद्य श्रेणी से जुड़े हुए सभी जीव-जन्तुओ के भार को प्रदर्शित करने हेतु निर्मित पिरामिड को जैव भार पिरामिड कहा जाता है| इसमें जलचर जीवो का भार सबसे ज्यादा होता है, अत: जैव भार पिरामिड हमेशा उल्टा बनता है|

  • पारिस्थितिकी ऊर्जा कोण पिरामिड:

पारिस्थितिकी ऊर्जा का पिरामिड ऊर्जा की मात्रा हेतु किया जाता है, जिसका शंकु हमेशा सीधा बनता है|

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