पारिस्थितिकी या इकोलॉजी, पर्यावरण में रहने वाले सभी जीव-जन्तुओ एवं प्राणियों के आपसी सम्बन्ध एवं उनके क्रियाकलापों के अध्ययन करने की प्रक्रिया को कहा जाता है| साधारणतया पारिस्थितिकी को अंग्रेजी में “एनवायरमेंट बायोलॉजी” भी कहा जाता है, जो जीव विज्ञानं की एक शाखा का रूप है|

सर्वप्रथम पारिस्थितिकी शब्द का इस्तेमाल जर्मन वैज्ञानिक अर्नेस्ट हैकल ने १८६६ में अपनी बुक में किया था| पारिस्थितिकी अध्ययन के अंतर्गत जीवो के अध्ययन के साथ-साथ मानव पारिस्थितिकी का सिदान्त भी अनावृत किया गया, जिसके अनुसार ये तथ्य सामने आया कि मनुष्य पर्यावरण का एक मुख्य बिंदु है, एवं मानव का अस्तित्व प्रकृति के लिए बहुत बार नकारात्मक परिणाम भी लाया है|

पारिस्थितिकी के प्रमुख घटक:

  • जैविक घटक
  • अजैविक घटक

मानव का पारिस्थितिकी पर प्रभाव:

पारिस्थितिकी अध्ययन एक जटिल प्रक्रिया है, इसलिए  इसे जीवो, पादपो, जीवो का परस्पर सम्बन्ध, क्रियाएं एवं जनसँख्या के आधार पर अलग करके, पृथक नस्लों एवं प्रजातियों के अध्ययन से शुरू किया| २०वी सदी के अंत तक आते-आते ये बात भी साबित हो गई कि मानवीय गतिविधिया एवं क्रियाकलाप हमेशा पर्यावरण हितेषी नहीं होते|

मानव अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु पारिस्थितिकी को कई बार बहुत नुकसान पहुचाता है, जैसे वृक्षों की अंधाधुंध कटाई, विभिन्न कारखाने स्थापित करके पर्यावरण प्रदूषण एवं जंगली जीवो को अपने मनोरंजन के लिए मारना आदि क्रियाए इसमें सम्मिलित है|

पारिस्थितिकी अध्ययन के अंतर्गत स्थलीय अध्ययन के साथ समुंदरी जीवो का अध्यययन भी सम्मिलित है, जिसके परिणामस्वरूप पानी की गहराई में जाकर जीवन का पता लगाया गया है, जहाँ आक्सीजन की कमी है, परन्तु फिर भी जीवन है|