क्या आपने कभी गौर किया है की लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहने के कारण हमारे हाथ और पैरों की उंगलियों में किश-मिश की तरह प्रतीत होने वाली झुर्रियां क्यों बन जाती हैं? शोधकर्ताओं के अनुसार हमारे हाथ और पैरों की उंगलियों की मोटी परत वाली त्वचा पर शरीर के अन्य हिस्सों की तुलना में अधिक मृत कोशिकाएं होती है, यह मृत कोशिकाएं एक कुशल स्पंज की तरह पानी को सोख लेती है|

इसके विपरीत हमारे शरीर की पतली त्वचा पानी से कम प्रभावित होती है अर्थात पानी इस त्वचा पर ठहरता नहीं और तुरंत ऊपर से बिना अधिक प्रभावित किये निष्कासित हो जाता है|

मानव शरीर के हाथ और पैरों पर त्वचा की बाहरी परत को एपिडर्मिस कहा जाता है जो हमारे शरीर के बाकी हिस्सों की त्वचा से बिल्कुल अलग होती है| जब हम अधिक देर तक पानी में रहते हैं तो हमारे हाथ और पैरों की उंगलियों पर स्थित मृत कोशिकाएं पानी से संतृप्त हो जाती है अर्थात वे पानी को सोख लेती है,ठीक एक कुशल स्पंज की भांति|

जैसे-जैसे एपिडर्मिस में सूजन शुरू होती है यह त्वचा की परतों के निचले हिस्से पर पानी को खींचता चला जाता है और परिणाम स्वरूप हमारे पैरों की उंगलियों और हाथों की उंगलियों में झुर्रियां उभर कर आ जाती है| यह हमारे शरीर के इन अंगों में एक दर्द रहित और अस्थाई स्थिति है जो थोड़े समय बाद पुनः यथास्थिति में परिवर्तित हो जाती है| वहीं दूसरी और गहरी परत वाली त्वचा तंतुओ से बेहतर तरीके से ढकी हुई होती है और पानी को सोकती नहीं है,जिसके कारण इन पर झुर्रिया नहीं विकसित होती है |

इसलिये पानी में देर तक रहने पर, पैर और हाथ की उंगलियों में झुर्रियां क्यों पड़ जाती है|