पाचन तन्त्र एक रासायनिक प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत भोजन को पचाने के लिए कुछ एंजाइम एवं रासायनिक तत्वों की सहायता से बड़े अणुओ जैसे वसा, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट्स आदि को घुलनशील एवं छोटे अणुओ जैसे ग्लोकोज, अमीनो एसिड आदि में रूपांतरित कर दिया जाता है और जीवो के शरीर में इस सम्पूर्ण प्रक्रिया को अंजाम देने वाली ईकाई या तन्त्र को पाचन तन्त्र कहा जाता है|

पाचन तंत्र

पाचन तन्त्र की प्रक्रिया पांच महत्वपूर्ण भागों में पूरी होती है, जिसकी यहाँ चर्चा करेंगे:-

अमाशय (Stomach)

भोजन सबसे पहले अमाशय में 4 घन्टे तक रहने के बाद कुछ विशेष प्रकार के एन्ज्याम्स जैसे रेनिन और पेप्सिन द्वारा सरल पदार्थ में बदलने की प्रक्रिया शुरू होती है| ये अमाशय से विसर्जित होने वाले एन्ज्याम्स होते है जो बड़े अणुओ को तोड़कर सरल एवं छोटे अणु में परिवर्तित कर देते है| अमाशय में पीले रंग का हाइड्रोक्लोरिक अम्ल विद्यमान रहता है जो भोजन से आये हुए जीवाणु को नष्ट करने का कार्य करता है|

पक्वाशय (Duodenum)

अमाशय के बाद भोजन पक्वाशय में जाता है जो अम्लीय भोजन को क्षारीय बना देता है| इसमें अग्नाशय रस भोजन से मिलकर उसे घुलनशील बनाता है| इसमें मौजूद एन्ज्याम्स जैसे कि ट्रिप्सिन, एमाईलेज और लाइपेज आदि प्रोटीन एवं वसा को तोडकर उसे छोटे, सरल एवं घुलनशील बनाने के साथ-साथ ग्लिसरीन एवं फैटी एसिड में बदल देते है|

छोटी आंत (Small Intestine)

छोटी आंत में मौजूद एन्ज्याम्स जैसे एरेप्सिन, सुक्रेस, मॉलटेस और लाइपेज भोजन को अच्छे से पचाकर उसका अव्शोष्ण करते है| छोटी आंत की दीवारों से क्षारीय पदार्थ निकलता है जिसे आन्त्रिक रस कहा जाता है| एक स्वस्थ मानव के शरीर की छोटी आंत से २ ली. तक यह क्षारीय आन्त्रिक रस स्त्रावित होता है|

भोजन के अवशोषण के अंतर्गत पचा हुआ भोजन जब रक्त के साथ मिलता है तो उसे भोजन का अवशोषण कहा जाता है| इसके बाद यह भोजन शरीर जो पर्याप्त ऊर्जा एवं आवश्यक घटक प्रदान करता है जिसे स्वांगीकरण कहा जाता है| शेष बचा हुआ भोजन बड़ी आंत में प्रवेश करता है जिसे वह मौजूद जीवाणु मल के रूप में परिवर्तित कर देते है एवं गुदा के द्वारा उसका विसर्जन कर दिया जाता है|

यकृत (Liver)

पाचन प्रक्रिया के अंतर्गत यकृत का महत्वपूर्ण स्थान है| इसे मनुष्य के शरीर के सबसे बड़ी ग्रन्थि माना जाता है जिसका वजन २ kg तक हो सकता है| यकृत प्रोटीन को कार्बोहाइड्रेट्स में बदल देता है, इसके साथ ही इससे निकलने वाला पित रस भोजन के विघटन की प्रक्रिया को तेज कर देता है|

यकृत का मुख्य कार्य खून में ग्लूकोज के संतुलन को बनाये रखना भी है| यदि भोजन में वसा की कमी हो तो यह कार्बोहाइड्रेट्स के कुछ अंश को वसा में परिवर्तित कर देता है, जिससे वो कमी पूरी की जा सके| रक्त में थक्का बनाने के लिए फाइब्रिनोजन नाम का प्रोटीन सहायक है जिसको बनाने का कार्य भी यकृत द्वारा किया जाता है| इसके साथ यह RBC के मृत तन्तु को नष्ट करता है एवं शरीर के ताप को बनाये रखता है|

पित्ताशय (Gallbladder)

यकृत से विसर्जित होने वाले पित को जमा करने का कार्य पित्ताशय द्वारा किया जाता है| पित का मुख्य कार्य भोजन का क्षारीय अवस्था में परिवर्तित करना है जिससे कि अग्नाशय अपना कार्य कर सके| यह भोजन के साथ आने वाले जहरीले जीवाणुओं को नष्ट कर देता है एवं वसा का इमाल्सीकरण करता है|

अग्नाशय (Pancreas)

इसे मनुष्य के शरीर के दूसरी सबसे बड़ी ग्रन्थि माना जाता है, जिसमे से अग्नाशय रस निकलता है| अग्नाशय को पूर्ण पाचक कहा जाता है क्योकि इसमें वसा, कार्बोहाइड्रेट्स एवं प्रोटीन तीनो को पचाने के लिए एन्ज्याम्स मौजूद रहते है| यह भोजन को सरल एवं छोटे भागों में तोडकर उसका अच्छे से पाचन करके ग्लूकोज एवं शर्करा में परिवर्तित कर देता है, जिसमे लैंगरहैंस द्विपिका इसका सहायक अंग है|