मौलिक कण से अभिप्राय ऐसे कणों से है जो अन्य किसी कण या तत्व से नहीं बने होते,  क्योंकि यह स्वयं मूल कण होते हैं,  आधारशिला होते हैं।

परमाणु के एकदम मध्य का भाग नाभिक कहलाता है अथवा परमाणु के केन्द्र भाग को केन्द्रक या नाभिक कहते हैं।

परमाणु में मूल रूप से तीन तरह के कण पाये जाते हैं। इन प्राथमिक कणों से ही परमाणु बनता है, ये हैं- प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन।

सन् 1900 तक वैज्ञानिकों द्वारा यह खोज कर ली गई थी कि परमाणु में धनावेश व ऋणावेश से युक्त दो कण क्रमशः प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन पाये जाते हैं। इस समय तक न्यूट्रॉन की खोज नही की गयी थी। सन् 1932 में न्यूट्रॉन की खोज की गयी थी।

इन कणों में पाये जाने वाले विद्युत आवेशों को दर्शाने की इकाई “कूलाम्ब” है तथा इनके द्रव्यमान को “किलोग्राम” द्वारा दर्शाया जाता है।

प्रोटॉन

इसके खोजकर्ता रदरफोर्ड थे।  रदरफोर्ड द्वारा इसे प्रोटॉन नाम प्रदान किया गया था। उन्होंने ग्रीक भाषा के शब्द प्रोटोस से यह शब्द लिया था।

ये नाभिक के भीतर की तरफ पाये जाते हैं। ये परमाणु के मौलिक कण होते हैं और इन्हें प्राणु के नाम से भी सम्बोधित किया जाता है।

प्रोटॉन विद्युत के धनात्मक आवेश से युक्त होते हैं। इसपर स्थित धनावेश की मात्रा 1.602E-19 कूलाम्ब होती है। इसका द्रव्यमान 1.6726E-27 किलोग्राम होता है। प्रोटॉन को सांकेतिक रूप में p द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

सभी परमाणुओं में केन्द्र भाग में नाभिक पाया जाता है और प्रत्येक नाभिक में प्रोटॉन व न्यूट्रॉन एक साथ पाये जाते हैं, परन्तु उदजन इस प्रकार का तत्व है जिसके परमाणु के नाभिक में केवल प्रोटॉन ही पाया जाता है। इसमें प्रोटॉन के साथ न्यूट्रॉन नही पाया जाता। उदजन को हाइड्रोजन भी कहते हैं। यह अत्यन्त हल्का तत्व है जो सबसे अधिक मात्रा में ब्रह्माण्ड में उपस्थित रहता है।

न्यूट्रॉन

वैज्ञानिक जेम्स चैडविक द्वारा इसकी खोज की गयी थी।

यह परमाणु के केन्द्र भाग में नाभिक में प्रोटॉन के साथ पाया जाता है। इसपर विद्युत का न ऋणावेश होता है और न ही धनावेश अर्थात् यह आवेश रहित होते हैं। इनका द्रव्यमान प्रोटॉन के द्रव्यमान से थोडा सा अधिक ही होता है, क्योंकि ये आकार में भी प्रोटॉन से थोड़े बड़े होते हैं। सांकेतिक रूप में इसे n द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

केवल हाइड्रोजन (उदजन) के परमाणु में न्यूट्रॉन का अभाव रहता है, बाकी सभी प्रकार के तत्वों के परमाणुओं में न्यूट्रॉन व प्रोटॉन साथ में पाये जाते हैं।

इलेक्ट्रॉन

इन कणों के खोजकर्ता सर जे.जे.थॉमसन थे और जॉर्ज जोन्सटोन स्टॉनि द्वारा इन कणों को इलेक्ट्रॉन नाम दिया गया।

ये कण परमाणु के नाभिक के बाहरी सतह पर उनकी भिन्न-भिन्न वर्गों में स्थित रहते हैं तथा वहीं गति करते हुए घूमते रहते हैं। इन्हें विद्युदणु भी कहा जाता है। इसपर विद्युत का ऋणात्मक आवेश स्थित रहता है। इसपर विद्युत आवेश की मात्रा 1.6E-19 कूलाम्ब होती है और 9.11E-31किलोग्राम द्रव्यमान से युक्त होते हैं। सांकेतिक भाषा के रूप में इसे e द्वारा प्रकट किया जाता है।

गुरूत्वाकर्षण युक्त क्षेत्र व चुम्बकीय प्रभावी क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन का विशेष सहयोग व उपस्थिति होती है। प्रोटॉन व न्यूट्रॉन का मेल इलेक्ट्रॉन से होने पर ही परमाणु का सृजन होता है।

प्रोटॉन और न्यूट्रॉन एक साथ मिलकर जोड़ी के रूप में बन जाते है तो इसे न्यूक्लिऑन कहा जाता है। प्रोटॉन और न्यूट्रॉन के सह स्थिति में ही नाभिक का निर्माण होता है। नाभिक में स्थित नाभिकीय बल के माध्यम से ये आपस में बन्ध के रूप में जुड़ जाते हैं। परमाणु के नाभिक में स्थित प्रोटॉन व न्यूट्रॉन के द्रव्यमान के कुल योग से परमाणु का द्रव्यमान ज्ञात किया जाता है।

प्रोटॉन में पाया जाने वाला विद्युत का धनावेश उतना ही होता है, जितना इलेक्ट्रॉन में विद्युत का ऋणावेश होता है अर्थात् प्रोटॉन व इलेक्ट्रॉन में समान मात्रा में विद्युत आवेश पाया जाता है