परजीवी जीव वो जीव होते है, जो अपने भरण-पोषण एवं सुरक्षा के लिए दूसरे जीवो पर आश्रित होते है। ये जीव दूसरे जीवो के रक्त, एवं मांस से अपना पेट भरते है, और उन्ही जीवों के शरीर पर अंडे देते है और अपनी आबादी को बढाते है।

परजीवी जीवो के अंतर्गत जूं, जो मानव के बालों की जड़ो से चिमटकर खून चूसती है और अपनी संख्या बढाती है, इसके साथ ही किलनी नामक परजीवी जो कि पशुओ की त्वचा से चिमटकर उनका खून चूसते है। जोंक भी परजीवी का एक अच्छा उदहारण है, जो खाल से खून चूसकर जीवित रहता है।

परजीवी की उत्पत्ति:

परजीवियों की उत्पत्ति, काफी पुराना इतिहास है, वैज्ञानिक दृष्टिकोण के अंतर्गत परजीवियों के अध्यन करने की प्रक्रिया को पारजैविकी विज्ञानं कहा जाता है। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रकार शामिल किये गए है:-

  • आयुर्विज्ञान पारजैविकी
  • पशु पारजैविकी
  • परिमाणात्मक पारजैविकी
  • परजीवी परिस्थितिकी
  • सरंचनात्मक पारजैविकी

परजीवी के उदाहरण के रूप में:

  • पशुओ में पाए जाने वाले परजीवी जैसे:- ल्युसिलिया सेरिकेटा नामक एक मक्खी, जो अपने वंश को बढ़ाने के लिए जानवरों की त्वचा में अपने अंडे देती है, प्रजनन करती है, और उन्ही अण्डों में से और परजीवी निकलकर पशु को संक्रमित कर देते है और विभिन्न प्रकार के रोगों के लिए जिम्मेदार होते है।
  • मलेरिया रोग मच्छर के परजीवी से फैलता है, जिसके अंतर्गत प्लाजमोडीयम फैल्सिपेरम, मैलेराय एवं प्लाजमोडीयम ओवेल नामक परजीवीयो को जिम्मेदार ठहराया गया है।
  • अलग-अलग प्रजाति के परजीवी अलग-अलग रोगों के कारक होते है, एवं ये मनुष्य एवं पशु दोनों को संक्रमित कर सकते है।