परजीविता का सम्बन्ध साधारणतया उन जीवो से होता है, जो भोजन प्राप्त करने के लिए दुसरे जीवो पर निर्भर होते है। परजीविता के अंतर्गत जीव-जन्तु दुसरे जीवो के साथ परपोषी और मेहमान का तादतम्य स्थापित करके अपने जीवन का निर्वहन करते है।

परजीविता के अंतर्गत, एवं वैज्ञानिक बिभाजन के अनुसार परिजीविता में दो प्रकार के परजीवी शामिल किये गए है:-

  • बाह्य परजीवीता
  • आन्तरिक परजीवीता

परिजीवता की उत्पत्ति:

मूल रूप से यह कहना कठिन है कि परिजीविता की उत्पति कितने वर्ष पहले हुई होगी, किन्तु वैज्ञानिक अनुमान के अंतर्गत ये घटनाक्रम काफी पुराना है, शायद तबसे, जबसे इस पृथ्वी की उत्पति हुई, साथ ही जीवों के जीवन का आरम्भ हुआ तबसे परिजीविता की घटना अस्तित्व में आई।

परिजीविता की उत्पत्ति के कारण:

परिजीविता का इतिहास काफी पुराना है, परन्तु इसे क्या कारण रहे होंगे, जिन्होंने परिजीविता को जनम दिया, आइये उन कारणों पर थोडा प्रकाश डालते है:-

  • सहवास:

आरम्भ में जीव-जन्तु सहवास की प्रक्रिया से अनजान रहे होगे, और आने वाले जीवन को सुरक्षित रखने हेतु बिभिन्न जीवो से सहवास की प्रक्रिया शुरू हुई होगी, जिससे परजीविता को बढ़ावा मिला होगा।

  • भोजन प्राप्ति:

भोजन प्राप्ति, परिजीविता का प्रमुख कारण हो सकता ही, क्योकि जो जीव-जन्तु मृत प्राणियों एवं पादपों को खाकर अपना जीवन निर्वहन करते है, जिसे विज्ञानं ने मृतोपजीविता का नाम दिया है। इस प्रक्रिया ने परजीवियों को एक से दूसरी जगह पहुचाने में सहायता की और परिजीविता को उत्पन्न किया।

  • अन्य जीवो में अड़े देना:

कुछ कीटों, को दुसरे जीवो में अंडे देने की प्रव्रति ने भी परिजीविता की घटना को बढ़ावा दिया है।