परमाणु द्रव्यमान

ब्रह्माण्ड में समाहित प्रत्येक द्रव्य में कोई न कोई भार अवश्य होता है। चूँकि प्रत्येक द्रव्य का सृजन परमाणुओं से हुआ होता है तो सम्भवतः परमाणु में भी कुछ भार अवश्य ही होता है। इसे ही परमाणु द्रव्यमान कहा जाता है। किसी परमाणु का द्रव्यमान उसके कणों में समाहित होता है। ये कण प्रोटॉन, न्यूट्रॉन व इलेक्ट्रॉन है। इनमें पाया जाने वाला भार या द्रव्यमान इतना होता है कि उसे ग्राम या किलोग्राम में नही ज्ञात किया जा सकता। इस कारण इसे ज्ञात करने की इकाई को परमाणु द्रव्यमान इकाई कहते हैं।

सन् 1961 से किसी तत्व के परमाणु द्रव्यमान की गणना के लिए कार्बन-12 को मानक रूप प्रदान किया गया।

कॉर्बन-12 (C-12) के बाहरवें भाग में पाये जाने वाले मान से किसी तत्व के एक परमाणु की तुलना की जाती है अर्थात् यह गणना की जाती है कि एक द्रव्य में पाये जाने वाले विभिन्न तत्वों के अनगिनत परमाणुओं में से एक परमाणु का भार कार्बन के एक परमाणु के बाहरवें हिस्से के भार से कितना अधिक है।

कार्बन के बाहरवें हिस्से पर परमाणु द्रव्यमान की इकाई 1.66×10(-24)ग्राम है।

औसत परमाणु द्रव्यमान

सभी द्रव्यों में भिन्न-भिन्न प्रकृति के गुण पाये जाते हैं। इन द्रव्यों के गुणों पर परमाणु द्रव्यमान का प्रभाव पड़ता है। द्रव्यों में पाये जाने वाले तत्वों में भी भिन्नता पाई जाती है। एक समान तत्वों में समस्थानिक भिन्नता पाई जाती है अर्थात् एक ही तत्व के दो या अधिक समस्थानिक प्राकृतिक रूप से मौजूद रहते हैं। ये समस्थानिक एक समान अनुपात में स्थित रहते हैं अथवा इनमे स्थायित्व बना रहता है। भिन्न-भिन्न समस्थानिकों पर द्रव्यमान भी भिन्न होता है। अतः इन समस्थानिकों के द्रव्यमान का आनुपातिक रूप से औसत निकालकर परमाणुओं का औसत परमाणु द्रव्यमान ज्ञात किया जाता है।

इसे उदाहरण द्वारा आसानी से समझा जा सकता है, क्लोरीन में क्रमशः 75% व 25% के अनुपात में (35 u) द्रव्यमान व (37u) द्रव्यमान के परमाणु के समस्थानिक पाये जाते हैं। सूत्र द्वारा हल करने पर 35 का 75% और 37 का 25% करके औसत परमाणु द्रव्यमान 35.5 u प्राप्त होगा।

आणविक द्रव्यमान

यह तो सर्वविदित है कि किसी भी द्रव्य के सृजन में अणुओं का योगदान होता है तथा अणुओं का निर्माण बहुत से परमाणुओं से होता है। सरलतम रूप में यह कह सकते हैं कि इन परमाणुओं के द्रव्यमान के मिलने से अणुओं का द्रव्यमान प्राप्त होता है अर्थात् सभी परमाणुओं का कोई न कोई द्रव्यमान अवश्य रूप से होता है। परमाणु द्रव्यमान को मिलाकर इनका योग करने से प्राप्त परिणाम को आणविक द्रव्यमान कहा जाता है।

आणविक द्रव्यमान को ज्ञात करने पर जब इसे ग्राम इकाई में दर्शाया जाता है तो सम्बंधित अणु को ग्राम अणु कहा जाता है। उदाहरण के लिए, ऑक्सीजन के आणविक द्रव्यमान को (O2)32 के रूप में दर्शाया जाता है, इसीलिए इसका ग्राम आणविक द्रव्यमान 32 ग्राम होता है।

सूत्र इकाई द्रव्यमान

किसी यौगिक का निर्माण अलग-अलग प्रकृति वाले अणुओं से मिलकर होता है। ये सभी अणु मिलकर वृहत् रूप से एक बड़े अणु का सृजन करते हैं। इसे राक्षसी या वृहताकार अणु भी कहते हैं। धनायन व ऋणायन से युक्त यौगिकों में पाये जाने वाले अणुओं व इसके परमाणुओं के द्रव्यमान की गणना के लिए सूत्र इकाई द्रव्यमान का प्रयोग किया जाता है।

हालांकि सूत्र इकाई द्रव्यमान भी आणविक द्रव्यमान के समान है, परन्तु इसमें आणविक द्रव्यमान का कोई प्रयोग नही किया जाता है आणविक द्रव्यमान की भांति इसमें भी यौगिक में मौजूद परमाणुओं के द्रव्यमान का कुल जोड़ करके सूत्र इकाई द्रव्यमान की गणना की जाती है

तुल्यांकी भार

एक द्रव्य में पाये जाने वाले अणुओं के भार और तत्वों की संयोजकता के अनुपात को ही तुल्यांकी भार कहा जाता है। यहाँ विशेष ध्यान देने योग्य बात यह है कि किसी द्रव्य में पाये जाने वाले तत्व हाइड्रोजन के 1 ग्राम भार के या ऑक्सीजन के 8 ग्राम भार के या  क्लोरीन के 35.05 ग्राम भार के साथ जुड़कर क्रियाशील होते हैं।

किसी भी द्रव्य में भिन्न-भिन्न तत्व या यौगिक या मिश्रण पाये जाते हैं। इस कारण परमाणुओं में भी विभिन्नता पाई जाती है।