पदार्थ ही द्रव्य है। सृष्टि में पाई जाने वाली कोई भी वस्तु या पदार्थ जिसमें स्थान घेरने की क्षमता हो तथा जिसका कोई भार हो, द्रव्य कहलाती है।

मनुष्य अपनी ज्ञानेन्द्रियों द्वारा द्रव्य की उपस्थिति को महसूस कर सकता है।
द्रव्य में वे सभी पदार्थ या तत्व सम्मिलित किये जाते हैं, जिनका या तो एक निश्चित आकार हो या जिनका घनत्व निश्चित हो या जिनका आयतन निश्चित हो अथवा जिनका आकार, घनत्व व आयतन तीनों ही निश्चित हो; द्रव्य कहलाते हैं।
किसी वस्तु में पाये जाने वाले पदार्थ की मात्रा को उस वस्तु का द्रव्यमान कहा जाता है। यह कभी भी शून्य नही होता है।

द्रव्य दो तरह के होते हैं-
शुद्ध द्रव्य
अशुद्ध द्रव्य

शुद्ध द्रव्य

तत्व- कुछ पदार्थ प्राकृतिक रूप से ही सृष्टि में विद्यमान होते हैं। किसी भी रासायनिक या भौतिक प्रायोगिक क्रियाओं के द्वारा इनका निर्माण नही किया जा सकता है। इन पदार्थों को ही तत्व कहा जाता है। जैसे- चाँदी, सोना, हाइड्रोजन आदि।

यौगिक- दो या अधिक तत्वों के आनुपातिक रूप से संयोग होने से निर्मित नए तत्व, जिनमें पाये जाने वाले भिन्न-भिन्न तत्वों को रासायनिक क्रिया द्वारा पृथक किया जाना सम्भव हो, यौगिक कहलाते हैं। जैसे- जल, नमक आदि।

अशुद्ध द्रव्य

मिश्रण- दो या अधिक तत्वों के असमान मात्रा में या असमान अनुपात में संयोजन होने से जो एक पदार्थ या तत्व निर्मित होता है, उसे मिश्रण कहा जाता है।

इस प्रकार तत्वों के अनुपातिक संयोजन व तत्वों के असमानुपातिक मिश्रण आदि में द्रव्य को वर्गीकृत किया गया है।
वर्तमान समय तक 115 तत्वों को खोजा जा चुका है। इन तत्वों में 92 तत्व ऐसे है जो प्राकृतिक देन है और बाकी के तत्व अप्राकृतिक रूप से निर्मित किये गए हैं।

पहले द्रव्य की अवस्थाओं को तीन भागों में विभाजित किया गया था। इसमें थे- ठोस, द्रव, गैस। परन्तु अभी बीते कुछ वर्षों के अध्ययन से प्लाज़्मा को भी द्रव्य रूप में माना जाने लगा है
अतः द्रव्य के अन्तर्गत आते हैं- ठोस, द्रव, गैस व प्लाज़्मा।

महर्षि कणाद के अनुसार किसी द्रव्य को विभाजित करने से वह छोटे-छोटे अणुओं में विभक्त हो जाता है, ये अणु जिन सूक्ष्म कणों से बने होते हैं, उन्हें परमाणु कहते हैं। परमाणु का विभाजन सम्भव नहीं है।

भौतिकशास्त्री जॉन डॉल्टन द्वारा यह विचारधारा रखी गयी कि द्रव्य छोटे-छोटे कणों से मिलकर बना होता है। इन कणों को परमाणु कहते हैं तथा इनको विभाजित नहीं किया जा सकता।

बाद में जे.जे.थॉमसनरदरफोर्ड द्वारा यह विचार प्रस्तुत किया गया कि परमाणु का विभाजन किया जाना सम्भव है। परमाणु का निर्माण इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन व न्यूट्रॉन से मिलकर होता है।